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मास्टरᲂ और नािवकᲂ से सम्ब िवशेष उपबन्ध—यह अिधिनयम उन 2[कमर्चािरयᲂ] की दशा मᱶ, जो 3*** पोतᲂ के मास्टर या नािवक हᱹ, िनम् निलिखत उपान्तरᲂ के अध्यधीन रहते हुए, लागू होगा, अथार्त्— (1) दुघर्टना की और पर्ितकर के दावे की सूचना की तामील वहां के िसवाय जहां िक क्षत ᳞िक् त पोत का मास्टर है, पोत के मास्टर पर ऐसे की जाएगी, मानो वह िनयोजक हो, िकन्तु जहां िक पोत पर ही दुघर्टना हुई है और िनःशक् तता पर्ारम्भ हुई है वहां िकसी नािवक के िलए यह आवश्यक नहᱭ होगा िक वह दुघर्टना की कोई सूचना दे । (2) मास्टर या नािवक की मृत्यु हो जाने की दशा मᱶ पर्ितकर के िलए दावा दावेदार को मृत्यु का समाचार िमलने के पश् चात् 4[एक वषर्] के भीतर, या जहां िक पोत सब जनᲂ के साथ नष् ट हो गया है या नष् ट हो गया समझा जाता है वहां उस तारीख से, िजस तारीख को पोत ऐसे नष् ट हुआ या ऐसे नष् ट हुआ समझा जाता है, अᲶारह मास के भीतर िकया जाएगाः 5[परन्तु इस बात के होते हुए भी िक कोई दावा इस उपधारा मᱶ यथाउपबिन्धत सम्यक् समय के भीतर नहᱭ िकया गया है आयुक् त िकसी भी मामले मᱶ पर्ितकर के िकसी दावे को उस दशा मᱶ गर्हण कर सकेगा िजसमᱶ उसका समाधान हो जाए िक दावा वैसे करने मᱶ असफलता पयार्प् त हेतुक से हुई थी ।] (3) जहां िक क्षत मास्टर या नािवक 6[भारत के िकसी भाग मᱶ या] 7[िकसी िवदेश मᱶ] उन्मोिचत कर िदया जाता है या पीछे छोड़ िदया जाता है वहां, उस भाग मᱶ के िकसी न्यायाधीश या मिजस्टर्ेट ᳇ारा या उस िवदेश मᱶ के िकसी कौन्सलीय आिफ़सर ᳇ारा िलए गए और उस ᳞िक् त ᳇ारा, िजसके ᳇ारा वे िलए जाते हᱹ, केन्दर्ीय सरकार या िकसी राज्य सरकार को पारेिषत कोई भी अिभसा᭯य, दावा पर्वितत कराने की िकन्हᱭ भी कायर्वािहयᲂ मᱶ सा᭯य मᱶ गर्ा᳭ हᲂगे— (क) यिद अिभसा᭯य उस न्यायाधीश, मिजस्टर्ेट या कौन्सलीय आिफसर के हस्ताक्षर ᳇ारा अिधपर्माणीकृत हो िजसके सामने वह िदया गया है; (ख) यिद, यथािस्थित, पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को स्वयं या अपने अिभकतार् ᳇ारा साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमल गया था; तथा (ग) यिद अिभसा᭯य िकसी दांिडक कायर्वाही के दौरान िदया गया था तो यह सािबत होने पर िक अिभसा᭯य अिभयुक् त ᳞िक् त की उपिस्थित मᱶ िदया गया था, और िकसी भी मामले मᱶ उस ᳞िक् त के हस्ताक्षर या पदीय हैिसयत को सािबत करना आवश्यक नहᱭ होगा िजसके ᳇ारा ऐसा कोई अिभसा᭯य हस्ताक्षिरत िकया गया पर्तीत होता है और ऐसे ᳞िक् त ᳇ारा यह पर्माणपतर् िक पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमला था और यिद अिभसा᭯य िकसी दांिडक कायर्वाही मᱶ िदया गया था तो यह िक वह अिभयुक् त ᳞िक् त की उपिस्थित मᱶ िदया गया था, तब के िसवाय जब िक तत्पर्ितकूल सािबत कर िदया जाता है, इस बात का पयार्प् त सा᭯य होगा िक उसे वह अवसर िमला था और अिभसा᭯य इस पर्कार िदया गया था । 8* * * * 9[(4)] उस कालाविध के िलए कोई 10[अधर्मािसक संदाय] संदेय नहᱭ होगा िजसके दौरान पोत का स्वामी, क्षत मास्टर या नािवक के भरण-पोषण के ᳞यᲂ को वािणिज्यक पोत पिरवहन सम्बन्धी 11*** िकसी तत्समय पर्वृᱫ िविध के अधीन चुकाने का दायी है । 