Bare ActsThe MP Land Revenue Code 1959

Section 190

मौरूसी कृषकों को भूहमस्वामी अहधकार प्रदान ककया जाना

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मौरूसी कृषकों को भूहमस्वामी अहधकार प्रदान ककया जाना.— (1) जहां कोई भूहमस्वामी, हजसकी कक भूहम हसवाय उन प्रवगो के, जो कक धारा 185 की उपधारा (1) के खंड (एक) की मद (क) तथा (ख) में हवहनर्ददष्ट है, धारा 185 की उपधारा (1) में हवहनर्ददष्ट प्रवगो में से ककसी भी प्रवगड के मौरूसी कृषक द्वारा धाररत है, धारा 189 की उपधारा (1) के अधीन आवेदन उस कालावहध के भीतर नहीं करता है जो कक उसमें अहधकहथत है, वहां उस मौरूसी कृषक को, उसके द्वारा ऐसे भूहमस्वामी से धाररत भूहम के सभबन्ध में भूहमस्वामी के अहधकार पूवोि कालावहध का अवसान होने के ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारभभ से प्रोद्भूत हो जायेंगे । (2) जहां भूहमस्वामी द्वारा धारा 189 की उपधारा (1) के उपबन्धों के अनुसार आवेदन ककया जाता है, वहां मौरूसी कृषक को उस भूहम के संबंध में जो भूहमस्वामी को अनुज्ञात ककये गये पुनग्रडहण, यकद कोई हो, के पिात् उसके पास बच रहे, भूहमस्वामी के अहधकार उस तारीख के, हजसको कक आवेदन अंहतम रूप से हनपटाया जाता है, ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारभभ से प्रोद्भूत हो जायेंगे। (2-क) जहां भूहमस्वामी की भूहम उपधारा (1) में हवहनर्ददष्ट मौरूसी कृषक से हभि मौरूसी कृषक द्वारा धाररत है, वहां उस मौरूसी कृषक को ऐसी भूहम के सभबन्ध में भूहमस्वामी के अहधकार– (क) धारा 185 की उपधारा (1) के खंड (एक) मद (क) तथा (ख) में हवहनर्ददष्ट ककये गये प्रवगो के मौरूसी कृषकों के मामले में, मूल अहधहनयम के प्रारभभ होने के ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारंभभ से, (ख) ककसी अन्य मामले में, उस तारीख के, हजसको कक ऐसे कृषक को मौरूसी कृषक के अहधकार प्रोद्भूत होते हैं, ठीक आगामी कृहष वषड के प्रारभभ से, प्रोद्भूत हो जायेंगे । (3) जहां उपधारा (2) [उपधारा (2) या उपधारा (2-क)] के अधीन मौरूसी कृषक को भूहमस्वामी के अहधकार प्रोद्भूत हो जाते हैं, वहां ऐसा मौरूसी कृषक अपने भूहमस्वामी को ऐसे प्रहतकर का जो उस भूहम के सभबन्ध में देय भू-राजस्व के पन्रह गुने के बराबर हो, पाँच समान वार्तषक ककश्तों में भुगतान करने का दायी होगा, प्रत्येक ककश्य उस तारीख को देय होगी हजसको कक तत्सभबधी वषड के हलये धारा 188 के अधीन देय लगान शोध्य होता है, और यकद भुगतान करने में व्यहतिम ककया जाता है तो वह भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूल ककया जायेगा: परंतु यकद ककसी हेतुक से ककसी वषड ककसी िेत्र में भू-राजस्व पूणडत: या भागत: हनलहभबत कर कदया जाता है या उसमें माफी दे दी जाती है तो प्रहतकर की यह वार्तषक ककश्त, जो कक ऐसे िेत्र में भूहम 99 धारण करने वाले मौरूसी कृषक द्वारा उस वषड के सभबंध में देय हो, हनलहभबत कर दी जायेगी और वह शेष ककश्तों में से अंसतम ककश्त के एक वषड के पिात् देय होगी । (4) कोई भी मौरूसी कृषक, अपने हवकल्प पर, प्रहतकर, की सभपूणड रकम को एकमुश्त भुगतान कर सकेगा और जहां कोई मौरूसी कृषक इस हवकल्प का प्रयोग करता है, वहां दस प्रहतशत की दर से ररबेट पाने का हकदार होगा । (5) प्रहतकर की रकम, चाहे उसका भुगतान एक मुश्त ककया जाये या चाहे वार्तषक ककश्तों में ककया जाये; भूहम–स्वामी को चुकाई जाने के हलये ऐसी रीहत तथा ऐसे प्ररूप में, जैसा कक हवहहत ककया जाय तहसीलदार के पास मौरूसी कृषक द्वारा जमा की जायेगी । (6) जहां इस धारा के अधीन मौरूसी कृषक को ककसी भूहम से भूहमस्वामी के अहधकार प्रोद्भूत हो जायें वहां ऐसे अहधकार प्रोद्भूत होने की तारीख से ऐसा भू-राजस्व भुगतान करने का दायी होगा जो कक भूहमस्वामी द्वारा भूहम के सभबन्ध में देय हो ।

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