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करारᲂ का रिजस्टर्ीकरण—(1) जहां िक पर्ितकर के रूप मᱶ संदेय कोई एकमुश्त रािश की रकम, करार ᳇ारा, चाहे अधर्मािसक संदायᲂ से मोचन के तौर पर या अन्यथा, तय हो गई है या जहां िक कोई पर्ितकर इसी पर्कार तय हो गई है िक वह 2[िकसी स् तर्ी को या िविधक िनयᲃग्यता के अधीन िकसी ᳞िक् त को] 3*** संदेय है, वहां उसका एक ज्ञापन िनयोजक ᳇ारा आयुक् त को भेजा जाएगा, जो उसके असली होने के िवषय मᱶ अपना समाधान हो जाने पर ज्ञापन को रिजस्टर मᱶ िविहत रूप मᱶ अिभिलिखत करेगाः परन्तु— (क) ऐसा कोई ज्ञापन आयुक् त ᳇ारा संब पक्षकारᲂ को सूचना के संसूिचत िकए जाने के पश् चात् सात िदन से पहले अिभिलिखत नहᱭ िकया जाएगा; 4* * * * (ग) आयुक् त िकसी भी समय रिजस्टर को पिरशु कर सकेगाः (घ) जहां िक आयुक् त को पर्तीत हो िक िकसी एकमुश्त रािश के संदाय के बारे मᱶ कोई करार, वह चाहे अधर्मािसक संदाय से मोचन के तौर पर हो या अन्यथा हो, या 2[िकसी स् तर्ी को या िविधक िनयᲃग्यता के अधीन िकसी ᳞िक् त को] 5*** संदेय पर्ितकर की रकम के बारे मᱶ कोई करार, रािश या रकम की अपयार्प् तता के कारण या कपट या असम्यक् असर या अन्य अनुिचत साधनᲂ ᳇ारा उस करार के अिभपर्ाप् त िकए जाने के कारण रिजस्टर्ीकृत नहᱭ िकया जाना चािहए वहां वह करार के ज्ञापन को अिभिलिखत करने से इन्कार कर सकेगा 6[और ऐसा आदेश िजसके अन्तगर्त करार के अधीन पहले दी गई िकसी रािश के बारे मᱶ कोई आदेश आता है, कर सकेगा] जैसा वह पिरिस्थितयᲂ मᱶ न्यायसंगत समझे । (2) पर्ितकर के संदाय के िलए जो करार उपधारा (1) के अधीन रिजस्टर्ीकृत िकया जा चुका है, वह भारतीय संिवदा अिधिनयम, 1872 (1872 का 9) मᱶ या िकसी अन्य तत्समय पर्वृᱫ िविध मᱶ िकसी बात के होते हुए भी, इस अिधिनयम के अधीन पर्वतर्नीय होगा ।