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अन्तरण के अहधकार- (1) इस धारा के अन्य उपबन्धों के तथा धारा 168 के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए भूहमस्वामी अपनी भूहम का कोई भी हहत [………] अन्तररत कर सकेगा। (2) उपधारा (1) में ककसी बात के होते हुए भी— (क) भूहमस्वामी द्वारा ककसी भूहम का कोई भी बन्धक इसके पिात् तब तक हवहधमान्य नहीं होगा जब तक कक कम से कम पाँच एकड हससचत भूहम या दस एकड़ अससहचत भूहम ककसी भी हवल्लंगम या भार से मुि रूप में उसके पास न बच जाय; (ख) खंड (क) के उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, भूहमस्वामी द्वारा ककसी भी भूहम का कोई भाग बन्धक इसके पिात् हवहधमान्य नहीं होगा यकद वह छह वषड से अहधक की कालावहध के हलये हो, और जब तक कक उस बन्धक की एक शतड यह न हो कक बन्धक हवलेख में वर्तणत की गई कालावहध का अवसान हो जाने पर उस बन्धक के सभबन्ध में यह समझा 74 जायेगा कक भूहमस्वामी द्वारा ककसी भी प्रकार का कोई भुगतान ककये हबना ही उसका पूणडत: मोचन हो गया है, और बन्धकदार उस बन्धक भूहम का कब्जा भूहमस्वामी को तुरन्त वापस दे देगा ; (ग) यकद बन्धक की गई भूहम का कोई कब्जा बन्धकदार बन्धक की कालावहध का छह वषड का, इनमें से हजसका भी अवसान पहले होता हो, अवसान हो जाने के पिात् भूहम का कब्जा नहीं सौपता है, तो बन्धकदार तहसीलदार के आदेश द्वारा अहतचारी के तौर पर बेदखल ककये जाने का दायी होगा और तहसीलदार द्वारा बन्धककताड को उस भूहम का कब्जा कदया जायेगा : परन्तु इस उपधारा में की कोई भी बात ककसी ऐसी भूहम के बन्धक के मामले में लागू नहीं होगी जो भूहमस्वामी द्वारा कृहष -हभि प्रयोजनों के हलये धाररत हो (3) जहां भूहमस्वामी उपधारा (2) के उपबन्धों के अनुसरण में अपनी भूहम का कोई ऐसा बन्धक करता है जो भोग-बन्धक से हभि हो, वहां बन्धक हवलेख में अन्तर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, बन्धक के अधीन प्रोद्भूत होने वाले ब्याज की कुल रकम बन्धकदार द्वारा दी गई मूल रकम के आधे से अहधक नही होगी। (4) उपधारा (1) में अंतर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, ककसी भी भूहमस्वामी को यह अहधकार नहीं होगा कक वह कोई भी भूहम- (क) ककसी ऐसे व्यहि के पि में अंतररत करे जो ऐसे अंतरण के फलस्वरूप उतनी भूहम का हकदार हो जावेगा जो स्वयं उसके द्वारा या उसके कुटुभब द्वारा धाररत भूहम, यकद कोई हो; सहहत खेल हमलाकर ऐसी अहधकतम सीमाओं से, जो कक हवहहत की जाएं, अहधक हो जाये; (ख) x x x]; परन्तु- (एक) इस उपधारा में की कोई भी बात हनम्नहलहखत दशाओं में लागू नहीं होगी- (क) (एक) ककसी सावडजहनक, धार्तमक या पूतड प्रयोजनों के हलये स्थाहपत ककसी संस्था के पि में ककये गये अंतरण या औद्योहगक प्रयोजन के हलये ककये गये अंतरण या बन्धक के रूप में ककये गये