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हजस प्रयोजन के हलये भूहम उपयोग में लाई जावे उसी के अनुसार भू-राजस्व मे फेरफार- (1) ककसी भूहम पर राजस्व का हनधाडररत हनम्नहलहखत प्रयोजनों के हलये उस भूहम के उपयोग को दृहष्ट में रखते हुए ककया जायेगा। (क) कृहष या ऐसे प्रिेत्र गृह (फामड हाउस) के प्रयोजन के हलये उपयोग जो एक एकड या अहधक के खाते पर हस्थत है; (ख) हनवास–ग्रहों के हलये स्थानों के रूप में उपयोग; (ग) शैिहणक प्रयोजन के हलये उपयोग; (घ) औद्योहगक प्रयोजन के हलए उपयोग: (ड) वाहणहज्यक प्रयोजन के हलए उपयोग; (च) खान और खहनज (हवहनयमन और हवकाश) अहधहनयम, 1957 (1957 का 67) के अथड के अंतगडत खनन पट्टे के अधीन खनन के प्रयोजन के हलये; (छ) उपरोि पद (क) से (च) में हवहनर्ददष्ट ककए गए प्रयोजनों से हभि प्रयोजनों के हलये उपयोग: परन्तु ककसी ऐसी भूहम पर, जो उन िेत्रों में हस्थत है, हजन्हें भारतीय वन अहधहनयम, 1927 (1927 का सं. 16) के अधीन आरहित या संरहित वनों के रूप में गरठत ककया जाये पूवोि प्रयोजनों में से ककसी भी प्रयोजन के हलये भूहम के उपयोग के प्रहत हनदेश से भू-राजस्व के हनधाडरण की कायडवाही या संहहता के सुसंगत उपबन्धों के अधीन हनधाडरण के समबन्ध में अनुसररत की जाने वाली कोई भी प्रकिया, वन हवभाग के ऐसे ककसी अहधकारी द्वारा, हजसे राज्य सरकार द्वारा इस हनहमत्त, सभयक् रूप से प्राहधकृत ककया गया हो भूहम के उपयोग को अनुज्ञात करते हुए जारी ककये गये प्रमाण-पत्र पर ही की जायेगी या प्रारभभ की जायगी अन्यथा नहीं । स्पष्टीकरण - खण्ड (क) के प्रयोजन के हलए “प्रिेत्र गृह” (फामड हाउस) से अहभप्रेत है ऐसा भवन या सहिमाडण जो धारा 2 की उपधारा (1) के खण्ड (ज्ञ) में यथा पररभाहषत सुधार है और हजसका कुसी िेत्र (सप्लथ एररया) एक सौ वगड मीटर से अहधक नहीं होगा और हनर्तमत िेत्र एक सौ पचास वगड मीटर से अहधक नही होगा। (2) जहां कोई भूहम, हजस पर ककसी एक प्रयोजन के हलये उपयोग में लाये जाने के हेतु हनधाडरण ककय गया हो, ककसी अन्य प्रयोजन के हलये व्यपवर्ततत कर दी जाय, वहां ऐसी भूहम पर देय भू राजस्व इस बात के होते हुए भी कक उस अवहध का हजसके कक हलये हनधाडरण हनयत ककया गया हो, अवसान नहीं 40 हुआ है उस प्रयोजन के अनुसार पररवर्ततत तथा हनधाडररत ककये जाने के दाहयत्वाधीन होगा हजसके कक हलये वह व्यपवर्ततत कर दी गई है। (2-क) उपधारा (2) में हनर्ददष्ट ककया गया पररवतडन या हनधाडरण उपखंड अहधकारी द्वारा ककया जायेगा । (3) जहां वह भूहम जो इस शतड पर भू-राजस्व के भूगतान से मुि रूप धाररत है कक उसे ककसी प्रयोजन के हलये उपयोग में लाया जायगा ककसी अन्य प्रयोजन के हलये व्यपवर्ततत कर दी जाती है, वहाँ वह भूहम भू-राजस्व के भूगतान के दाहयत्वाधीन हो जायगी और उस पर उस प्रयोजन के अनुसार हनधाडरण ककया जायेगा हजसके कक हलये वह व्यपवर्ततत कर दी गई