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करार को रिजस्टर्ीकृत कराने मᱶ असफल रहने का पर्भाव—जहां िक ऐसे िकसी करार का ज्ञापन, िजसका रिजस्टर्ीकरण धारा 28 ᳇ारा अपेिक्षत है, उस धारा की अपेक्षानुसार आयुक् त को नहᱭ भेजा गया है वहां, िनयोजक उस पर्ितकर की कुल रकम देने का दायी होगा िजसे वह इस अिधिनयम के उपबन्धᲂ के अधीन देने का दायी है और, जब तक िक आयुक् त अन्यथा, िनिदष् ट न करे, वह िकसी रकम की, जो पर्ितकर के तौर पर चाहे उसे करार के अधीन या अन् यथा, 7[कमर्चारी] को दी गई है, आधी से अिधक रकम काट लेने के िलए, धारा 4 की उपधारा (1) के परन्तुक मᱶ िकसी बात के होते हुए भी हकदार नहᱭ होगा ।