अंतरण की दशा में; (दो) ककसी सहकारी सोसाइटी के पि में औधोहगक प्रयोजन के हलये ककये गये अंतरण या बन्धक रूप में ककये गये अंतरण की दशा में; तथाहप इस शतड के अध्यधीन रहते हुए कक कृहष प्रयोजनों के हलये कोई भी बन्धक, ककसी अहग्रम की वसूली के हलये हविय की धारा 147 के खंड (ख) के उल्लंघन में प्राहधकृत नहीं करेगा; (ख) कृहष हभि प्रयोजनों के हलये धाररत भूहम के अंतरण की दशा में : 75 परन्तु यह और भी कक पूवडवती परन्तुक के खंड (एक) के उपखंड (क) के अधीन औद्योहगक प्रयोजन के हलये भूहम का अन्तरण हनम्नहलहखत शतों के अध्यधीन होगा, अथाडत्- (एक) यकद ऐसे भूकक ककसी कृहष हभि प्रयोजन के हलये व्यपवर्ततत की जानी हो तो ऐसे व्यपवतडन के हलये धारा 172 के अधीन उपखंड अहधकारी की अनुज्ञा ऐसे अंतरण के पूवड प्राप्त कर ली गई है; और (दो) धारा 172 के उपबन्ध ऐसे अंतरण को इस उपांतरण के साथ लागू होंगे कक उसकी उपधारा (1) के परन्तुक में वर्तणत तीन मास तथा [एक मास] [छ: मास] की कालावहध, ऐसे व्यपवतडन हेतु आवेदन के प्रयोजनों के हलये िमाश: पैंतालीस कदन और [एक मास] [नब्बे कदवस] होगी । स्पष्टीकरण.- इस उपधारा के प्रयोजनों के हलये, ककसी व्यहि के कुटुभब में वह व्यहि स्वयं, उसकी अवयस्क संतान तथा ऐसे व्यहि की पत्नी या उसका पहत जो उनके साथ संयुि रूप से रहता हो, और यकद ऐसा व्यहि अवयस्क हो तो उसके साथ संयुि रूप से रहने वाले उनके माता हपता सहभमहलत होंगे। (5) तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य अहधहनयम में ककसी प्रहतकूल बात के होते हुए भी, भूहमस्वामी की कोई भी भूहम, ककसी न्यायालय की ककसी हडिी या आदेश के हनष्पादन से, ककसी ऐसे व्यहि को नहीं बेची जायेगी जो ऐसे हविय के फलस्वरूप उतनी भूहम का हकदार हो जायगा जो स्वयं उसके द्वारा या उसके कुटुभब द्वारा धाररत भूहम, यकद कोई हो, सहहत कुल हमलाकर ऐसी अहधकतम सीमाओं से, जो कक हवहहत की जाय, अहधक हो जाय: परन्तु इस धारा में की कोई भी बात ककसी ऐसी सहकारी सोसाइटी की दशा में लागू नहीं होगी जहां ऐसी सोसाइटी के पि में पाररत ककसी हडिी या आदेश के हनष्पादन में ककसी ऐसी भूहम का हविय धारा 154-एक में हवहहत प्रकिया हन:शेष करने के पिात् ककया जाना हो । स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजन के हलये, अहभव्यहि ‘ककसी व्यहि के कुटुभब’ का वही अथड होगा जो कक उसके हलये उपधारा (4) में कदया है। (6) उपधारा (1) में अंतर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, ककसी ऐसी जनजाहत के, हजसे कक राज्य सरकार ने, उस सभबन्ध में अहधसूचना द्वारा, उसे पूरे िेत्र के हलये, हजसको कक यह कोड लागू होता है, या उसके ककसी भाग के हलये आकदम जनजाहत (एबारीजनल राइब) होना घोहषत ककया हो, ककसी भूहमस्वामी का अहधकार- (एक) ऐसे िेत्रों में, हजसमें आकदम जनजाहतयाँ प्रमुख रूप से हनवास