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आदेशों के हनष्पादन को रोका जाना – (1) राजस्व अहधकारी, हजसने कोई आदेश पाररत ककया हो या उसका पद उत्तरवती अपील या पुनरीिण के हलये हनहहत की गई कालावहध का अवसान होने के पूवड, ककसी भी समय, यह हनदेश दे सकेगा कक ऐसे आदेश का हनष्पदान उतने समय तक के हलये रोक कदया जाये जो अपील या पुनरीिण फाइल करने यथा अपील या पुनरीिण प्राहधकारी से रोक आदेश (स्टे आडडर) अहभप्राप्त करने के हलये अपेहित हो । (2) अपील या पुनरीिण प्राहधकारी; ककसी भी समय, यह हनदेश दे सकेगा कक उस आदेश का हजसकी कक अपील की गई है या हजसके कक हवरूद्ध पुनरीिण ककया गया है, हनष्पादन उतने समय तक के हलये रोक कदया जाये हजतना कक वह ठीक समझे: 36 परन्तु आदेश का हनष्पादन, एक बार में, तीन मास से अहधक के हलए या अगली सुनवाई की तारीख तक, जो भी पूवडतर हो, नहीं रोका जाएगा । (3) वह प्राहधकारी, जो धारा 50 या धारा 51 द्वारा प्रदत्त शहियों का प्रयोग कर रहा हो, यह हनदेश दे सकेगा कक उस आदेश का, जो पुनरीिण या पुनर्तवलोकन के अधीन है, हनष्पदान उतने समय तक के हलये रोक कदया जाये हजतना कक वह ठीक समझे: परन्तु आदेश का हनष्पदान, एक बार में, तीन मास से अहधक के हलए या अगली सुनवाई की तारीख तक, जो भी पूवडतर हो, नहीं रोका जाएगा। (4) ककसी आदेश का हनष्पादन रोक कदये जाने का हनदेश देने वाला राजस्व अहधकारी या प्राहधकारी ऐसी शतें अहधरोहपत कर सकेगा या ऐसी प्रहतभूहत कदये जाने का आदेश दे सकेगा जैसी कक वह ठीक समझे । (5) कोई ऐसा आदेश, हजससे ककसी आदेश के हनष्पादन को रोक कदये जाने का हनदेश कदया गया हो, इस धारा के उपबन्धों के अनुसार ही पाररत ककया जाएगा अन्यथा नहीं।