1 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 10 ᳇ारा (1-6-1959 से) अन्तःस्थािपत । 2 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 3 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 10 ᳇ारा “रिजस्टर्ीकृत” शब्द का लोप िकया गया । 4 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 11 ᳇ारा (1-6-1959 से) “छह मास” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 5 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 11 ᳇ारा (1-6-1959 से) जोड़ा गया । 6 िविध अनुकूलन आदेश, 1950 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 7 1984 के अिधिनयम सं० 22 की धारा 4 ᳇ारा (1-7-1984 से) कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 8 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 7 ᳇ारा खण्ड (4) का लोप िकया गया । 9 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 7 ᳇ारा खण्ड (5) को खण्ड (4) के रूप मᱶ पुनःसंख्यांिकत िकया गया । 10 1924 के अिधिनयम सं० 7 की धारा 2 और अनुसूची 1 ᳇ारा “मािसक संदाय” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 11 1951 के अिधिनयम सं० 3 की धारा 3 और अनुसूची ᳇ारा “भाग क राज्यᲂ और भाग ग राज्यᲂ मᱶ” शब्दᲂ का लोप िकया गया । 14 1[(5) कोई भी पर्ितकर िकसी ऐसी क्षित के िलए इस अिधिनयम के अधीन संदेय न होगा, िजसके िलए उपदान, भᱫे या पᱶशन के संदाय के िलए उपबन्ध पᱶशन्स (नेवी, आमᱮ, एयर फोसर् ऐण्ड मकᱷन्टाइल मैरीन), ऐक्ट, 1939 (2 और 3, जाजर् 6, अ० 83) के अधीन बनाई गई वार पᱶशन्स ऐण्ड िडटेन्शन अलाउन्सेज़ (मकᱷन्टाइल मैरीन, एट्सेटर्ा) स्कीम, 1939 या वार पेन्शन्स ऐण्ड िडटᱶशन अलाउन्सेज़ (इिण्डयन सीमेन, एट्सेटर्ा) स्कीम, 1941 के अधीन या केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा बनाई गई यु पᱶशन और िनरोध भᱫे (भारतीय नािवक) स्कीम, 1942 के अधीन िकया गया है । (6) इस अिधिनयम ᳇ारा अपेिक्षत समय के भीतर सूचना देने या दावा करने या कायर्वाही पर्ारम्भ करने मᱶ असफलता िकसी वैयिक् तक क्षित की बाबत इस अिधिनयम के अधीन कायर्वाही के चलने के िलए वजर्न न होगी, यिद— (क) उस क्षित की बाबत संदाय करने के िलए कोई आवेदन पूवर्वतᱮ खंड मᱶ िनिदष् ट स्कीमᲂ मᱶ से िकसी के अधीन कर िदया गया है, तथा (ख) राज्य सरकार पर्मािणत कर दे िक उक् त आवेदन इस युिक् तयुक् त िवश् वास मᱶ िकया गया था, िक क्षित ऐसी थी िजसके िलए वह स्कीम, िजसके अधीन आवेदन िकया गया था, संदायᲂ के िलए उपबन्ध करती है, और यह िक इस आधार पर िक वह क्षित ऐसी क्षित नहᱭ थी वह आवेदन नामंजूर कर िदया गया था या उस आवेदन के अनुसरण मᱶ िकए जाने वाले संदाय बन्द कर िदए गए थे, तथा (ग) उस तारीख से िजस तारीख को राज्य सरकार का उक् त पर्माणपतर् कायर्वाही पर्ारम्भ करने वाले ᳞िक् त को िदया गया था, एक मास के भीतर इस अिधिनयम के अधीन कायर्वाही पर्ारम्भ कर दी जाती ।] 