करती हों, तथा ऐसे तारीख से, हजसे/हजन्हें कक राज्य सरकार, अहधसूचना द्वारा, हवहनर्ददष्ट करे; ककसी ऐसे व्यहि को, जो कक उि अहधसूचना में हवहनर्ददष्ट ककये गये िेत्र में की ऐसी जनजाहत का न हो द्वारा हविय या अन्यथा या उधार सभबन्धी ककसी संव्यवहार के पररणामस्वरूप न तो अन्तररत ककया जायगा और न ही अंतरणीय होगा; 76 (दो) खंड (एक) के अधीन अहधसूचना में हवहनर्ददष्ट ककये गये िेत्रों से हभि िेत्रों में, ककसी ऐसे व्यहि को जो कक ऐसी जनजाहत का न हो, कलेक्टर की पद श्रेणी से अहभि पद श्रेणी के ककसी राजस्व अहधकारी की ऐसी अनुज्ञा के हबना, जो कक लेखबद्ध ककये जाने वाले कारणों से दी जायगी, हविय द्वारा या अन्यथा या उधार सभबन्धी ककसी संव्यवहार के पररणामस्वरूप न तो अन्तररत ककया जायगा और न ही अंतरणीय होगा । स्पष्टीकरण- इस उपधारा के प्रयोजनों के हलये, अहभव्यहि ‘अन्यथा’ के अंतगडत पट्टा नहीं आता है । (6-क) उपधारा में अन्तर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी ककसी ऐसी जनजाहत के हजसे उपधारा (6) के अधीन आकदम जनजाहत होना घोहषत ककया गया है भूहमस्वामी से हभि ककसी भूहमस्वामी का कृहष भूहम को छोड़कर अन्य भूहम में का अहधकार ककसी ऐसे व्यहि को जो आकदम जनजाहम का न हो कलेक्टर की अनुज्ञा, जो लेखबद्ध ककये जाने वाले कारणों से दी जायेगी, के हबना हविय द्वारा अन्यथा अथवा उधार सभबन्धी ककसी संव्यवहार के पररणामस्वरूप, न तो अन्तररत ककया जायेगा और न ही अंतरणीय होगा: परन्तु 9 जून, 1980 के पिात् तथा 20 अप्रैल 1981 के पूवड ककया गया ऐसा प्रत्येक अंतरण, जो इसमें अंतर्तवष्ट उपबन्धों के अनुसार न हो, जब तब कक ऐसे अंतरण का अनुसमथडन कलेक्टर द्वारा इसमें इसके पिात् अंतर्तवष्ट उपबन्धों के अनुसार नहीं कर कदया जाता, शून्य होगा और उसका कोई भी प्रभाव नहीं होगा, भले ही इस कोड या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य हवहध में कोई बात अन्तर्तवष्ट क्यों न हो । (6-ख) पररसीमा अहधहनयम, 1963 (1963 का स. 36) मे अन्तर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, कलेक्टर स्वप्रेरणा से ककसी भी समय, या ऐसे संव्यवहार से तीन वषड के भीतर, ऐसे प्ररूप में जैसा कक हवहहत ककया जाय, इस हनहमत्त आवेदन ककया जाने पर ऐसा जाँच, जैसी कक वह उहचत समझे, कर सकेगा, और ऐसे अन्तरण से प्रभाहवत व्यहियों को सुनवाई का युहियुि अवसर देने के पिात् अन्तरण का अनूसमथडन करने वाला या अन्तरण का अनुसमथडन करने से इंकार करने वाला आदेश पाररत कर सकेगा। (6-ग) कलेक्टर, उपधारा (6-क) के अधीन अनुज्ञा देने वाला या अनुज्ञा देने से इंकार करने वाला अथवा उपधारा (6-ख) के अधीन संव्यवहार का अनुसमथडन करने वाला या अनुसमथडन से इंकार करने वाला कोई आदेश पाररत करते समय हनम्नहलहखत बातों का सभयक् ध्यान रखेगा- (एक) क्या वह व्यहि, हजसे भूहम अंतररत