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सवेिण संखयांकों तथा ग्रामों की हवरचना.- इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अध्यधीन रहते हुए, बन्दोबस्त अहधकारी – (क) उस भूहम का, हजस पर राजस्व सवेिण हवस्ताररत है, माप कर सकेगा और उस पर इतनी संखया में सवेिण हचन्ह सन्दर्तभत कर सकेगा और हजतने कक आवश्यक हों; (ख) ऐसी भूहमयों को सवेिण-संखयांकों में हवभाहजत कर सकेगा और ऐसे सवेिण संखयांकों के ग्रामों के रूप में समूह बना सकेगा, और (ग) हवद्यमान सवेिण- संखयांकों को मान्य कर सकेगा, सवेिण-संखयांकों को पुनगडरठत कर सकेगा या नवीन सवेिण-संखयांक हवरंहचत कर सकेगा परन्तु इसमें इसके पिात् तथा उपबहन्धत के हसवाय, कृहष प्रयोजनों के हलये उपयोग में लाई जाने वाली भूहम को समाहवष्ट करने वाले कोई भी सवेिण-संखयांक इसके पिात् उस न्यूनतम हवस्तार से कम हवस्तार के नहीं बनाये जायेंगे जो कक भूहम के हवहभि वगों के हलये हवहहत ककया जाये: परन्तु यह और पूवोि परन्तु के अधीन हवहहत की गई सीमा उन सवेिण-संखयांकों की दशा में लागू नहीं होगी जो धारा 67 की उपधारा (1) के अधीन अहधसूचना की तारीख के ठीक पूवड पहले से ही हवद्यमान हो ।