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पररभाषाएँ – (1) इस संहहता में, जब तक हवषय या संदभड से कोई बात हवरूद्ध न हो, -- (क) “आबादी” से अहभप्रेत है – नगरेतर िेत्र के ककसी ग्राम में उसके हनवाहसयों के हनवास के हलये या उससे आनुषंहगक प्रयोजनों के हलये समय-समय पर आरहित िेत्र और इस अहभव्यहि के ककसी अन्य स्थाहनक पयाडय, जैसे “ग्राम स्थल” या “गाँव स्थान” का अथड भी तदनुसार लगाया जायेगा; (ख) “कृहष” के अन्तगडत है – (एक) वार्तषक या हनयतकाहलक फसलों का, हजसमें पान तथा ससघाड़े और उद्यान की उपज सहभमहलत है, उगाया जाना; (दो) उद्यान कृहष; (तीन) फलोद्यान लगाना तथा उनका समारिण; (चार) चारे, चराई या छप्पर छाने की घास के हलये भूहम का आरहित ककया जाना; और (पांच) नगरीय िेत्रों की उपांत सीमा से पांच ककलोमीटर से अहधक की दूरी पर हस्थत ककसी िेत्र में कुक्कुट पालन, मछली पालन या पशु पालन के हलए भूहम का उपयोग करना । 13 (ग) “कृहष वषड” से अहभप्रेत है 1 जुलाई या ऐसी अन्य तारीख को, हजसे राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, हनयत करें, प्रारभभ होने वाला वषड; (घ) “बोडड” (मण्डल) से अहभप्रेत है धारा 3 के अधीन गरठत राजस्व बोडड; (ड़) “वास्तहवक कृषक” से अहभप्रेत है कोई ऐसा व्यहि जो भूहम पर स्वयं खेती करता है या हजससे युहियुि रूप से यह प्रत्याशा की जा सकती है कक वह स्वयं खेती करेगा; (च) “सहकारी सोसायटी” से अहभप्रेत है सहकारी सोसायरटयों से सभबहन्धत ककसी हवहध के, जो राज्य के ककसी िेत्र में तत्समय प्रवृत्त है, अधीन उस रूप में रहजस्रीकृत सोसायटी; (छ) “सरकारी वन” से अहभप्रेत है कोई ऐसा वन जो भारतीय वन अहधहनयम, 1927 (1927 का संखयांक 16) के उपबन्धों के अनुसार आरहित वन या संरहित वन के रूप में गरठत ककया गया है; (ज) “सरकारी पट्टेदार” से अहभप्रेत है वह व्यहि जो राज्य सरकार से धारा 181 के अधीन भूहम धारण करता है; (झ) “खाता” से अहभप्रेत है, (एक) ऐसी भूहम-खण्ड हजस पर भू-राजस्व पृथक रूप से हनधाडररत ककया गया है और जो एक भूधृहत के अधीन धाररत है; और (दो) कृषक द्वारा धाररत भूहम के संदभड में कोई ऐसा भूहम-खंड जो भूहम स्वामी से एक ही पट्टे के अधीन या एक ही संवगड की शतों के अधीन धाररत है । (ज्ञ) “सुधार” से ककसी खाते के संदभड में, अहभप्रेत है कोई ऐसा संकमड हजससे खाते के मूल्य में ताहत्वक वृहद्ध होती है, खाते के हलये उपयुि है तथा उस प्रयोजन से संगत है हजसके हलये खाता धाररत है और जो यकद खाते पर हनष्पाकदत न ककया हो, तो या तो प्रत्यित: उसके फायदे के हलये हनष्पाकदत ककया गया है या हनष्पाकदत ककया जाने के पिात् उसके हलये प्रत्यित: फायदाप्रद बना कदया गया है; और पूवडगामी उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, उसके अन्तगडत है – (एक) कृहष प्रयोजनों के हलये जल के संग्रहण, प्रदाय या हवतरण के हलये तालाबों, कुओं, जल सरहणयों, बाँधों तथा अन्य संकमों का सहिमाडण; (दो) भूहम के जल-हनकास के हलये या बाढ़ों से या जल द्वारा कटाव से या जल से होने वाले अन्य नुकसान से भूहम के संरिम के हलये संकमों का सहिमाडण; (तीन) वृिारोपण