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सरकारी पट्टेदार के अहधकार तथा दाहयत्व. – (1) सरकारी पट्टेदार इस संहहता में के ककन्हीं अहभव्यहि उपबंधों के अध्यधीन रहते हुए अपनी भूहम उस अनुदान के, जो कक सरकारी अनुदान अहधहनयम, 1895 (1895 का संखयांक 15) के अथड के अंतगडत अनुदान समझा जायेगा, हनबंधों तथा शतो के अनुसार धारण करेगा । (2) सरकारी पट्टेदार को उसकी भूहम से राजस्व अहधकारी के आदेश द्वारा हनम्नहलहखत आधारों में से ककसी एक या अहधक आधारों पर बेदखल ककया जा सकेगा अथाडत्– (एक) यह कक उसने लगान का उस तारीख से, हजसकी वह शोध्य हो गया था, तीन मास की कालावहध तक भुगतान नहीं ककया है; या (दो) यह कक उसने ऐसी भूहम का उपयोग उन प्रयोजनों से, हजनके कक हलये वह प्रदान की गई थी, हभि प्रयोजनों के हलये ककया है; (तीन) यह कक उसके पट्टे की अवहध का अवसान हो चुका है; या (चार) यह कक उसने अनुदान के ककसी हनबंध तथा शतड का उल्लंघन ककया है: परंतु इस उपधारा के अधीन ककसी सरकारी पट्टेदार को बेदखल करने के हलए कोई आदेश उसे अपनी प्रतीिा में सुने जाने का अवसर कदये हबना पाररत नहीं ककया जायेगा ।