की जा रही है, अनुसूहचत िेत्र का हनवासी है या नहीं; (दो) वह प्रयोजन हजसके हलये भूहम अंतरण के पिात् उपयोग में लाई जायेगी या हजसके हलये उपयोग में लाया जाना संभाव्य है; 77 (तीन) क्या अंतरण से अनुसूहचत िेत्र के हनवाहसयों के सामाहजक, सांस्कृहतक तथा आर्तथक हहतों की पूर्तत होती है या ऐसे हहतों की पूर्तत होना संभाव्य है अथवा क्या वह ऐसे हहतों पर प्रहतकूल प्रभाव डालता है; (चार) क्या कदया गया प्रहतकूल पयाडप्त है; (पांच) क्या ऐसा संव्यवहार हमथ्या, बनावटी या बेनामी है; और (छ:) ऐसी अन्य बातें जो हवहहत की जायें। कलेक्टर की उपधारा (6-क) के अधीन अनुज्ञा देने से इंकार करने वाला हवहनिय अथवा उपधारा (6-ख) के अधीन अंतरण के संव्यवहार का अनुसमथडन करने वाला या अनुसमथडन करने से इंकार करने वाला हवहनिय अंहतम होगा भले ही कोड में नई प्रहतकूल बात अंतर्तवष्ट क्यों न हो । स्पष्टीकरण.-- इस धारा के प्रयोजन के हलये – (क) ‘अनुसूहचत िेत्र’ से अहभप्रेत है कोई ऐसा िेत्र हजसे भारत के संहवधान की पंचम अनुसूची की कंहडका 6 के अधीन मध्यप्रदेश राज्य के भीतर अहधसूहचत िेत्र घोहषत ककया गया; (ख) अंतरण हमथ्या, बनावटी या बेनामी नहीं था यह साहबत करने का भार उस व्यहि पर होगा जों यह दावा करता है कक ऐसा अंतरण हवहधमान्य है । (6-घ) उपधारा (6-क) के अधीन अनुज्ञा देने से इंकार कर कदया जाने या उपधारा (6-ख) के अधीन अनुज्ञा देने से इंकार कर कदया जाने पर, असहमहत, यकद भूहम उसके कब्जे में है, कब्जा तुरंत छोड़ देगा और मूल भूहमस्वामी को उस भूहम का कब्जा प्रत्यावर्ततत कर देगा। (6-ड) यकद भूहमस्वामी ककसी भी कारण से उस भूहम का हजसके कब्जे का अहधकार उसे उपधारा (6-घ) के अधीन प्रत्यावर्ततत हो जाता है, कब्जा नहीं लेता है या कब्जा लेने में असमथड रहता है, तो कलेक्टर उस भूहम का कब्जा ग्रहण करवाएगा, और ऐसे हनबडन्धनों तथा शतों के अध्यधीन रहते हुए, जैसी कक हवहहत की जाय, उस भूहम का प्रबंध भूहम-स्वामी की ओर से उस समय तक करवायेगा जब तक कक मूल भूहम-स्वामी अपनी भूहम पर कब्जा नहीं कर लेता:- परंतु यकद कब्जा प्रत्यावर्ततत करने में कोई प्रहतरोध ककया जाता है तो कलेक्टर ऐसे बल का प्रयोग करेगा या करवायेगा जैसा कक आवश्यक हो । (6-ड.-ड.) उपधारा (6) के अधीन घोहषत ककसी आकदम जनजाहत के भूहमस्वामी से हभि ककसी भूहमस्वामी द्वारा ककसी ऐसे व्यहि को, जो आकदम जनजाहत का न हो, अन्तररत की गई कृहष भूहम ऐसे अंतरण की तारीख से दस वषड की कालावहध का अवसान होने के पूवड ककसी अन्य प्रयोजन के हलये व्यपवर्ततत नहीं की जायेगी । (6-च) इस कोड में तत्यमय प्रवृत्त ककसी अन्य हवहध में ककसी प्रहतकूल बात के अन्तर्तवष्ट होते हुए भी उपधारा (6-क) से [6-ड ड)] तक के उपबन्ध प्रभावशील होंगे। (7) उपधारा (1) में या तत्समय प्रवृत्त ककसी अन्य हवहध में