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(1) जहां जंगम सभपहत्त लोक नीलाम द्वारा बेची जाती है, वहां प्रत्येक लाट का मूल्य हविय के समय पर संदत्त् ककया जायेगा या उसके पिात् शीघ्र ही ऐसे समय पर संदत्त् ककया जायेगा जो वह अहधकारी या अन्य व्यहिा हनर्ददष्ट करें जो कक हविय कर रहा है और संदाय में व्यहििम होने पर, सभपहत्त तत्िण् ही कफर से बेची जायेगी । (2) ियधन का संदाय कर कदये जाने पर उसके हलये रसीद वह अहधकारी या अन्य व्यहि देगा जो कक हविय कर रहा है और हविय आत्यहन्तक हो जायेगा । (3) जहां बेची जाने वाली जंगम सभपहत्त ऐसे माल में अंश है जो कक बकायादार और ककसी सहस्वामी का है और दो या अहधक व्यहि, हजनमें से एक ऐसा सहस्वामी है; ऐसी सभपहत्त या उसके ककसी लाट के हलये एक ही, राहश को बेाली लगाते हैं, वहां वह बोली उस सहस्वामी की बोली समझी जायेगी ।