Bare ActsThe Press or Pustak Ragistrikaran Adhiniyam,1867

Section 10

1922 के अधि नि यम िं

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1922 के अधि नि यम िं.14 की ि र 3 और अिुि.चनीे द्र् र “ प्-पब् क ” िब् द के स् ा ि पर प्रनत स् ा िप त [िारा-5] प्रेस और पुस् ाक रजि स् ी.करण अधि नि यम,1867 स् ा िीेय अधि क रर त में ऐि िम चन रप् मुद्रि त य प्रक सि त कक य ज एग 1* * * ह ष्ज र होग ] और नि म् िसल णण त घोषण करेग ता उिकी दो प्रनत यों पर हस् त क्षर करेग :- “ मैं, क ण, घोिष त करत ह.ं कक मैं ..................(स्ा ि) में, या ष्स् ा नत , 2 [मुद्रि त य प्रक सि त कक ए ज िे र् ले अार् मुद्रि त और प्रक सि त कक ए ज िे र् ले] ..............ि मक 3 [िम चन रप्] क मुिक (य प्रक िक,य मुिक और प्रक िक) ह.ं ” । और इि घोषण के प्ररूप की पहली पंष्त त में जह ं मुिण य प्रक िि कक य ज त है उि भर्ि के ब रे में िही-िही और . क-. क िर् र्रण भर ज एग । 4 [(2क) नि यम (2) के अिीेि की प्रत येक घोषण में, िम चन रप् क ि म, र्ह भ ष , ष्ज िमें उिक प्रक िि कक य ज ि है, ता उिकी प्रक िि आर्धि कत िर् नि द्रदव ष् . की ज एगीे और उिमें ऐिीे अन य िर् सि षम द्र. य ं भीे हों गीे, जो िर् द्रह त की ज एं ।] 5 [(2ण) जह ं नि यम (2) के अिीेि की घोषण करिे र् ल िम चन रप् क मुिक य प्रक िक उिक स् र् मीे िहीं है र्ह ं उि घोषण में स् र् मीे क ि म िर् नि द्रदवष् . कक य ज एग और उिके ि ा स् र् मीे क सल णण त रूप में ऐि प्र धि क र भीे होग ष्ज िमें उत त व् यष्त त को घोषण करिे ता उि पर हस् त क्षर करिे के सल ए प्र द्नय कृत कक य गय है । (2ग) िम चन रप् प्रक सि त करिे िे प.र्व उि िम चन रप् की ब बत नि यम (2) के अिीेि घोषण ता ि र 6 के अिीेि उिक अधि प्रम णण त कक य ज ि आर्श यक होग । (2घ) जह ं कक िीे िम चन रप् के ि म य उिकी भ ष य उिकी प्रक िि-आर्धि कत में परर र्तवि कक य गय है र्ह ं घोषण प्रभ र्हीि हो ज एगीे और िम चन र प् के प्रक िि को चन ल. करिे िे प.र्व िई घोषण आर्श यक होगीे । (2 .) ष्ज तिीे ब र कक िीे िम चन रप् के स् र् सम त र् में परर र्तवि कक य ज त है उतिीे ब र िई घोषण आर्श यक होगीे ।] 6 [(3)] ष्ज तिीे ब र मुिण ता प्रक िि के स् ा ि में परर र्तवि कक य ज त है उतिीे ब र िई घोषण आर्श यक होग : 7 [परन तु जह ं ऐि परर र्तवि तीेि द्रद ि िे अधि क की अर्धि के सल ए िहीं है और परर र्तवि के पश चन तम मुिण अार् प्रक िि क स् ा ि नि यम (2) में नि द्रदवष् . मष्ज स् ेे. की स् ा िीेय अधि क रर त में रहत है र्ह ं िई घोषण आर्श यक िहीं होगीे यद्रद - (क) परर र्तवि के चनौबीेि घं.े के भीेतर परर र्तवि िे िम् बष्न ि त िर् र्रण दे द्रद य ज त है ; और (ण) िम चन रप् क मुिक य प्रक िक य मुिक और प्रक िक र्ही व् यष्त त रहत है ।]

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