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अप्राहधकृत रूप से भूहम पर कब्जा कर लेने के हलये शाहस्त – (1) कोई भी व्यहि, जो कक अप्राहधकृत रूप से दखल रहहत भूहम, आबादी, सेवा भूहम या ककसी ऐसी भूहम पर, जो धारा 237 के 123 अधीन ककसी हवशेष प्रयोजन के हलये पृथक् रखी गई हो, या ककसी ऐसी भूहम पर जो शासन की या राज्य की ककसी अहधहनयहमहत के अधीन गरठत या स्थाहपत संस्था या ककसी प्राहधकारी, हनगहमत हनकाय की सत्पहत्त हो, कब्जा कर लेते हैं या उस पर कब्जा बनाये रखता है, तहसीलदार के आदेश द्वारा संहिप्तत: बेदखल ककया जा सकेगा और कोई भी फसल जो कक भूहम पर खड़ी हो तथा कोई भी भवन या अन्य हनमाडण कायड, जो उसने उस पर हनर्तमत ककया हो, यकद ऐसे समय के भीतर, जैसा कक तहसीलदार हनयत करे, उसके द्वारा नहीं हटाया जाता है, तो अहधहररत ककया जा सकेगा। इस प्रकार अहधहररत की गई ककसी भी सभपहत्त का तहसीलदार के हनदेशानुसार हनपटारा ककया जायेगा और ककसी भी फसल, भवन या अन्य हनमाडण कायड को हटाने का तथा भूहम को उसकी मूल हस्थहत में लाने के हलये आवश्यक समस्त कायों का खचाड उनके भू-राजस्व की बकाया की भांहत वसूली योग्य होगा । ऐसा व्यहि, तहसीलदार के हववेकानुसार, अप्राहधकृत दखल की कालावहध के हलये भूहम का लगान उस स्थान में ऐसी भूहम के हलये स्वीकायड दर की दुगुनी दर से चुकाने के तथा ऐसे जुमाडने के, जो ऐसी अहधिहमत भूहम के बाजार मूल्य का बीस प्रहतशत रूपये तक हो सकता है, तथा ऐसे और जुमाडने के, जो ऐसे प्रत्येक कदन के हलये, हजसको ऐसा अप्राहधकृत दखल या कब्जा प्रथम बेदखली के कदनांक के पिात् चालू रहे, गैर नगरीय िेत्रों में पांच सौ रूपये और नगरीय िेत्रों में दो हजार रूपये तक हो सकता है, हलये भी दाहयत्वाधीन होगा । तहसीलदार सभपूणड जुमाडने या उसके ककसी भाग को ऐसे व्यहियों को प्रहतकर देने के हलये उपयोग में ला सकेगा हजन्हें उसकी राय में अहधिमण से हाहन या िहत हुई हो : परन्तु तहसीलदार – (एक) महाकौशल िेत्र में, -- (क) हवलीन राज्यों से हभि िेत्र में हसतभबर सन् 1917 के प्रथम कदन के पूवड; (ख) हवलीन राज्यों में अप्रैल सन् 1950 के तृतीय कदन के पूवड; (दो) मध्य भारत िेत्र से अगस्त सन् 1950 के पन्रहवें कदन के पूवड; (तीन) हवन्ध्य प्रदेश िेत्र में अप्रैल सन् 1955 के प्रथम कदन के पूवड; (चार) भोपाल िेत्र में नवभबर सन् 1933 के आठवें कदन के पूवड; और (पाँच) हसरोंज िेत्र में जुलाई सन् 1958 के प्रथम कदन के पूवड; हनर्तमत भवनों या हनमाडण कायों द्वारा ककये गये अहधिमण के सभबन्ध में इस उपधारा द्वारा प्रदत्त शहक्त्यों को प्रयोग में नहीं लायेगा । स्पष्टीकरण – इस उपधारा के प्रयोजनों के हलये शब्द “हवलीन राज्यों” का वही अथड होगा जो कक मध्यप्रदेश मजडड स्टे्स (स्टेट) लॉज ऐक्ट, 1950 (िमांक 12 सन् 1950) में उसके हलये कदया गया है । (1-क) ककसी अप्राहधकृत कब्जे के संबंध में ग्राम पंचायत द्वारा ककसी संकल्प के सभयक् रूप से पाररत ककए जाने पर तहसीलदार, ऐसे संकल्प की सूचना की प्राहप्त की तारीख से तीस कदन के भीतर इस 124 धारा की कायडवाहहयों को प्रारंभ करेगा तथा पूणड करेगा और उसके द्वारा की गई कायडवाही ग्राम पंचायत को संसूहचत करेगा । (2) हवलुप्त] (2-क) यकद कोई व्यहि उपधारा (1) के अधीन बेदखली के आदेश की तारीख के पिात् सात कदन से अहधक कदनों तक भूहम पर अप्राहधकृत दखल या कब्जा चालू रखे तो ऐसे जुमाडने पर प्रहतकूल प्रभाव डाले हबना जो उि उपधारा के अधीन अहधरोहपत ककया जा सकता हो, उपखंड अहधकारी उस व्यहि को पकड़वायेगा और उसे प्रथम बेदखली की दशा में पन्रह कदन की कालावहध के हलये तथा दूसरी या पिात्वती बेदखली की दशा में छह मास की कालावहध के हलये हसहवल कारागार में परररूद्ध ककये जाने के हलये वारंट के साथ भेजेगा : परन्तु इस उपधारा के अधीन कोई भी कायडवाही – (एक) तब तक नहीं की जायगी जब तक कक ऐसी सूचना जारी न की गई हो हजसमें कक ऐसे व्यहि से यह अपेिा की गई हो कक वह सूचना में हवहनर्ददष्ट ककये गये कदन उपखंड अहधकारी के समि उपसंजात हो तथा यह कारण दशाडये कक उसे हसहवल कारागार के सुपुदड क्यों न ककया जाय; (दो) ऐसी सरकारी तथा नजूल भूहमयों पर ककये गये अहतिंमणों के सभबन्ध में नहीं की जायेगी हजनके कक बन्दोबस्त के हलये सरकार ने समय-समय पर आदेश जारी ककये हों : परन्तु, यह और भी कक उपखंड अहधकारी ऐसे व्यहि को, वारंट में वर्तणत कालावहध का अवसान होने के पूवड भी हनरोध से हनमुडि ककये जाने का आदेश दे सकेगा यकद उसका यह समाधान हो जाय कक अप्राहधकृत कब्जा छोड़ा जा चुका है: परन्तु यह भी कक कोई स्त्री इस उपधारा के अधीन हगरफ्तार या हनरूद्ध नहीं की जायेगी । (2-ख) राज्य सरकार उपधारा (2-क) के उपबन्धों को कियाहन्वत करने के प्रयोजन के हलये हनयम बना सकेगी। (3) x x x (4) x x x