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निर्बन्िि आदेश का निलभर्ि - - (1) राज्य सरकार, क्रकसी ननर्बन्िन आदेश का प्रितबन क्रकसी शतब के या ऐसी शतों पर, जैसी क्रक िह उधचत समझे और जो उस व्यक्तत द्िारा विरुद्ि ननर्बन्िन आदेश क्रकया गया है, प्रनतग्रहीत की जायें, ननलक्म्र्त कर सकेगी और िह क्रकसी भी समय ननलम्र्न आदेश को रद्द कर सकेगी । (2) उपिारा (1) के अिीन विननददबष्ट की गई शतों में, उन शतों के, क्जन पर आदेश ननलंबर्त क्रकया गया है, सम्यक् अनुपालन के ललये प्रनतभूत सदहत या प्रनतभूत रदहत र्न्िपत्र ननष्पाददत क्रकया जाने की अपेिा की जा सकेगी । (3) कोई भी ऐसा व्यक्तत, क्जसके सम्र्न्ि में इस िारा के अिीन ननर्बन्िन आदेश ननलंबर्त कर ददया जाता है, ऐसे समय तथा स्थान पर और ऐसे प्राधिकारी के समि उपक्स्थत होगा जैसा क्रक यथाक्स्थनत ननलम्र्न आदेश में या ऐसे ननलम्र्न को रद्द करने िाले आदेश में विननददबष्ट क्रकया गया हो । 7 (4) यदद कोई व्यक्तत उपिारा (3) में विननददबष्ट की गई रीनत में उपक्स्थत होने में पयाबप्त कारण के बर्ना चूक करेगा, तो िह कारािास से, जो तीन िषब तक का हो सकेगा, या जुमाबने से या दोनों से दण्डनीय होगा । (5) यदद कोई ऐसा व्यक्तत, क्जसके सम्र्न्ि में ननर्बन्िन आदेश ननलक्म्र्त कर ददया जाता है, इस िारा के अिीन या उसके द्िारा ननष्पाददत क्रकये गये र्ंिपत्र में उस पर अधिरोवपत की गई शतों में से क्रकसी शतब की पूनतब करने में असफल रहेगा तो क्जला मक्जस्रेट र्ंिपत्र को राज्य सरकार के पि में समपहत घोवषत कर सकेगा और उसके द्िारा आर्द्ि कोई व्यक्तत उसकी शाक्स्त का संदाय करने का दायी होगा ।