है। (4) उपधारा (2) तथा (3) के अधीन ककया गया हनधाडरण उन हनयमों के अनुसार होगा जो कक राज्य सरकार द्वारा इस संबंध में बनाये गये हो और ऐसे हनयम यथाहस्थहत अध्याय 7 या 8 में अन्तर्तवष्ट हसद्धांतों के अनुसार होगे। (5) जहाँ ककसी एक प्रयोजन के हलये उपयोग में लाई जाने वाली भूहम ककसी अन्य प्रयोजन के हलये व्यपवर्ततत कर दी जाती है और उस पर भू-राजस्व का हनधाडरण इस धारा के उपबंधों के अधीन ककया जाता है वहाँ उपखंड अहधकारी को यह शहि भी होगी कक वह उस व्यपवतडन पर प्रीहमयम इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार अहधरोहपत करें: परन्तु ककसी भूहम के ऐसे व्यपवतडन के हलये कोई प्रीहमयम अहधरोहपत नही ककया जायगा जो कक पूतड प्रयोजनो के हलये हो। (6) ककसी प्रथा या अनुदान के या ककसी हवहध में अंतर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, ककसी भूहम को जो मध्यप्रदेश लैंड रेवेन्यू कोड,1954 (ि. 2 सन् 1955) के प्रवृत्त होने के ठीक पूवड माहलक मकबूजा अहधकार में धाररत थी, धारण करने वाले समस्त व्यहियों का वह अहधकार जो कक उन्हे ऐसी भूहम के व्यपवतडन पर, प्रीहमयम का भुगतान करने से छूट के सभबन्ध में प्राप्त था, एतद्द्वारा समाप्त ककया जाता है, ककन्तु प्रत्येक ऐसा व्यहि, ऐसी भूहम के व्यपवतडन पर, ऐसे अहधकार के बदले, उपधारा (5) के अधीन अवधाररत की गई प्रीहमयम की रकम में से उतने ररबेट का हकदार होगा जो ऐसी भूहम के हलये देय एक वषड के भू-राजस्व के बराबर हों। 59-क. हनधाडरण कब प्रभावशील होगा- धारा 59 के उपबन्ध के अधीन ककया गया पररवतडन या हनधाडरण उस तारीख से प्रभावशील होगा हजसको कक व्यपवतडत ककया गया था। 59 ख. संहहता के प्रवृत्त होने के पूवड ककए गए भूहम के व्यपवतडन पर पुनर्तनधाडरण.- जहाँ इस कोड के प्रवृत्त होने के पूवड, ककसी िेत्र में की भूहम, हजस पर ककसी एक प्रयोजन के हलये हनधाडरण ककया गया हो, बाद में ककसी अन्य प्रायोजन के हलये उपयोग में लाये जाने के हेतु व्यपवर्ततत कर दी गई हो, वहाँ ऐसी भूहम पर पर भू-राजस्व, इस बात के होते हुए भी उस अवहध का, हजसके के हलये हनधाडरण हनयत ककया गया हो, अवसान नही हुआ है- (1) उस प्रयोजन के अनुसार, हजसके कक हलये वह व्यपवर्ततत की गई हो – 41 (क) उस तारीख से हजसको कक ऐसा व्यपवतडन ककया गया था, पररवर्ततत तथा हनधाडररत ककया जा सकेगा यकद सभबहन्धत िेत्र में धारा 261 के अधीन हनरहसत कोई ऐसी अहधहनयहमहत प्रवृत्त थी हजसमें ऐसे उपबन्ध अन्तर्तवष्ट थे कक ऐसा व्यपवतडन होने पर पररवतडन या पुनर्तनधाडरण ककया जायगा; (ख) ककसी अन्य मामले में, कोड के प्रवृत्त होने की तारीख से पररवर्ततत तथा हनधाडररत ककया जा सकेगा: और (2) उपयुि (क) के मामले में ऐसे हवरहसत अहधहनयम के उपबन्धों के अनुसार तथा उपयुि (ख) के मामले में इस कोड के उपबन्धों के अनुसार पररवर्ततत तथा हनधाडररत ककया जा सकेगा।