Bare ActsThe Press or Pustak Ragistrikaran Adhiniyam,1867

Section 11

1955 के अधि नि यम िं

Amendment status not verified — confirm the current text below against the official source.

1955 के अधि नि यम िं. 55 की ि र 13 द्र् र (1-7-1956 िे) अंत:स् ा िप त । [िाराएं 16-18] प्रेस और पुस् ाक रजि स् ी.करण, 1867 1 [16. पुस् ाके ि देिे के शल ए या मुद्रक को मािधच त्र ि देिे के शल ए िाजस् ा -यद्रद इि अधि नि यम की ि र 9 में नि द्रदव ष् . कक िीे पुस् तक क कोई मुिक उि ि र के अिुिरण में उिकी प्रनत य ं देिे में उपेक्ष करेग तो, र्ह ऐिे प्रत येक व् यष्त त िम के सल ए िरक र के पक्ष में पचन ि रूपए िे अिधि क उतिीे र सि िमपह्त करेग ष्ज ति उि स् ा ि मे, जह ं र्ह पुस् तक मुद्रि त की गई ाीे अधि क रर त रणिेर् ल मष्ज स् ेे.,उि अधि क री के, ष्ज िे प्रनत य ं दी ज िीे ाीें, य इि नि सम त उि अधि क री द्र् र प्र धि कृत कक िीे व् यष्त त के आर्ेदि पर उि परर ष्स् ा नत यों में उि व् यष्त त िम क सल ए उधचन त ि रर त अर्ि रर त करे, और ऐिीे र सि के अनत रर त त उतिीे र सि और िमपह्त करग ष्ज तिीे र्ह मष्ज स् ेे. उि प्रनत यों के म.ल य के रूप में अर्िरर त करे, जो मुिक द्र् र दी ज िीे ाीें ।] यद्रद कोई प्रक िक य अन य व् यष्त त , जो मुिक को नि योष्ज त करे इि अधि नि यम की ि र 9 के द.िरे पैरे में िर् द्रह त रीनत िे ऐिे, म िधचन ्ों ,मुिणों य उत कीणों को जो उि ि र के उपबल िों क अिुप लि करिे में मुिक को िमाव बि िे के सल ए आर्श यक हैं, उिे देिे में उपेक्ष करेग , तो ऐि प्रक िक य अन य व् यष्त त प्रत येक ऐिे व् यष्त त िम के सल ए, पचन ि रूपए िे अिधि क उतिीे र सि ष्ज तिीे प.र्ोत त मष्ज स् ेे. प.र्ोत त आर्ेदि पर उि परर ष्स् ा नत यों में उि व् यष्त त िम के सल ए उधचन त ि ष्स् त अर्िरर त करे, िरक र के पक्ष में िमपह्त करेग और ऐिीे र सि के अनत रर त त उतिीे और र सि िमपह्त करेग ष्ज तिीे र्ह मष्ज स् ेे. उि म िधचन ्ों ,मुिणों य उत कीणों के म.ल य के रूप में अर्ि रर त करे, जो ऐिे प्रक िक य अन य व् यष्त त द्र् र द्रद ए ज िे ाे । 2 [16.क सरकार को समाचारपत्र की प्रना यां मुफ्ा ि देिे के शल ए िाजस् ा - यद्रद 3 [भ रत] में प्रक सि त कक िीे िम चन रप् क कोई मुिक ि र 11क के अिुप लि में उिकी प्रनत य ं देिे में उपेक्ष करेग तो र्ह, उि अधि क री की, ष्ज िे प्रनत य ं दी ज िीे चन द्रह ये ाीें य इि नि सम त उि अधि क री द्र् र प्र धि कृत कक िीे व् यष्त त की सि क यत पर, उि स् ा ि में, जह ं िम चन रप् क मुिण कक य गय ा , अधि क रर त रणिे र् ले मष्ज स् ेे. द्र् र दोषसि िद्ध पर, जुम विे िे दं िीेय होग जो प्रत येक व् यष्त त िम के सल ए पचन ि रूपि तक क हो िकेग । 4.[16ख. प्रेस रजि स् ीार को समाचारपत्र की प्रना यां ि देिे के शल ए िाजस् ा - यद्रद भ रत में प्रक सि त कक िीे िम चन रप् क कोई प्रक िक ि र 11ण के अिुप लि में उिकी प्रनत य ं देिे में उपेक्ष करेग तो र्ह, प्रेि रष्ज स् े र की सि क यत पर, उि स् ा ि में, जह ं उि िम चन रप् क मुिण कक य गय ा , अधि क रर त रणिे र् ले मष्ज स् ेे. द्र् र दोषसि िद्ध पर , जुम विे िे दं िीेय होग , जो प्रत येक व् यष्त त िम के सल ए पचन ि रूपए तक क हो िकेग ।

Section 11 – The Press or Pustak Ragistrikaran Adhiniyam,1867 | DailyLaw.ai