2[15क. वायुयानᲂ के कैप्टनᲂ और कमᱮदल के अन्य सदस्यᲂ से संबंिधत िवशेष उपबंध—यह अिधिनयम उन 3[कमर्चािरयᲂ] की दशा मᱶ, जो वायुयानᲂ के कैप्टन या कमᱮदल के अन्य सदस्य हᱹ, िनम् निलिखत उपान्तरणᲂ के अधीन रहते हुए लागू होगा, अथार्त्:— (1) दुघर्टना की और पर्ितकर के दावे की सूचना की तामील, यहां के िसवाय जहां क्षत ᳞िक् त वायुयान का कैप्टन है, वायुयान के कैप्टन पर ऐसे की जाएगी, मानो वह िनयोजक हो, िकन्तु जहां वायुयान पर ही दुघर्टना हुई है और िनःशक् तता पर्ारम्भ हुई है वहां कमᱮदल के िकसी सदस्य के िलए यह आवश्यक नहᱭ होगा िक वह दुघर्टना की कोई सूचना दे । (2) कैप्टन या कमᱮदल के अन्य सदस्य की मृत्यु हो जाने की दशा मᱶ, पर्ितकर के िलए दावा, दावेदार को मृत्यु का समाचार िमलने के पश् चात् एक वषर् के भीतर, या जहां वायुयान समोजनᲂ के साथ नष् ट हो गया है या नष् ट हुआ समझा जाता है । वहां उस तारीख से, िजस तारीख को वायुयान ऐसे नष् ट हुआ था या ऐसे नष् ट हुआ समझा जाता है, अठारह मास के भीतर िकया जाएगाः परन्तु इस बात के होते हुए भी िक कोई दावा इस उपधारा मᱶ उपबंिधत सम्यक् समय के भीतर नहᱭ िकया गया है, आयुक् त िकसी भी मामले मᱶ पर्ितकर के िकसी दावे को उस दशा मᱶ गर्हण कर सकेगा िजसमᱶ उसका यह समाधान हो जाता है िक दावा इस पर्कार करने मᱶ असफलता पयार्प् त हेतुक से हुई थी । (3) जहां वायुयान का क्षत कैप्टन या कमᱮदल का अन्य सदस्य भारत के िकसी भाग मᱶ अथवा िकसी अन्य देश मᱶ िनमुर्क् त कर िदया जाता है या पीछे छोड़ िदया जाता है वहां उस भाग मᱶ के िकसी न्यायाधीश या मिजस्टर्ेट ᳇ारा अथवा उस िवदेश मᱶ के िकसी कौन्सलीय आिफसर ᳇ारा िलए गए और उस ᳞िक् त ᳇ारा, िजसके ᳇ारा वे िलए जाते हᱹ, केन्दर्ीय सरकार या िकसी राज्य सरकार को पारेिषत कोई भी अिभसा᭯य, दावा पर्वितत कराने की िकन्हᱭ भी कायर्वािहयᲂ मᱶ सा᭯य मᱶ उस दशा मᱶ गर्ा᳭ हᲂगे िजसमᱶ,— (क) अिभसा᭯य उस न्यायाधीश, मिजस्टर्ेट या कौन्सलीय आिफसर के हस्ताक्षर ᳇ारा अिधपर्माणीकृत िकया जाता है िजसके समक्ष वह िदया गया है; (ख) यथािस्थित, पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को स्वयं अथवा अपने अिभकतार् ᳇ारा साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमल गया था; (ग) यिद अिभसा᭯य िकसी दांिडक कायर्वाही के दौरान िदया गया था तो, यह सािबत हो जाने पर िक अिभसा᭯य अिभयुक् त ᳞िक् त की उपिस्थित मᱶ िदया गया था, और िकसी भी मामले मᱶ उस ᳞िक् त के हस्ताक्षर या पदीय हैिसयत को सािबत करना आवश्यक नहᱭ होगा िजसके ᳇ारा ऐसा कोई अिभसा᭯य हस्ताक्षिरत िकया गया पर्तीत होता है और ऐसे ᳞िक् त ᳇ारा यह पर्माणपतर् िक पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमला था, और यिद अिभसा᭯ य िकसी दांिडक कायर्वाही मᱶ िदया गया था तो यह िक वह अिभयुक् त व् यिक् त की उपिस् थित मᱶ िदया गया था, तब के िसवाय जब िक तत्पर्ितकूल सािबत कर िदया जाता है, इस बात का पयार्प् त सा᭯य होगा िक उसे वह अवसर िमला था और ऐसा अिभसा᭯य इस पर्कार िदया गया था । 1 1942 के अिधिनयम सं० 1 की धारा 2 ᳇ारा (3 िसतम्बर, 1939 से) पूवर्वतᱮ खण्ड के स्थान पर पर्ितस्थािपत । िजसे 1939 के अिधिनयम सं० 42 की धारा 2 ᳇ारा उसी तारीख से अन्तःस्थािपत िकया गया था । 2 1995 अिधिनयम सं० 30 की धारा 8 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत । 3 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 3 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 15 15ख. कंपिनयᲂ और मोटरयानᲂ के िवदेश मᱶ के 1[कमर्चािरयᲂ] से संबंिधत िवशेष उपबंध—यह अिधिनयम,— (i) उन 1[कमर्चािरयᲂ] की दशा मᱶ, जो ऐसे ᳞िक् त हᱹ िजन्हᱶ भारत मᱶ रिजस्टर्ीकृत कंपिनयᲂ ᳇ारा भतᱮ िकया गया है और उस रूप मᱶ, िवदेश मᱶ कायर् कर रहे हᱹ, और (ii) उन ᳞िक् तयᲂ की दशा मᱶ जो मोटरयान अिधिनयम, 1988 (1988 का 59) के अधीन रिजस्टर्ीकृत मोटरयानᲂ के साथ डर्ाइवर, हेल्पर, मैकेिनक, क्लीनर या अन्य 1[कमर्चािरयᲂ] के रूप मᱶ कायर् के िलए िवदेश भेजे गए हᱹ; िनम् निलिखत उपान् तरणᲂ के अधीन रहते हुए लागू होगा, अथार्त् :— (1) दुघर्टना की और पर्ितकर के दावे की सूचना की तामील, दुघर्टना के देश मᱶ, यथािस्थित, कम्पनी के स्थानीय अिभकतार् या मोटरयान के स्वामी के स्थानीय अिभकतार् पर की जा सकेगी । (2) उस 2[कमर्चारी] की मृत्यु हो जाने की दशा मᱶ, िजसकी बाबत इस धारा के उपबंध लागू हᲂगे, पर्ितकर के िलए दावा, दावेदार को मृत्यु का समाचार िमलने के पश् चात् एक वषर् के भीतर िकया जाएगाः परन्तु इस बात के होते हुए भी िक कोई दावा इस उपधारा मᱶ उपबंिधत सम्यक् समय के भीतर नहᱭ िकया गया है, आयुक् त िकसी भी मामले मᱶ पर्ितकर के िकसी दावे को उस दशा मᱶ गर्हण कर सकेगा िजसमᱶ उसका यह समाधान हो जाता है िक दावा इस पर्कार करने मᱶ असफलता पयार्प् त हेतुक से हुई थी । (3) जहां क्षत 2[कमर्चारी] भारत के िकसी भाग मᱶ अथवा िकसी अन्य देश मᱶ िनमुर्क् त कर िदया जाता है या पीछे छोड़ िदया जाता है वहां उस भाग मᱶ के िकसी न्यायाधीश या मिजस्टर्ेट ᳇ारा अथवा उस िवदेश मᱶ के िकसी कौन्सलीय आिफसर ᳇ारा िलए गए और उस ᳞िक् त ᳇ारा, िजसके ᳇ारा वे िलए जाते हᱹ केन्दर्ीय सरकार या िकसी राज्य सरकार को पारेिषत कोई भी अिभसा᭯य दावा पर्वितत कराने की िकन्हᱭ भी कायर्वािहयᲂ मᱶ सा᭯य मᱶ उस दशा मᱶ गर्ा᳭ हᲂगे िजसमᱶ— (क) अिभसा᭯य उस न्यायाधीश, मिजस्टर्ेट या कौन्सलीय आिफसर के हस्ताक्षर ᳇ारा अिधपर्माणीकृत िकया जाता है िजसके समक्ष वह िदया गया है; (ख) यिद, यथािस्थित, पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को स्वयं अथवा अपने अिभकतार् ᳇ारा साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमल गया था; (ग) यिद अिभसा᭯य िकसी दांिडक कायर्वाही के दौरान िदया गया था तो, यह सािबत हो जाने पर िक अिभसा᭯य अिभयुक् त ᳞िक् त की उपिस्थित मᱶ िदया गया था, और िकसी भी मामले मᱶ उस ᳞िक् त के हस्ताक्षर या पदीय हैिसयत को सािबत करना आवश्यक नहᱭ होगा िजसके ᳇ारा ऐसा कोई अिभसा᭯य हस्ताक्षिरत िकया गया पर्तीत होता है और ऐसे ᳞िक् त ᳇ारा यह पर्माणपतर् िक पर्ितवादी या अिभयुक् त ᳞िक् त को साक्षी की पर्ितपरीक्षा करने का अवसर िमला था और यिद अिभसा᭯य िकसी दांिडक कायर्वाही मᱶ िदया गया था तो यह िक वह अिभयुक् त ᳞िक् त की उपिस्थित मᱶ िदया गया था, तब के िसवाय जब िक तत्पर्ितकूल सािबत कर िदया जाता है, इस बात का पयार्प् त सा᭯य होगा िक उसे वह अवसर िमला था और ऐसा अिभसा᭯य इस पर्कार िदया गया था ।]