और भूहम का कृष्यकरण, भूहम की सफाई, उसका घेरा लगाना, उसे समतल करना या उसकी सीढ़ी बन्दी करना; 14 (चार) आबादी या नगरीय िेत्र में न होकर अन्यत्र होने वाले खाते पर या उसके सामीप्य में ऐसे भवनों का पररहनमाडण जो उस खाते के सुहवधाजनक या लाभदायक उपयोग या अहधगम के हलये अपेहित हों; और (पाँच) पूवडगामी संकमों में से ककसी भी संकमड का नवीकरण या पुनसडहिमाडण या उसमें पररवतडन या पररवधडन । ककन्तु उसके अन्तगडत हनम्नहलहखत नहीं है – (क) अस्थायी कुएँ और ऐसी जलसरहणयाँ, बाँध समतलन घेरे या अन्य संकमड या ऐसे संकमों में छोटे-मोटे पररवतडन या उनकी मरभमत जो कक उस स्थान के खेहतहरों द्वारा कृहष के मामूली अनुिम में सामान्यत: की जाती है; या (ख) कोई ऐसा संकमड, हजससे कहीं भी हस्थत ककसी ऐसी भूहम के मूल्य में सारभूत रूप से कमी होती है हजसे कक कोई अन्य व्यहि भूहमस्वामी की हैहसयत में या मौरूसी कृषक की हैहसयत में अहधभोग रखता है । स्पष्टीकरण – ककसी ऐसे संकमड को, हजससे, हवहभि खातों को फायदा पहुँचता है, ऐसे खातों में से प्रत्येक खाते के संबंध में सुधार समझा जा सकेगा । (ट) “भूहम” से अहभप्रेत है धरती की सतह का कोई भाग चाहे वह जल के नीचे हो या न हो; और जहाँ भी इस संहहता के प्रहत हनदेश ककया गया है, वहाँ उसके सभबन्ध में यह समझा जायेगा कक उसके अन्तगडत वे समस्त चीजें हैं, जो ऐसे भूहम से बद्ध हैं, या ऐसी भूहम के बद्ध ककसी चीज से स्थायी रूप से जकड़ी हुई हैं; (ठ) “भूहमहीन व्यहि” से अहभप्रेत है वह व्यहि जो वास्तहवक कृषक है और जो अकेले या अपने कुटुभब के अन्य सदस्यों के संयुि रूप से कोई भूहम धारण नहीं करता है या इतनी भूहम धारण है हजसका िेत्रफल उस िेत्रफल से कम है जो कक इस संबंध में हवहहत ककया जाये; स्पष्टीकरण – इस खण्ड के प्रयोजनों के हलये यह समझा जायेगा कक ककसी व्यहि का कुटुभब उसकी पत्नी या पहत, सन्तहत तथा माता-हपता से हमलकर बना है । (ड) “भूहम अहभलेख” से अहभप्रेत है इस संहहता के उपबन्धों के अधीन रखे गये अहभलेख; (ढ) “हवहध व्यवसायी” से अहभप्रेत है कोई ऐसा व्यहि जो हवहध व्यवसायी अहधहनयम, 1879 (1879 का सं. 18) के अधीन या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य हवहध के अधीन मध्यप्रदेश के न्यायालयों में ककसी भी न्यायालय में से हवहध-व्यवसाय करने का हकदार है; (ण) “आम्रकुंज” से अहभप्रेत है आम के वृि जो इतनी संखया में लगाये गये हैं कक उनसे उस भूहम का, हजस पर कक वे खड़े हैं, या उसके ककसी बड़े प्रभाग का, मुखयत: ककसी ऐसे प्रयोजन के हलये जो वृिारोपण से हभि हो उपयोग में लाया जाना रूक जाता है या उन 15 आम के वृिों के पूरी तरह बढ़ जाने पर यह संभाव्य है कक उनसे भूहम का या उसके ककसी बड़े प्रभाग का, मुखयत: उि प्रयोजन के हलये उपयोग में लाया जाना रूक जायेगा; (णक) ”बाजार मूल्य” से अहभप्रेत है भारतीय स्टाभप अहधहनयम, 1899 (1899 का 2) के अधीन बनाए गए मध्यप्रदेश बाजार मूल्य मागडदशडक हसद्धांतों का बनाया जाना तथा उनका पुनरीिण हनयम, 2000 के अधीन कलेक्टर द्वारा जारी ककए गए मागडदशडक हसद्धांतों के अनुसार हनधाडररत भूहम का