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सदोष कब्जा रखने वाले व्यहियों को बेदखली. – (1) जब धारा 124 के उपबन्धों के अधीन कोई सीमा हनयत कर दी गई हो, तो तहसीलदार ककसी भी ऐसे व्यहि को संिेपत: बेदखल कर सकेगा जो ककसी ऐसी भूहम का, हजसके बारे में यह पाया गया हो कक वह उसके खाते से या ककसी ऐसे 58 व्यहि के, हजसकी कक माफडत या हजसके कक अधीन वह दावा करता है, खाते से अनुलग्न नहीं है, सदोष कब्जा रखता है। (2) जहां ककसी व्यहि को उपधारा (1) के उपबन्धों के अधीन ककसी भूहम से बेदखल कर कदया गया हो, वहां वह, उन भूहम पर अपना हक स्थाहपत करने के हलये ऐसी बेदखली की तारीख से एक वषड की कालावहध के भीतर हसहवल वाद संहस्थत कर सकेगा: परन्तु तहसीलदार या ककसी राजस्व अहधकारी को उस हैहसयत में ऐसा वाद का पिकार नहीं बनाया जायगा। (3) तहसीलदार, ककसी भी समय, भू-राजस्व के ऐसे पुनर्तवतरण के हलये आदेश कर सकेगा जैसा कक उसकी राय में, उपधारा (2) के अधीन संहस्थत ककये गये ऐसी बेदखली बाद में दी गई हडिी के पररणामस्वरूप ककया जाना चाहहए, और ऐसा पुनर्तवतरण उस आदेश की तारीख के आगामी राजस्व वषड के प्रारभभ से प्रभावी होगा।