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मौरूसी कृषक के अनतरण सभबन्धी अहधकार - (1) कोई भी मौरूसी कृषक भूहम में के या उसके ककसी भाग में के अपने अहधकार को हविय, दान, बन्धक, उपपट्टे के तौर पर या अन्यथा अन्तररत करने का हकदार नहीं होगा और प्रत्येक ऐसा हविय, दान, बन्धक, उपपट्टा या अन्य अन्तरण धारा 197 में उपबहन्धत ककये गये अनुसार पररवतडनीय होगा परन्तु मौरूसी कृषक द्वारा या उसकी ओर से उपपट्टा कदया जा सकेगा यकद ऐसा व्यहि धारा 168 की उपधारा (2) में वर्तणत प्रवगो में से ककसी प्रवगड का है । स्पष्टीकरण - इस धारा के प्रयोजनों के हलये अहभव्यहि उपपट्टा का वही अथड लगाया जायगा जो कक धारा 168 में पट्टा के हलये कदया गया है! (2) उपधारा (1) में की कोई भी बात मौरूसी कृषक को अपना खाता या उसका कोई भाग हविय या दान द्वारा ककसी सह कृषक को या ककसी ऐसे वयहि को, जो उस कृषक के हनकटतर वाररसों के न होने पर उस कृषक का उत्तरजीवी होने की दशा में उस खाते को हवरासत में प्राप्त करता, अन्तररत करने से हनवाडहसत नहीं करेगी । 102 (3) इस धारा में की कोई भी बात मौरूसी कृषक को भूहम हवकास उधार अहधहनयम, 1883 (1883 का संखयाक 19), या कृषक उधार अहधहनय, 1884 (1884 का संखयाक 12) के अधीन उसे कदये गये ककसी अहग्रम के संदाय को प्रहतभूत करने के हलये अपनी भूहम में के ककसी अहधकार को अन्तररत करने से हनवाररत नहीं करेगी या ऐसे अहग्रत की वसूली के हलये ऐसे अहधकार का हविय करने के राज्य सरकार के अहधकार पर प्रभाव नहीं डालेगी । (4) इस धारा में की कोई भी बात मौरूसी कृषक को ककसी सहकारी संस्था द्वारा उसे कदये गये अहग्रम के संदाय को हनधाडररत प्रहतभूत करने के हलये अपने खाते में के ककसी अहधकार को अन्तररत करने से नहीं करेगी; या ऐसे अहग्रम की वसूली के हलये ऐसे अहधकार का हविय करने के ऐसी संस्था के अहधकार पर प्रभाव नहीं डालेगी । (5) पूवडगामी ककन्हीं भी उपबन्धों के अधीन अनुज्ञात अन्तरण के अनुसरण में के हसवाय या प्रहतकर की ककसी वार्तषक ककश्त के बकाया की वसूली सभबन्धी कायडवाहहयों के मामले में के हसवाय मौरूसी कृषक के उसके खाते में के हहत के हविय के हलये न तो कोई हडिी या आदेश पाररत ककया जायगा, न ऐसा हहत ककसी हडिी या आदेश के हनष्पादन में कुकड ककया जायेगा या बेचा जायेगा; न ऐसे खाते का प्रबन्ध करने के हलये हसहवल प्रकिया संहहता, 1908 (1908 का संखयाक 5) की धारा 51 के अधीन ककसी ररसीवर की हनयुहि की जायगी और न ही ऐसा हहत प्रान्तीय कदवाला अहधहनयम, 1920 (1920 का संखयाक 5) के अधीन न्यायालय में या ककसी ररसीवर में हनहहत होगा।