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(1) जहां बेची जाने वाली सभपहत्त कृहष उपज है, वहां हविय – (क) यकद ऐसा उपज उगती फसल है, तो उस भूहम पर या उसके समीप ककया जायेगा हजसमें कक ऐसी फसल उगी है; या (ख) यकद ऐसी उपज काटी जा चुकी है या इक्ठी की जा चुकी है, तो खहलहान में या अनाज गहाने के स्थान में या तदरूप ककसी स्थान में या चारे के ढेर पर या उसके समीप ककया जायेगा: परन्तु यकद राजस्व अहधकारी की यह राय हो कक वैसा करने से उपज अहधक फायदे पर बेची जा सकती है तो वह यह हनदेश दे सकेगा कक हविय लोक समागम के हनकटतम ककसी स्थान पर ककया जाये । (2) जहां, उपज की हविय के हलये पुरोधृत ककये जाने पर – (क) हविय करने वाले व्यहि के अनुमान से उसके हलये ऋजु मूल्य की बोली नहीं लगाई है; और (ख) उस उपज का स्वामी या उसकी ओर से कायड करने के हलये प्राहधकृत व्यहि हविय को आगामी कदन तक या यकद हविय के स्थान पर कोई मण्डी लगती है, तो अगली मण्डी लगने के कदन के हलये मुल्तवी करने के हलये आवेदन करता है, वहां हविय तदनुसार मुल्तवी कर कदया जायेगा और तत्पिात् उपज के हलये चाहे कोई भी कीमत लगे वह पूरा कर कदया जायेगा । 33.(1) जहां बेची जाने वाली सभपहत्त उगती फसल और वह ऐसी प्रकृहत की है कक उसे भंडार में रखा जा सकता है ककन्तु उसे उस समय तक भण्डार में नहीं रखा गया है, वहां हविय का कदन इस प्रकार हनयत ककया जायेगा कक उस कदन के आने से पहले उसे भण्डार में रखे जाने के हलये तैयार कर हलया गया है और हविय तब तक नहीं ककया जायेगा जब तक फसल काट नहीं ली जाती है या इकठी नहीं कर ली जाती है और भण्डार में रखे जाने के हलये तैयार नहीं कर ली जाती है । (2) जहां फसल की प्रकृहत ऐसी है कक उसे भण्डार में नहीं रखा जा सकता है, या जहां राजस्व अहधकारी को यह प्रतीत हो कक उस फसल को अपररपक्व अवस्था में और अहधक फायदे के साथ बेचा जा सकता है, वहां यह काटी जाने तथा इक्ठी की जाने से पहले बेची जा सकेगी, और िेता भूहम पर प्रवेश 149 करने और उसकी देख्-भाल करने तथा उसे काटने या इक्ठी करने के प्रयोजन से समस्त आवश्यक बातें करने का हकदार होगा ।