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अहधकतम लगान.— ककसी भी करार या प्रथा या ककसी न्यायालय की ककसी भी हडिी या आदेश के होते हुये भी या ककसी भी हवहध के प्रहतकूल होते हुये भी, मौरूसी कृषक द्वारा उसके द्वारा धाररत भूहम के सभबंध में देय अहधकतम लगान – (क) ससहचत भूहम के ककसी भी वगड के मामले में ऐसी भूहम पर हनधाडररत ककये गये भू-राजस्व के चौगुने से; (ख) हवन्ध्य प्रदेश िेत्र में, बाँध भूहम के मामले में ऐसी भूहम पर हनधाडररत ककये गये भू-राजस्व के हतगुने से; और (ग) ककसी अन्य मामले में हनधाडररत ककये गये भू-राजस्व के दुगुने से अहधक नहीं होगा]: परंतु जहां ऐसी भूहम की धारा 58-क के अधीन भू-राजस्व की देनगी से छूट दी गई हो, वहां पूवोि अहधकतम में से भू-राजस्व की वह रकम कर दी जायगी हजसकी कक उि धारा के अधीन इस प्रकार छूट दी गई हो । स्पष्टीकरण – जहां ककसी भूहम पर भू-राजस्व का हनरीिण न ककया गया हो वह पूवोि गुहणतों की गणना ऐसी भूहम पर हनधाडरण योग्य भू-राजस्व के आधार पर की जायगी ।