अंतर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी– 78 (क) जहां ककसी भूहमस्वामी के खाते में समाहवष्ट भूहम का िेत्रफल या उस भूहमस्वामी के एक से अहधक खाते होने की दशा में उसके समस्त खातों का कुल िेत्रफल ससहचत भूहम के पांच एकड़ या अससहचत भूहम के दस एकड़ से अहधक हो, वहां उसके खाते या खातों में की भूहम का केवल उतना िेत्रफल, हजतना कक ससहचत भूहम के पांच एकड़ या अससहचत भूहम से दस एकड़ से अहधक हो, ककसी हडिी या आदेश के हनष्पादन में कुकड ककये जाने, बेचे जाने के दाहयत्वाधीन होगा । (ख) ककसी ऐसे जनजाहत के, हजसे उपधारा (6) के अधीन आकदम जनजाहत होना घोहषत ककया गया हो, भूहमस्वामी के खाते में समाहवष्ट कोई भूहम ककसी हडिी या आदेश के हनष्पादन में कुकड की जाने या बेची जाने के दाहयत्वाधीन नहीं होगी; (ग) खंड (क) या खंड (ख) के उपबन्धों के प्रहतकूल, हसहवल प्रकिया संहहता, 1908 (1908 का संखयांक 5) की धारा 51 के अधीन कोई ररसीवर ककसी भूहमस्वामी की भूहम का प्रबंध करने के हलये हनयुि नहीं ककया जायेगा और न कोई भी ऐसी भूहम प्रांतीय कदवाला अहधहनयम, 1920 (1920 का संखयांक 5) के अधीन ककसी न्यायालय अथवा ककसी ररसीवर में हनहहत होगी: परंतु इस उपधारा में की कोई भी बात उस दशा में लागू नहीं होगी जहां कक ककसी बंधक द्वारा उस भूहम पर कोई भार सृहजत ककया गया हो । (7-क) उपधारा (1) में अंनर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, मध्यप्रदेश भू-दान यज्ञ अहधहनयम, 1968 (िमांक 28 सन् 1968) की धारा 33 में हवहनर्ददष्ट ककये गये ककसी भी, भूस्वामी को यह अहधकार नहीं होगा कक वह उि धारा में हवहनर्ददष्ट की गई अपनी भूहम में के ककसी भी हहत का कलेक्टर की अनुज्ञा के हबना अन्तरण कर दें। (7-ख)उपधारा (1) में अंनर्तवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, कोई भी ऐसा व्यहि, जो कोई भूहम राज्य सरकार से धारण करता है या कोई ऐसा व्यहि जो धारा 158 की उपधारा (3) के अधीन भूहम स्वामी अहधकार में भूहम धारण करता है अथवा हजसे कोई भूहम सरकारी पट्टेदार के रूप में दखल में रखने का अहधकार राज्य सरकार या कलेक्टर द्वारा कदया जाता है और जो तत्पिात् ऐसी भूहम का भूहमस्वामी बन जाता है, ऐसी भूहम का अंतरण कलेक्टर की पद श्रेणी से अहनम्न पद श्रेणी के ककसी राजस्व अहधकारी की अनुज्ञा, जो लेखबद्ध ककये जाने वाले कारणों से दी जायेगी, के हबना नहीं करेगा । (8) इस धारा में की कोई बात ककसी भूहमस्वामी, को ककसी ऐसे अहग्रम के, जो कक उसे भूहम हवकास उधार अहधहनयम, 1883 (1883 का संखयांक 19) या कृषक उधार अहधहनयम, 1884 (1884 का संखयांक 12) के अधीन कदया गया हो, भुगतान को प्रहतभूहत करने हेतु अपनी भूहम में के ककसी अहधकार का अंतकरण करने से नहीं रोकेगी या राज्य सरकार के उस अहधकार पर प्रभाव नहीं डालेगी जो कक ऐसे अहग्रम की वसूली हेतु ऐसे अहधकार का हविय