मूल्य; (त) “फलोद्यान” से अहभप्रेत है फल के वृि जो इतनी संखया में लगाये गये हैं कक उनसे उस भूहम का, हजस पर कक वे खड़े हैं, या उसके ककसी बड़े प्रभाग का मुखयत: ककसी ऐसे प्रयोजन के हलये जो वृिारोपण से हभि हो, उपयोग में लाया जाना रूक जाता है या उन फलों के वृिों के पूरी तरह बढ़ जाने पर यह सभभाव्य है कक उससे भूहम का या उसके ककसी बड़े प्रभाग का, मुखयत: उि प्रयोजन के हलये उपयोग में लाया जाना रूक जायेगा; (थ) “भू-खंड संखयांक” से अहभप्रेत है नगरीय िेत्र में की भूहम का वह प्रभाग जो धारा 93 के अधीन भू-खण्ड संखयांक के रूप में हवरहचत ककया गया है या उस रूप में मान्य ककया गया है और हजसकी बाबत िेत्रफल तथा देय-भू-राजस्व की प्रहवहष्ट हवहहत अहभलेखों में सूचक संखयांक के अधीन पृथक-पृथक की गई है तथा उसके अन्तगडत भूहम का कोई ऐसा प्रभाग भी है हजसकी प्रहवहष्ट पूवड के अहभलेखों में खसरा या सवेिण नामक सूचक संखयांक के अधीन की गई है; (द) “मान्यता प्राप्त अहभकताड” से, इस संहहता के अधीन कायडवाही के पिकार के संदभड में अहभप्रेत है – (एक) वह व्यहि हजसे ऐसे पिकार ने, ऐसी कायडवाहहयों में उसकी ओर से उपसंजात होने तथा आवेदन करने एवं अन्य कायड करने के हलये, मुखतारनामे के अधीन प्राहधकृत ककया है; और (दो) वह व्यहि हजसे ऐसे पिकार ने, ऐसी कायडवाहहयों में उसकी ओर से उपसंजात (हाहजर) होने के हलये हलहखत में प्राहधकृत ककया है; (ध) “िेत्र” से अहभप्रेत है यथाहस्थहत महाकौशल िेत्र, मध्य भारत िेत्र, भोपाल िेत्र, हवन्ध्यप्रदेश िेत्र और हसरोंज िेत्र, या इनमें से कोई भी िेत्र; (न) “लगान” से अहभप्रेत है वह कुछ भी जो – (एक) धारा 188 के उपबंधों के अनुसार मौरूसी कृषक द्वारा अपने भूहमस्वामी को, या पट्टेदार द्वारा अपने भूहमस्वामी को, उसके द्वारा ऐसे भूहमस्वामी से धाररत भूहम के उपयोग या अहधभोग के मद्दे; या 16 (दो) सरकारी पट्टेदार द्वारा सरकार को, उस भूहम के, जो कक सरकार द्वारा उसे पट्टे पर दी गई है, उपयोग या अहधभोग के मद्दे, धन या वस्तु के रूप में संदत्त ककया जाता है या देय है; (प) “राजस्व अहधकारी” इस संहहता के ककसी उपबंध में “राजस्व अहधकारी” से अहभप्रेत है ऐसा राजस्व अहधकारी हजसे राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, राजस्व अहधकारी के उस उपबंध के अधीन के कृत्यों का हनवडहन करने के हलये हनदेश दे; (फ) “राजस्व वषड” से अहभप्रेत है वह वषड जो ऐसी तारीख से प्रारभभ होता है हजसे राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, ककसी हवशेष स्थानीय िेत्र के बारे में हनयत करें; (ब) “सवेिण संखयांक का उपखंड” से अहभप्रेत है सवेिण संखयांक का ऐसा प्रभाग हजसकी बाबत िेत्रफल तथा देय – भू-राजस्व की प्रहवहष्ट भू-अहभलेखों में उन सवेिण संखयांकों के, हजनका कक वह प्रभाग है, सूचक संखयांक के अधीनस्थ सूचक संखयांक के अधीन पृथक्-पृथक् की गई है; (भ) “सवेिण संखयांक” से अहभप्रेत है नगरेतर िेत्र में की भूहम का ऐसा प्रभाग जो ठीक पहले के राजस्व-सवेिण के समय सवेिण संखयांक के रूप में हवरहचत ककया गया है या उस रूप में मान्य ककया गया है अथवा कलेक्टर