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सीमांकन तथा सीमा पंहियों का अनुरिण. – (1) ग्राम की सड़क, ग्राम की बंजर भूहम या सामुदाहयक प्रयोजन के हलये आरहित की गई भूहम से लगी हुई भूहम का प्रत्येक धारक, अपने स्वयं के खचे से तथा हवहहत रीहत में – (क) अपनी भूहम तथा उससे लगी हुई ग्राम की सड़क, ग्राम की बंजर भूहम या सामुदाहयक प्रयोजनों के हलये आरहित की गई भूहम के बीच सीमांकन, सीमा-हचन्हों द्वार करेगा; और (ख) समय-समय पर ऐसी सीमा हचन्हों की मरभमत तथा उनका नवीकरण होगा। (2) यकद धारक उपधारा (1) द्वारा अपेहित ककये गये अनुसार सीमांकन नहीं करता है या सीमा हचन्हों की मरभमत या उनका नवीकरण नहीं करता है तो तहसीलदार, ऐसी सूचना के पिात् जैसी कक वह ठीक समझे, सीमांकन करवा सकेगा या सीमा हचन्हों की मरभमत या उनका नवीकरण करवा सकेगा तथा उपगत ककया गया खचड भू-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूल कर सकेगा। (3) सीमांकन के बारे में या सीमा-हचन्हों को मरभमत करके समुहचत अवस्था में बनाये रखने के बारे में कोई हववाद उठने की दशा में, वह मामला कलेक्टर द्वारा हवहनहित ककया जायेगा हजसका हवहनिय अंहतम होगा। स्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोजनों के हलये, ग्राम की सड़क से अहभप्रेत है कोई ऐसी सड़क हजस पर कोई उपदशडक सवेिण संखयांक या भू-खण्ड संखयांक अंककत हों।