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मध्य भारत पैथोलाजी एिां एनेटामी धनयम, 1956 और मध्य प्रदेश राज्य के ककसी िेत्र में इन धनयमों के प्रारभभ के तुरन्त पूिग प्रिृर्त् इन धनयमों के समकि अन्य कोई धनयम, एतद् द्वारा धनरधसत ककये जाते हैं: परन्तु प्रािधान यह है कक इस प्रकार धनरधसत धनयमों के अन्तगगत की गई कोई बात अथिा ककया गया कोई कायग, जब तक कक िह बात अथिा कायग इन धनयमों के ककसी प्रािधान के प्रधतकूल न हो, इन धनयमों के अन्तगगत की गई अथिा ककया गया माना जायेगा। 7 प्रारूप (धनयम 5 देधखये) ऐसे व्यधक्तयों का रधजस्टर जो अपने मृत शरीर को चीर–फाड़ परीिण और धिश्लेरषण के अधभप्रायों से अर्वपत करने की इच्छा रखते हैं धजला............................... क्रमाांक व्यधक्त का नाम और पता जो अपने मृत शरीर को चीर- फाड़ धिश्ले.षण और परीिण के अधभप्राय हेतु अपगण करने की इच्छा रखता है आिेदन की प्राधप्त का कदनाांक स्िीकृत सांस्था का नाम धजसे मृत शरीर भेजा जायेगा मृत शरीर सौंपने का कदनाांक रटप्पधणयाँ (1) (2) (3) (4) (5) (6)