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अभ्यपडण- (1) कोई मौरूसी कृषक, कृहष वषड प्रारभभ होने के कम से कम तीस कदन पूवड भूहमस्वामी के पि में रहजस्रीकृत दस्तावेज हनष्पाकदत करके, अपने अहधकार अभ्यर्तपत कर सकेगा और तदुपरर वह ऐसी तारीख के ठीक आगामी कृहष वषड से मौरूसी कृषक नहीं रह जायेगा । कोई भी अभ्यपडण तब तक हवहधमान्य नहीं होगा जब तक कक वह रहजस्रीकृत हलखत द्वारा न ककया जाय । (2) भारतीय स्टाभप अहधहनयम, 1899 (1899 का संखयांक 2) या भारतीय रहजस्रीकरण अहधहनयम, 1908 (1908 का संखयांक 15) में तत्प्रहतकूल ककसी बात के होते हुए भी मौरूसी कृषको द्वारा इस धारा के उपबन्धो के अनुसरण में हनष्पाकदत अभ्यपडण की हलखतों को उन पर प्रभायड स्टाभप शुल्क तथा रहजस्रीकरण फीस के भुगतान से छूट होगी। (3) उपधारा (1) के अधीन कोई अभ्यपडण हनष्पाकदत ककया जाने पर भूहमस्वामी का कब्जा धारा 189 के अधीन अपने पुनग्रडहण के अहधकार की सीमा तक ही लेने का हकदार होगा और अहतररि भूहम, यकद कोई हो, राज्य सरकार में हनहहत हो जायेगी और भूहमस्वामी को ऐसी अहतररि भूहम के हलये प्रहतकर कदया जायेगा जो धारा 188 के अधीन उसके हलये देय लगान के दुगुने के बराबर होगा । (4) जहां कोई भूहम उपकार (3) के अधीन राज्य सरकार में हनहहत हो जाती है, वहां भूहमस्वामी हवहहत कालावहध के भीतर तथा हवहहत रीहत में ऐसी भूहम को हवहनर्ददष्ट करेगा और कालावहध के भीतर उसके ऐसा न करने पर ऐसी एपखंड अहधकारी द्वारा हवहनर्ददष्ट की जायेगी । (5) ऐसी भूहम के उपधारा (4) के उपबन्धों के अनुसार हवहनर्ददष्ट कर कदये जाने के पिात् उपखंड अहधकारी उसका सीमांकन ऐसे हनयमों के अनुसार करेगा जो कक उस सभबन्ध में बनाये जायें और भूहमस्वामी द्वारा पुनग्रडहण की गई भूहम के सभबन्ध में भू-राजस्व भी हनयत करेगा ।