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कृषकाहधकार की समाहप्त – (1) मौरूसी कृषक का उसके खाते में का कृषकाहधकार उपखंड अहधकारी के आदेश द्वारा जो हनम्नहलहखत ककन्हीं भी आधारों पर ककया गया हो, समाप्त ककया जा सकेगा, अथाडत्--- (क) उसने ककसी कृहष वषड में, उस वषड के हलये ऐसी भूहम के लगान का भुगतान हनयत तारीख को या उसके पूवड नहीं ककया हैं; या (ख) उसने कोई ऐसा कायड ककया है, जो उस भूहम के हलये हवनाशक या स्थाई रूप से हाहनकर है; या (ग) उसने ऐसी भूहम का उपयोग कृहष से हभि ककसी प्रयोजन के हलए ककया है; या (घ) उसने उस भूहम में के अपने हहत का अंतरण धारा 195 के उल्लंघन में कर कदया है । (2) उपधारा (1) के खंड (क) में हवहनकरष्ट ककये गये आधार पर कोई भी आदेश मौरूसी कृषक के भूहम में के उसके अहधकारों की समाहप्त के हलये तब तक पाररत नहीं ककया जायेगा जब तक उपखंड अहधकारी ने सूचना द्वारा, मौरूसी कृषक से शोध्य लगान, ऐसी कालावहध के भीतर, जो कक उपखंड अहधकारी द्वारा उस सूचना में हवहनर्ददष्ट की जाय, कायडवाहहयों के खचड सहहत हनहवदत्त करने की अपेिा न की हो और कृषक ने अपेहित रकम उि कालावहध के भीतर जमा न की हो । (3) उपधारा (1) के खंड (ख) में हवहनर्ददष्ट आधार पर कोई भी कायडवाही तब तक नहीं होगी जब तक कक ऐसी भूहम के भूहमस्वामी ने मौरूसी कृषक पर एक हलहखत सूचना, हजसमें हवनाश या हाहन का वह कायड हवहनर्ददष्ट ककया गया हो; हजसके कक सभबन्ध में पररवाद ककया गया है, तामील न कर दी हो, तथा कृषक ने सूचना की तामील की तारीख से छह मास की कालावहध के भीतर या ऐसी और कालावहध के भीतर जो कक उपखंड अहधकारी मंजूर करे उस भूहम को उसी अवस्था में प्रत्यावर्ततत न कर कदया हो हजसमें कक वह ऐसे हवनाश या हाहन के पूवड थी ।