Bare ActsThe MP Land Revenue Code 1959

Section 185

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मौरूसी कृषक – (1) प्रत्येक ऐसा व्यहि, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय – (एक) महाकौशल िेत्र में – (क) कोई ऐसी भूहम धारण करता है जो मध्यप्रदेश लैंड रेवेन्यू कोड, 1954 (िमांक 2 सन् 1955) के प्रवृत होने के पूवड माहलक मकबूजा थी और हजसके सभबंध में ऐसे व्यहि को पूणड मौरूसी कृषक के रूप में अहभहलहखत ककया गया था; या (ख) कोई भूहम, मध्यप्रदेश लैंड रेवेन्यू कोड, 1954 (िमांक 2 सन् 1955) में यथा पररभाहषत मौरूसी कृषक के रूप में धारण करता है, या (ग) कोई भूहम, मध्यप्रदेश लैंड रेवेन्यू कोड, 1954 (िमांक 2 सन् 1955) में यथा पररभाहषत मामूली कृषक के रूप में धारण करता है, या (दो) मध्य भारत िेत्र में ---- (क) कोई इनाम भूहम कृषक या उप-कृषक या साधारण कृषक के रूप में धारण करता है; या स्पष्टीकरण– अहभव्यहि “इनाम भूहम” का वही अथड होगा जो उसे मध्य भारत माफी तथा इनाम कृषक एवं उप-कृषक संरिण हवधान, 1954 (िमांक 32 सन् 1954) में ककया गया है । (ख) कोई भूहम, मध्य भारत रैयतवारी उप-पट्टेदार संरिण हवधान, 1955 (िमांक 29 सन् 1955) में यथा पररभाहषत रैयतवारी उप-पट्टेदार के रूप में धारण करता है; या (ग) मध्य भारत जागीर समाहप्त हवधान, 1951 (िमांक 28 सन् 1951) में यथा पररभाहषत कोई जागीर भूहम उप-कृषक के रूप में या उप-कृषक के कृषक के रूप में धारण करता है; या 95 (घ) मध्य भारत जमींदारी समाहप्त हवधान, 1951 (िमांक 13 सन् 1951) में यथा पररभाहषत स्वामी कोई भूहम उप-कृषक के रूप में या उप-कृषक के कृषक के रूप में धारण करता है; (तीन) हवन्ध्य प्रदेश िेत्र में कोई भूहम-हवन्ध्य प्रदेश लैंड रेवेन्यू एण्ड टेनेन्सी ऐक्ट, 1953 (िमांक 3 सन् 1955) में यथा पररभाहषत पचपन पैंताहलस कृषक पट्टेदार कृषक, हनकुंजधारी या ककसी तालाब धारक के उप-कृषक के रूप में धारण करता है; या (चार) भोपाल िेत्र में --- (क) कोई भूहम, भोपाल स्टेट सब-टेनेण््स प्रोटेक्शन ऐक्ट, 1952 (िमांक 7 सन् 1953) में यथा पररभाहषत उप-कृषक के रूप में धारण करता है; या (ख) कोई भूहम, भोपाल स्टेट लैंड रेवेन्यू ऐक्ट, 1932 (िमांक 4 सन् 1932) में यथा पररभाहषत दखलकार से हशकमी के रूप में धारण करता है; या (पाँच) हसरोंज िेत्र में – (क) कोई, भूहम, राजस्थान टेनेण्सी ऐक्ट, 1955 (िमांक 3 सन् 1955) में यथा पररभाहषत खातेदार कृषक या हनकुंजधारी के उप-कृषक के रूप में धारण करता है; या (ख) कोई भूहम, राजस्थान टेनेण्सी ऐक्ट, 1955 (िमांक 3 सन् 1955) में यथा पररभाहषत खुदकाश्त के उप-कृषक या कृषक के रूप में धारण करता है; मौरूसी कृषक कहलायेगा और उसे वे समस्त अहधकार होंगे जो इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन मौरूसी कृषक को प्रदत्त ककये गये हैं तथा वह उन समस्त दाहयत्वों के अध्यधीन होगा जो इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन मौरूसी कृषक पर अहधरोहपत ककये गये हैं । (2) जहां उपधारा (1) के खंड (दो) की मद (ग) या (घ) में हनर्ददष्ट कोई भूहम, इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय, ककसी उप-कृषक के वास्तहवक कब्जे में है, वहां ऐसे कृषक को ही ऐसी भूहम का मौरूसी कृषक समझा जायेगा न कक उस उपकृषक को । (3) जहां उपधारा (1) की कोई भी बात ककसी ऐसे व्यककत को लागू नहीं होगी जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय ऐसे भूहमस्वामी से, जो धारा 168 की उपधारा (2) में वर्तणत वगो में से ककसी एक या एक से अहधक वगो का है भूहम धारण करता है । (4) इस धारा की कोई भी बात उपधारा (1) के खंड (दो) की मद (ग) या (घ) में हवहनर्ददष्ट प्रवगों में से ककसी भी प्रवगड के उप-कृषक या उप-कृषक के कृषक ने उन अहधकारों पर प्रभाव नहीं डालेगी जो यथाहस्थहत मध्य भारत जागीर समाहप्त हवधान, 1951 (िमांक 28 सन् 1951) या मध्य भारत जमींदारी समाहप्त हवधान, 1951 (िमांक 13 सन् 1951) के उपबंधों के अनुसार पक्का कृषक के अहधकार अर्तजत करने के बारे में है । 96

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