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अपीलᱶ—(1) आयुक् त के िनम् निलिखत आदेशᲂ से अपील उच् च न्यायालय मᱶ होगी, अथार्त्:— (क) पर्ितकर के रूप मᱶ एकमुश्त रािश को चाहे अधर्मािसक संदाय से मोचन के तौर पर या अन्यथा, अिधिनणᱮत करने वाला या एकमुश्त रािश के दावे को पूणर्तः या भागतः अननुज्ञात करने वाला आदेश; 8[(कक) धारा 4क के अधीन ब्याज या शािस्त अिधिनणᱮत करने वाला आदेश;] (ख) अधर्मािसक संदाय से मोचन अनुज्ञात करने से इन्कार करने वाला आदेश; (ग) मृत 7[कमर्चारी] के आिशर्तᲂ के बीच पर्ितकर के िवतरण का उपबन्ध करने वाला आदेश या िकसी ऐसे ᳞िक् त के दावे को जो यह अिभकथन करता हो िक वह ऐसा आिशर्त है, अनुज्ञात करने वाला आदेश; (घ) धारा 12 की उपधारा (2) के उपबन्धᲂ के अधीन क्षितपूित की रकम के िकसी दावे को अनुज्ञात या अननुज्ञात करने वाला आदेश; अथवा 1 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 9 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 2 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 6 ᳇ारा कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 3 1924 के अिधिनयम सं० 7 की धारा 3 और अनुसूची 2 ᳇ारा “या आिशर्त को” शब्दᲂ का लोप िकया गया । 4 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 6 ᳇ारा खण्ड (ख) का लोप िकया गया । 5 1924 के अिधिनयम सं० 7 की धारा 3 और अनुसूची 2 ᳇ारा “या िकसी आिशर्त को” शब्दᲂ का लोप िकया गया । 6 1924 के अिधिनयम सं० 7 की धारा 2 और अनुसूची 1 ᳇ारा “या ऐसा आदेश कर सकेगा” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 7 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 8 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 15 ᳇ारा (1-6-1959 से) अन्तःस्थािपत । 20 (ङ) करार के ज्ञापन को रिजस्टर्ीकृत करने से इंकार करने वाला या उसे रिजस्टर्ीकृत करने वाला या यह उपबन्ध करने वाला िक उसका रिजस्टर्ीकरण शतᲄ के अधीन होगा, आदेशः परन्तु जब तक िक अपील मᱶ सारवान् िविध-पर्श् न अन्तवर्िलत न हो, और खण्ड (ख) मᱶ यथािनिदष् ट आदेश से िभन् न आदेश की दशा मᱶ जब तक िक अपील मᱶ िववादगर्स्त रकम 1[दस हजार रुपए या ऐसी उच् चतर रकम जो केन्दर्ीय सरकार राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा िविनिदष् ट करे] से अन्यून न हो, आदेश के िवरु कोई भी अपील नहᱭ होगीः परन्तु यह और िक िकसी ऐसे मामले मᱶ, िजसमᱶ पक्षकारᲂ ने आयुक् त के िविनश् चय का पालन करने के िलए कोई करार कर िलया है या िजसमᱶ आयुक् त का आदेश पक्षकारᲂ मᱶ हुए करार को पर्भावशाली करता है, कोई भी अपील नहᱭ होगीः 2[परन्तु यह और िक जब तक िक अपील के ज्ञापन के साथ आयुक् त ᳇ारा िदया गया इस भाव का पर्माणपतर् न हो िक अपीलाथᱮ ने उसके पास वह रकम िनिक्षप् त कर दी है जो उस आदेश के अधीन संदेय है िजसके िवरु अपील की गई है, िनयोजक ᳇ारा खण्ड (क) के अधीन कोई भी अपील नहᱭ होगी ।] (2) इस धारा के अधीन अपील के िलए पिरसीमाकाल साठ िदन का होगा । (3) 3[पिरसीमा अिधिनयम, 1963 (1963 का 36)] की धारा 5 के उपबन्ध इस धारा के अधीन की अपीलᲂ को लागू हᲂगे । 4* * * *