द्वारा उसके पिात् उस रूप में मान्य ककया गया है और हजसकी बाबत िेत्रफल तथा देय भू-राजस्व की प्रहवहष्ट भू-अहभलेखों में, सूचक संखयांक के अधीन पृथक्-पृथक् की गई है; और उसके अंतगडत भूहम का कोई भी ऐसा प्रभाग है हजसकी प्रहवहष्ट भू-अहभलेखों में, खसरा िमांक नामक सूचक संखयांक के अधीन की गई है; (म) “कृषक” से अहभप्रेत है वह व्यहि जो अध्याय 14 के अधीन भूहमस्वामी से मौरूसी कृषक के रूप में भूहम धारण करता है; (य) “भू-धारी” से अहभप्रेत है वह व्यहि जो राज्य सरकार से भूहम धारण करता है और जो इस संहहता के उपबन्धों के अधीन भूहमस्वामी है या भूहमस्वामी समझा जाता है ; (य-1) “इमारती लकड़ी के वृि” से अहभप्रेत है हनम्नहलहखत जाहत के वृि, अथाांत् – (एक) टेक्टोना ग्रेहन्डस (सागवान), (दो) टेकोकारपस मारसुहपयम (बीजा), (तीन) डलबेररया लेटीफोहलया (शीशम), (चार) शोररया रोबस्टा (साल), (पाँच) हतनसा, (छ:) टमोनेहलया टोमन्टोसा (एन या साज), 17 (सात) सन्टालम अलबम (चन्दन); [(आठ) एडाइना कॉर्तडफोहलया (हल्दू), (नौ) हमत्रागाइना पारहवफ्लोरा (मुण्डी), (दस) टर्तमनेहलया अजुडना (अजुडन), (ग्यारह) डायोस्पाइरस मेलनोक्जाइलान (तेन्दू), (बारह) मेलाइना आरबोररया (खभहार)] (य-2) “स्वयं खेती करना” से अहभप्रेत है – (एक) अपने स्वयं के श्रम द्वारा, या (दो) अपने कुटुभब के ककसी भी सदस्य के श्रम द्वारा, या (तीन) ऐसी मजदूरी पर, जो नगदी या वस्तु के रूप में देय है ककन्तु फसल के अंश के रूप में देय नहीं है, रखे गये सेवकों द्वारा, या (चार) अपने वैयहिक पयडवेिण के अधीन या अपने कुटुभब के ककसी सदस्य के वैयहिक पयडवेिण (Personal supervision) के अधीन – भाड़े के श्रहमकों द्वारा अपने स्वयं के हलये खेती करना; (य-3) “दखलरहहत भूहम” से अहभप्रेत है ककसी ग्राम में की ऐसी भूहम जो आबादी या सेवाभूहम से, या ककसी भूहमस्वामी, कृषक या सरकारी पट्टेदार द्वारा धाररत भूहम से हभि है; (य-4) “नगरीय िेत्र” से अहभप्रेत है वह िेत्र जो नगरपाहलकाओं से संबंहधत तत्समय प्रवृत्त ककसी हवहध के अधीन गरठत ककसी नगरपाहलक हनगम की या ककसी नगरपाहलका या अहधसूहचत िेत्र की या ककसी ऐसे ग्राम या ग्राम समूह की, जो कक राज्य सरकार द्वारा नगरीय िेत्र के रूप में हवहनर्ददष्ट ककया जाय, सीमाओं के भीतर तत्समय सहभमहलत है, और अहभव्यहि” नगरेतर िेत्र” का तद्नुसार अथड लगाया जायेगा । (य-5) “ग्राम” से अहभप्रेत है कोई भू-भाग हजसे इस संहहता के प्रवृत्त होने के पूवड, ककसी ऐसी हवहध के, जो तत्समय प्रवृत्त है, उपबन्धों के अधीन ग्राम के रूप में मान्य ककया गया था या उस रूप में घोहषत ककया गया था, तथा कोई ऐसा अन्य भू-भाग हजसे ककसी राजस्व सवेिण में एतद्पिात् ग्राम के रूप में मान्य ककया जाय या हजसे राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, ग्राम के रूप में घोहषत करें । (2) इस संहहता के प्रवृत्त होने की तारीख के प्रहत इस संहहता में ककये गये ककसी भी हनदेश का अथड इस प्रकार लगाया जाएगा मानो कक वह धारा 1 की उपधारा (3) के अधीन अहधसूचना द्वारा हनयत की गई तारीख के प्रहत हनदेश है। 18 अध्याय – 2 राजस्व मण्डल (बोडड)