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1922 के अधि नि यम िं. 14 की ि र 3 और अिुि.चनीे द्र् र अंत:स् ा िप त । [ िाराएं 11ख-15क ] प्रेस और पुस् ाक रजि स् ी.करण अधि नि यम, 1867 1[11ख. समाचारपत्रों की प्रना यों का प्रेस रजि स् ीार को दद या िािा- ऐिे कक न ही नि यमों के अिीेि रहते हुए, जो इि अधि नि यम के अन तगवत बि ए ज एं, भ रत में प्रत येक िम चन रप् क प्रक िक, प्रेि रष्ज स् े र को ऐिे िम चन रप् के प्रत येक अंक की एक प्रनत , उिके प्रक िि के पश चन तम या ित य िीे्, मुफ्त देग ।] भाग 4 िाजस् ा यां 12.िारा 3 में दद ए गए नि यम के वि रूद्ध मुद्रण के शल ए िाजस् ा - जो कोई इि अधि नि यम की ि र 3 में द्रद ए गए नि यम के अिुरूप कोई पुस् तक य प् मुद्रि त य प्रक सि त ि करके अन या प्रक सि त करेग , र्ह मष्ज स् ेे. के िमक्ष दोषसि िद्ध पर जुम विे िे, जो 2 [दो हज र] रूपए िे अधि क क िहीं होग य ि दे क र र् ि िे, ष्ज िकी अर्धि 3 [छह म ि] िे अधि क की िही होगीे, य दोिों िे, दंड त कक य ज एग । 13.िारा 4 में अपेक्षक्ष ा घोषणा क ए ब) िा मुद्रणालय रखिे के शल ए िाजस् ा -- जो कोई, प.र्ोकम त कोई मुिण लय 4 [इि अधि नि यम की ि र 4 में अन तिर्व ष् . उपबन िों में िे कक िीे के उल लंघि में,] अपिे कब् जे में रणेग , र्ह मष्ज स् ेे. के िमक्ष दोषसि िद्ध पर जुम विे िे, जो 2 [दो हज र] रूपए िे अधि क क िहीं होग य ि दे क र र् ि िे, ष्ज िकी अर्धि 3 [छह म ि] िे अधि क की िहीं होगीे, य दोिों िे, दंड त कक य ज एग ।