Bare ActsThe Press or Pustak Ragistrikaran Adhiniyam,1867

Section 7

1955 के अधि नि यम िं

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1955 के अधि नि यम िं. 56 की ि र 8 द्र् र (1-7-1956 िे) अंत:स् ा िप त । [िाराएं 8क-8ग] प्रेस और पुस् ाक रजि स् ी.करण अधि नि यम,1867 1 [ 8क. िह व् यजत ा , जि स का िाम गलाी से संपादक के रूप में प्रकाशि ा हुआ है मजि स् ीेट के समक्ष घोषणा कर सकाा है- यद्रद कोई व् यष्त त , ष्ज िक ि म कक िीे िम चन रप् की प्रनत पर िंप दक के रूप में छप गय है, यह द र् करत है कक र्ह उि अंक क ष्ज ि पर उिक ि म इि प्रक र छप गय है, िंप दक िहीं ा , तो र्ह, उिे यह ् त होिे के दो िप् त ह के भीेतर की उिक ि म इि प्रक र छप गय है कक िीे ष्ज ल , प्रेसि ेंिीे य उप-णं मष्ज स् ेे. के िमक्ष ह ष्ज र होकर यह घोषण कर िकत है कक उिक ि म उि अंक में उिके िंप दक के रूप में गलतीे िे छप गय ा , ओर यद्रद उि मष्ज स् ेे. क ऐिीे ज ंचन करिे य कर िे के पश चन तम जैिीे र्ह आर्श यक िमझें, यह िम ि ि हो ज त है कक र्ह घोषण िही है तो र्ह तदिुि र प्रम णण त करेग , और ऐि प्रम णप् द्रद ए ज िे पर ि र 7 के उपबन ि उि व् यष्त त को, उि िम चन रप् के उि अंक की ब बत ल ग. िहीं हों गे । कक िीे भीे दि में मष्ज स् ेे. इि ि र द्र् र अिु् त अर्धि को बढ़ िकत है यद्रद उिक यह िम ि ि हो ज त है कक ऐि व् यष्त त पय वप् त क रण िे उत त अर्धि के भीेतर ह ष्ज र होिे ता घोषण करिे िे नि र् रर त कक य गय ा । 2 [ 8ख. घोषणा का रद्द क या िािा - यद्रद प्रेि रष्ज स् े र य कक िीे अन य व् यष्त त द्र् र कक ए गए आर्ेदि पर अार् अन या इि अधि नि यम के अिीेि घोषण अनघ प्रम णण त करिे के सल ए िित त मष्ज स् ेे. की यह र य है कक कक िीे िम चन र प् के ब रे में की गई कोई घोषण रद्द की ज िीे चन द्रह ए तो र्ह िम् बद्ध व् यष्त त को, प्रस् त िर् त क यवर् ही के िर् रूद्ध क रण दसिवत करिे य अर्िर देिे के पश चन तम उि म मले की ज ंचन कर िकेग और यद्रद ऐिें व् यष्त त द्र् र द्रद ण ए गए क रण पर, यद्रद कोई हो, िर् चन र करिे के पश चन तम ता उिे िुिर् ई क अर्िर देिे के पश चन तम उिक र्ह िम ि ि हो ज त है कक - (i) र्ह िम चन रप् ष्ज िके ब रे में घोषण की गई है, इि अधि नि यम य उिके अिीेि बि ए गए नि यमों के उपबन िों के उल लंघि में प्रक सि त कक य ज रह है ; य (ii) घोषण में उष्ल ल णण त िम चन रप् क ि म र्ही है, य उि ि म िे सम लत जुलत है, जो य तो उिीे भ ष में य उिीे र ज्य में प्रक सि त कक िीे िम चन रप् क है: य (iii) मुिक य प्रक िक, उि घोषण में उष्ल ल णण त िम चन रप् क मुिक य प्रक िक िहीं रह गय है ; य (iV) घोषण , सम थ् य व् यपदेिि पर य कक िीे ि रर् िम तथ् य को नछ प कर की गई ाीे य ऐिीे क सल क कृनत के ब रे में की गई ाीे, जो िम चन रप् िहीं है , तो र्ह मष्ज स् ेे. आदेि द्र् र घोषण रद्द कर िकेग और आदेि की एक प्रनत घोषण करिे र् ले य उि पर हस् त क्षर करिे र् ले व् यष्त त को ता प्रेि रष्ज िम े र को भीे या ित य िीे् भेजेग । 8ग. अपील- (1) मष्ज स् ेे. के, ि र 6 के अिीेि कक िीे घोषण को अधि प्रम णण त करिे िे इंक र करिे र् ले य ि र 8 ण के अिीेि कक िीे घोषण को रद्द करिे र् ले आदेि िे व् यधा त कोई व् यष्त त , उि त रीण िे ि . द्रद ि के भीेतर, ष्ज िको ऐि आदेि उिे िंि.धचन त कक य गय ा , मुिण लय ता रष्ज स् ेीकरण अपीेल बो व ि मक अपीेल बो व को, जो 3 [ प्रेि परर षद अधि नि यम, 1978 (1978 क 37 ) की ि र 4 के अिीेि स् ा िप त भ रतीेय प्रेि परर षद द्र् र अपिे िदस् यों में िे ि मनि द्रदव ष् . कक ए ज िे र् ले अध यक्ष ता एक अन य िदस् य िे सम लकर बिेग ,] अपीेल कर िकेग : परन तु अपीेल बो व उत त अर्धि की िम ष्प् त के पश चन तम भीे अपीेल ग्रहण कर िकेग यद्रद उिक यह िम ि ि हो ज त है कक अपीेल ाी िमय पर अपीेल करिे िे पय वप् त क रण िे नि र् रर त कक य गय ा । (2) इि ि र के अिीेि अपीेल को प्र ष्प् त पर, अपीेल बो व, मष्ज स् ेे. िे असभ लेणों को मंगर् िे के पश चन तम और ऐिीे और ज ंचन करिे के पश चन तम, जैिीे र्ह . क िमझत है, उि आदेि को, ष्ज िके िर् रूद्ध अपीेल की गई है,पुष् .,उप ंतरर त य अप स् त कर िकेग । (3) उप ि र (2) के उपबंिों के अिीेि रहते हुए अपीेल बो व आदेि द्र् र अपिीे पद्धनत ता प्रकि य िर् नि यसम त कर िकेग । (4) अपीेल बो व क िर् नि श चनय अष्न त म होग । ] ________________________________________________________________________

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