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कहतपय आदेशों के हवरूद्ध कोई अपील नहीं होगी – ककसी भी ऐसे आदेश की – (क) हजसके द्वारा कोई अपील या पुनर्तवलोकन के हलये कोई आवेदन पररसीमा अहधहनयम, 1963 (1963 का 36) की धारा 5 में हवहनर्ददष्ट ककये गये आधारों पर ग्रहण ककया गया है; या 32 (ख) हजसके द्वारा पुनर्तवलोकन के हलये ककये गये ककसी आवेदन को नामंजूर ककया गया है; या (ग) हजनके द्वारा ककसी ऐसे आवेदन को जो रोक (स्टे) के हलये हो, मन्जूर या नामंजूर ककया गया है; या (घ) जो अन्तररम स्वरूप का है; या (ड़) जो धारा 104 की उपधारा (2) या धारा 106 की उपधारा (1) के अधीन की हनयुहि से सभबहन्धत है, इस संहहता के अधीन कोई अपील नहीं होगी ।