Bare ActsThe Press or Pustak Ragistrikaran Adhiniyam,1867

Section 9

1960 के अधि नि यम िं

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1960 के अधि नि यम िं.26 की ि र 2 द्र् र ( 1-10.1960 िे) “ घोषण ” के स् ा ि पर प्रनत स् ा िप त । [िाराएं 5-6] प्रेस और पुस् ाक रजि स् ी.करण अधि नि यम, 1867 (ण) कक िीे अन य िम चन रप् की दि में, 1 [ि र 6 के अिीेि घोषण के अनघ प्रम णि के] तीेि म ि के भीेतर, िहीं कर द्रद य ज त र्ह ं िम चन रप् की ब बत की गई प्रत येक घोषण ि.न य होगीे और ऐिीे प्रत येक दि में िम चन रप् प्रक सि त कक ए ज िे िे प.र्व िई घोषण आर्श यक होगीे । (6) जह ं तीेि म ि की कक िीे अर्धि में कोई दैनि क, ब् ि प् त द्रह क, द्रद्द ि प् त द्रह क, ि प् त द्रह क य प क्षक्ष क िम चन रप्, अपिे अंक उतिीे िंख य में प्रक सि त करत है, ष्ज िकी िंख य तत िम् बन िीे घोषण के अिुि र प्रक सि त होिे र् ली िंख य के आिे िे कम है र्ह ं घोषण प्रभ र्हीि हो ज एगीे और िम चन रप् क प्रक िि ज री रणिे िे प.र्व िई घोषण आर्श यक होगीे । (7) जह ं कक िीे अन य िम चन रप् क प्रक िि ब रह म ि िे अधि क की अर्धि के सल ए बंद हो गय है र्ह ं उिके ब रे में की गई प्रत येक घोषण प्रभ र्हीि हो ज एगीे, और िम चन रप् के पुि: प्रक िि िे प.र्व िई घोषण आर्श यक होगीे । (8) कक िीे िम चन रप् के ब रे में प्रत येक िर् द्यम ि घोषण उि मष्ज स् ेे. द्र् र रद्द कर दी ज एगीे, ष्ज िके िमक्ष उिीे िम चन रप् के ब रे में िई घोषण की ज ए और उि पर हस् त क्षर कक ए ज एं : 2[ परन तु कोई भीे व् यष्त त 3 [जो म म.ली तौर िे भ रत में नि र् ि िहीं करत है य ] ष्ज ििे भ रतीेय र्यस् कत अधि नि यम, 1875 (1875 क 9) के अिुि र अार् ष्ज ि िर् धि िे र्ह र्यस् कत प्र प् त करिे की ब बत ि सि त होत है उि िर् धि के अिुि र र्यस् कत प्र प् तम िहीं की है, इि ि र द्र् र िर् द्रह त घोषण करिे के सल ए ि तो अिु् त कक य ज एग और िहीं कोई ऐि व् यष्त त कक िीे िम चन रप् क िंप दि करेग । ] 4 [5क. िम् मू-कच मीर में मुद्रणालय रखिे िाले ाथा समाचारपत्रों के मुद्रक ाथा प्रकािक वि नि ददणष् ट अिधि के भीार िई घोषिाएं करेंगे ाथा उि पर हस् ााक्षर करेंगे- (।) कोई भीे व् यष्त त , ष्ज ििे जम् म. ए् कश मीेर स् .े. प्रेि ए् पष्ब् ल केिि ऐत ., िंर्तम 1989(िंर्तम 1989 क जम् म.-कश मीेर अधि नि यम िंख य ंक 1) की ि र 4 के अिीेि कक िीे मुिण लय के ब रे में घोषण की है ता उि पर हस् त क्षर कक ए है, 5[ 1968 के द्रद िम् बर के इत तीेिर्ें द्रद ि के पश चन तम] पुस् तकों य प्ों के मुिण के सल ए कोई भीे मुिण लय तब तक अपिे कब् जे में िहीं रणेग , 5[ जब तक कक उि त रीण की िम ष्प् त के प.र्व] र्ह इि अधि नि यम की ि र 4 के अिीेि उिे मुिण लय के ब रे में िई घोषण िहीं कर देत है ता उि पर हस् त क्षर िहीं कर देत है । (2) प्रत येक ऐि व् यष्त त , ष्ज ििे जम् म. ए् कश मीेर स् .े. प्रेि ए् पष्ब् ल केिि ऐत .णम िंर्तम 1989 (िंर्तम 1989 क जम् म.-कश मीेर अधि नि यम िंख य ंक 1) की ि र 5 के अिीेि कक िीे िम चन रप् के ब रे में कक िीे घोषण पर हस् त क्षर कक ए हैं, 5[1968 के द्रद िम् बर के इत तीेिर्ें द्रद ि के पश चन तम ] उि घोषण में उष्ल ल णण त िम चन रप् क िम् प दक, मुिक य प्रक िक केर्ल उिीे दि में रहेग जब र्ह उि त रीण की िम ष्प् त के प.र्व इि अधि नि यम की ि र 5 में अधि कधा त नि यमों के नि यम (2) के अिीेि उि िम चन रप् की ब बत िई घोषण कर देत है ता उि पर हस् त क्षर कर देत है, अन या िहीं ।

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