Bare ActsThe Workmen Compensation Act, 1923

Section 14

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िनयोजक का िदवाला—(1) जहां िक िनयोजक ने िकसी 2[कमर्चारी] के पर्ित इस अिधिनयम के अधीन अपने िकसी दाियत्व के बारे मᱶ िकन्हᱭ बीमाकतार्Ა से संिवदा की है, वहां िनयोजक के िदवािलया हो जाने की, या अपने लेनदारᲂ के साथ पर्शमन करने की, या ठहराव करने की कोई स्कीम बनाने की दशा मᱶ, या यिद िनयोजक कोई कम्पनी है तो कम्पनी का पिरसमापन पर्ारम्भ होने की दशा मᱶ, उस दाियत्व के बारे मᱶ बीमाकतार्Ა के िवरु᳍ िनयोजक के अिधकार 2[कमर्चारी] को, िदवाले या कम्पिनयᲂ के पिरसमापन से सम्ब᳍ िकसी तत्समय पर्वृᱫ िविध मᱶ िकसी बात के होते हुए भी, अंतिरत और उसमᱶ िनिहत हो जाएंगे, और ऐसे िकसी अंतरण पर बीमाकतार्Ა के वे ही अिधकार और उपचार हᲂगे, और वे उन् हᱭ दाियत् वᲂ के अध् यधीन ऐसे हᲂगे, मानो वे िनयोजक हᲂ, िकन्तु ऐसे िक बीमाकतार् 2[कमर्चारी] के पर्ित उस दाियत्व से अिधक दाियत्व के अधीन न हᲂगे िजसके अधीन वे िनयोजक के पर्ित होते । (2) यिद 2[कमर्चारी] के पर्ित बीमाकतार्Ა का दाियत्व 2[कमर्चारी] के पर्ित िनयोजक के दाियत्व से कम है तो 2[कमर्चारी] िदवाला सम्बन्धी कायर्वािहयᲂ मᱶ या समापन मᱶ अितशेष को सािबत कर सकेगा । (3) जहां िक ऐसे िकसी मामले मᱶ, जो उपधारा (1) मᱶ िनिदष् ट है, बीमाकतार्Ა के साथ िनयोजक की (पर्ीिमयमᲂ के संदाय के िलए अनुबंध से िभन् न) संिवदा, उसके िकन्हᱭ िनबन्धनᲂ या शतᲄ का अननुपालन िनयोजक ᳇ारा िकए जाने के कारण शून्य या शून्यकरणीय है वहां, उस उपधारा के उपबंध इस पर्कार लागू हᲂगे मानो वह संिवदा शून्य या शून्यकरणीय न हो, और 2[कमर्चारी] को दी गई रकम को बीमाकतार् िदवाले की कायर्वािहयᲂ मᱶ या समापन मᱶ सािबत करने के हकदार हᲂगेः परन्तु इस उपधारा के उपबन्ध िकसी ऐसी दशा मᱶ लागू नहᱭ हᲂगे िजसमᱶ 2[कमर्चारी] दुघर्टना होने और उसके पिरणामस्वरूप हुई िनःशक् ता की सूचना िदवाले या समापन की कायर्वािहयᲂ के संिस्थत िकए जाने की जानकारी पाने के पश् चात् यथासाध्य शीघर् बीमाकतार्Ა को देने मᱶ असफल रहता है । (4) यह समझा जाएगा िक उन ऋणᲂ के अन्तगर्त, जो िकसी िदवािलए की सम्पिᱫ के िवतरण मᱶ या पिरसमापनाधीन िकसी कम्पनी की आिस्तयᲂ के िवतरण मᱶ पर्िसडᱶसी नगर िदवाला अिधिनयम, 1909 (1909 से 3) की धारा 49 के अधीन या पर्ान्तीय िदवाला अिधिनयम, 1920 (1920 का 5) की धारा 61 के अधीन या 3[कंपनी अिधिनयम, 1956 की धारा 530] के अधीन अन्य सब ऋणᲂ पर पूिवकता देकर िदए जाने हᱹ, िकसी ऐसे पर्ितकर म᳍े शोध्य रकम आती है िजसके िलए दाियत्व, यथािस्थित, िदवािलए के न्यायिनणर्यन के आदेश की तारीख से पहले या पिरसमापन के पर्ारम्भ की तारीख से पहले पर्ोद्भूत हो गया था और वे अिधिनयम तदनुसार पर्भावी हᲂगे । (5) जहां िक पर्ितकर अधर्मािसक संदाय है वहां उस म᳍े शोध्य रकम इस धारा के पर्योजनᲂ के िलए उतनी एकमुश्त रािश की रकम मानी जाएगी िजतनी के िलए अधर्मािसक संदाय का, यिद यह मोचनीय होता, उस दशा मᱶ मोचन िकया जा सकता िजसमᱶ िक धारा 7 के अधीन उस पर्योजन के िलए कोई आवेदन िकया गया होता और ऐसी रकम के िवषय मᱶ आयुक् त का पर्माणपतर् उसका िनश् चायक सबूत होगा । 1 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 9 ᳇ारा अन्तःस्थािपत । 2 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 3 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 7 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 13 (6) उपधारा (4) के उपबन्ध ऐसी रकम की दशा मᱶ लागू हᲂगे िजसे बीमाकतार् उपधारा (3) के अधीन सािबत करने का हकदार है, िकन्तु अन्यथा वे उपबन्ध वहां लागू नहᱭ हᲂगे जहां िक िदवािलए ने या पिरसमापनाधीन कम्पनी ने बीमाकतार्Ა के साथ उपधारा (1) मᱶ यथािनिदष् ट संिवदा कर ली है । (7) यह धारा वहां लागू नहᱭ होगी जहां िक कम्पनी का पिरसमापन केवल पुनगर्ठन या िकसी दूसरी कम्पनी से समामेलन के पर्योजनᲂ के िलए स्वेच्छया िकया जाता है । 1[14क. पर्ितकर िनयोजक ᳇ारा अन्तिरत आिस्तयᲂ पर पर्थम भार होगा—जहां िक िनयोजक अपनी आिस्तयᲂ का अन्तरण िकसी ऐसे पर्ितकर म᳍े शोध्य िकसी रकम के संदाय से पूवर् कर देता है िजसके िलए दाियत्व अन्तरण की तारीख से पूवर् पर्ोद्भूत हो गया था वहां ऐसी रकम का इस पर्कार अन्तिरत आिस्तयᲂ के उस भाग पर, जो स्थावर सम्पिᱫ से िमलकर बना है, िकसी अन्य तत्समय पर्वृᱫ िविध मᱶ िकसी बात के होते हुए भी पर्थम भार होगी ।]

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