करने के हलये उसे प्राप्त है। (9) इस धारा में की कोई भी बात – 79 (एक) ककसी भूहमस्वामी की, ककसी ऐसी अहग्रम के जो उसे ककसी सहकारी सोसाइटी द्वारा कदया गया हो, संदाय को प्रहतभूहत करने हेतु अपनी भूहम में के ककसी अहधकार को बंधक के रूप में अंतररत करने से हनवाररत नहीं करेगी । ककतु इस शतड के अध्यधीन रहते हुए कक वसूली सुहनित करने के हलए भूहम का हविय धारा 154-क में हवहहत प्रकिया को हन:शेष ककये हबना नहीं ककया जायेगा; या (दो) ककसी भूहम-स्वामी को कदये गये अहग्रम की वसूली धारा 154-क के उपबंधों के अनुसार सुहनहित करने के ऐसी ककसी सोसाइटी के अहधकार को प्रभाहवत नहीं करेगी । (9-क) इस धारा में की कोई भी बात ककसी ऐसे भूहमस्वामी को, जो हवस्थाहपत व्यहि हो, ककसी ऐसे अहग्रम के, जो कक उसे दण्डकारण्य हवकास प्राहधकारी द्वारा कदया गया हो, भुगतान को प्रहतभूहत करने हेतु अपनी भूहम में के ककसी अहधकार का अंतरण करने से नहीं रोकेगी या उस प्राहधकारी के उस अहधकार पर प्रभाव नहीं डालेगी जो कक ऐसे अहग्रम की वसूली हेतु ऐसे अहधकार का हविय करने के हलये उसे प्राप्त है । स्पष्टीकरण – इस उपधारा में “हवस्थाहपत व्यहि” से अहभप्रेत है उन राज्य िेत्रों से, जो अब पूवी पाककस्तान में समाहवष्ट है, हवस्थाहपत हुआ कोई ऐसा व्यहि हजसे केंरीय सरकार द्वारा मंजूर की गई हवस्थाहपत व्यहियों के पुनवाडस सभबन्धी ककसी स्कीम के अधीन 1 अप्रैल सन् 1957 को या उसके पिात् मध्यप्रदेश में पुनवाडहसत ककया गया है । (9-ख) इस धारा की कोई भी बात भूहमस्वामी को ककसी ऐसे अहग्रम के, जो कक उसे कृहष के प्रयोजन के हलये या खाते के सुधार के प्रयोजन के हलये, ककसी वाहणहज्यक बैंक द्वारा कदया गया हो भुगतान को प्रहतभूहत करने के हेतु अपनी भूहम में के ककसी अहधकार का अंतरण करने से नहीं रोकेगी या ककसी ऐसे बैंक के उस अहधकार पर प्रभाव नहीं डालेगी जो कक ऐसे अहग्रम की वसूली के हेतु ऐसे अहधकार का हविय करने के हलये उसे प्राप्त है। (10) भारतीय रहजस्रीकरण अहधहनयम, 1908 (1908 का संखयांक 16) में अंतसवष्ट ककसी बात के होते हुए भी, ऐसा अहधकारी, जो उस अहधहनयम के अधीन दस्तावेजों की रहजस्री करने के हलए सशि हो, ककसी भी ऐसी दस्तावेज को, जो इस धारा के उपबंधों करने के हलये तात्पर्तयत है, रहजस्रीकरण के हलये ग्रहण नहीं करेगा । (11) इस धारा में की कोई भी बात – (क) ककसी ऐसे अन्तरण को, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के पूवड हवहधमान्यत: ककया गया था, अहवहधमान्य नहीं बनायेगी, या (ख) ककसी ऐसे अन्तरण को, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के पूवड हवहधमान्यत: ककया गया था, हवहधमान्य नहीं बनायेगी । 80 स्पष्टीकरण – इस धारा के प्रयोजनों के हलये, एक एकड़ ससहचत भूहम को दो एकड़ अससहचत भूहम के बराबर समझा जायगा और इसी प्रकार इसका हवपयडय ।