Bare ActsThe MP Land Revenue Code 1959

Section 168

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पट्टे – (1) उन मामलों में के हसवाय हजनके कक हलये उपधारा (2) में उपबंध ककया गया है, कोई भी भूहमस्वामी उसके खाते में समाहवष्ट ककसी भूहम को तीन वषड की ककसी िमवती कालावहध के दौरान एक वषड से अहधक समय के हलये पट्टे पर नहीं देगा: परंतु इस उपधारा में की कोई भी बात ककसी भूहम के ऐसे पट्टे को लागू नहीं होगी जो – (एक) भूहमस्वामी द्वारा ऐसी रहजस्रीकृत सहकारी कृहष सोसाइटी को कदया गया हो हजसका कक वह सदस्य है; (दो) भूहम-स्वामी द्वारा कृहष- हभि प्रयोजनों के हलये धाररत हो । स्पष्टीकरण– इस धारा के प्रयोजनों के हलये— (क) “पट्टा” से अहभप्रेत है ककसी भूहम का उपयोग करने के अहधकार का ऐसा अंतरण जो एक अहभव्यि या हववहित समय के हलये, ककसी कीमत के, जो दी हो, या हजसे देने का वचन कदया गया हो अथवा धन या ककसी अन्य मूल्यांकन वस्तु के, जो 81 कालावधीय रूप से अंतररती द्वारा, जो उस अंतरण को ऐसे हनबंधनो पर प्रहतगृहीत करता है, अन्तरक को दी जानी है, प्रहतफल के रूप में ककया गया हो; (ख) ककसी ऐसे ठहराव को, हजसके द्वारा कोई व्यहि (पट्टेदार) अपने बैलों से या अपने द्वारा उपाप्त बैलों से और उसके द्वारा भूहमस्वामी को भूहम की उपज का कोई हवहनर्ददष्ट अंश देने की शतड पर भूहमस्वामी की ककसी भूहम पर खेती करना है, पट्टा समझा जायेगा; (ग) केवल पास काटने या पशु चराने या ससघाड़ा उगाने या लाख का प्रजनन या संग्रहण करने, तेंदू पत्ते तोड़ने या उनका संग्रहण करने के अहधकार का कदया जाना भूहम या पट्टा नहीं समझा जायेगा । (2) भूहमस्वामी, जो— (एक) हवधवा है; या (दो) अहववाहहत स्त्री है, या (तीन) ऐसी हववाहहत स्त्री है हजसे पहत ने त्याग कदया हे, या (चार) अवयस्कता है; या (पांच) ऐसा व्यहि है जो वृद्धावस्था के कारण या अन्यथा शारीररक या मानहसक दृहष्ट से हन:शि हो गया है; या (छह) ऐसा व्यहि है जो ककसी हवहध- आदेहशका के अधीन हनरूद्व या कारावाहसत है; या (सात) ऐसा व्यहि है जो संघ के सशि बल की सेवा में है; या (आठ) सावडजहनक, पूवड या धार्तमक संस्था है; या (नौ) स्थानीय प्राहधकारी या सहकारी सोसाइटी है; अपना सभपूणड खाता या उसका कोई भाग पट्टे पर दे सकेगा: परंतु जहां कोई खाता एक से अहधक व्यहियों द्वारा संयुित: धाररत है, वहां इस उपधारा के उपबंध तब तक लागू नहीं होंगे जब तब कक ऐसे समस्त व्यहि पूवोि वनों में ककसी एक वगड या एक से अहधक वगो के न हों; परंतु यह और भी कक इस उपधारा के अनुसरण में कदया गया कोई भी पट्टा मृत्यु हो जाने या अन्य प्रकार से हन:शिता समाप्त हो जाने के एक वषड पिात् प्रवृत्त नहीं रहेगा । (3) X X X] 82 (4) जहां पट्टा उपधारा (2) के अनुसरण में कदया जाता है, वहां पट्टेदार उस भूहम को ऐसे हनबंधनों तथा शतों पर धारण करेगा जैसी कक उसके तथा भूहमस्वामी के बीच करार पाई जायँ और उसे उस दशा में उपखंड अहधकारी के आदेश से बेदखल ककया जा सकेगा जबकक भूहम स्वामी ने इस आधार पर आवेदन ककया हो कक उस पट्टे के ककसी ताहत्वक हनबन्धन या शतड का उल्लंघन हुआ है या इस आधार पर आवेदन ककया हो कक पट्टा प्रवृत्त नहीं रहा है। (5) जहां इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय कोई भूहम ककसी ऐसे भूहम स्वामी से; जो उपधारा (2) में वर्तणत वगो में से ककसी वगड का या एक से अहधक वगो का है, पट्टे पर धाररत है, है, वहां इस संहहता के प्रवृत्त होने पर पट्टे के सभबंध में यह समझा जावेगा कक वह उपधारा (2) के अनुसरण में कदया गया पट्टा हैं ।

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