Bare ActsThe MP Land Revenue Code 1959

Section 157

भू–धारणाहधकारी (भू-धृहत) का वगड

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भू–धारणाहधकारी (भू-धृहत) का वगड.- राज्य के धाररत भूहमयों के भू-धारणाहधकाररयों का केवल एक ही वगड होगा जो भूहम स्वामी के नाम से ज्ञात होगा 158 भूहमस्वामी.- (1) प्रत्येक ऐसा व्यकक्त, जो इस संहहता के प्रवृत्त होने के समय, हनम्नहलहखत ककन्हीं भी वगों का हो, भूहमस्वामी कहलायेगा और उसे वे समस्त अहधकार होंगे जो इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन भूहमस्वामी को प्रदत्त ककये गये हैं तथा वह उन समस्त दाहयत्वों के अध्यधीन होगा जो इस संहहता द्वारा या इस संहहता के अधीन भूहमस्वामी पर अहधरोहपत ककये गये हैं, अथाडत्.- (क) प्रत्येक व्यककत उस भूहम के सभबन्ध में जो कक मध्यप्रदेश लैण्ड रेवेन्यू कोड, 1954 (ि. 2 सन् 1955) के उपबन्धों के अनुसार भूहमस्वामी या भूहमधारी अहधकारो में उसके द्वारा महाकौशल िेत्र मे धाररत हो; (ख) प्रत्येक व्यहि उस भूहम के सभबन्ध में जो कके मध्य भारत भू-आगम एवं कृहषकाहधकार हवधान, सभवत् 2007 (ि. 66 सन्1950) में यथा पररभाहषत पद का कृषक के रूप में या माफीदार, इनामदार या छूट खातेदार के रूप में उसके द्वारा मध्य भारत में धाररत हो; (ग) प्रत्येक व्यहि उस भूहम के सभबन्ध में जो कक भोपाल स्टेट लैण्ड रेवेन्यू ऐक्ट, 1932 (ि. 4 सन् 1932) में यथा-पररभाहषत दखलकार के रूप मे उसके द्वारा भोपाल िेत्र मे धाररत हो; (घ)(एक) प्रत्येक व्यहि उस भूहम के सभबन्ध जो कके हवन्ध्यप्रदेश लैण्ड रेवेन्यू एण्ड टेनेन्सी ऐक्ट, 1953 (ि. 3 सन् 1955) में यथा पररभाहषत पचपन-पैंतालीस; पट्टेदार कृषक, हनकुन्जधारी के रूप में या तालाब धारक के रूप में उसके द्वारा हवन्ध्यप्रदेश िेत्र में धाररत हो; (दो) प्रत्येक व्यहि उस भूहम के (जो उस भूहम से, जो हनकुंज या तालाब हो या जो सरकारी या लोक प्रयोजनो के हलये अर्तजत की गई हो या उन प्रयोजनो के हलये अपेहित हो, हभि हो) सभबन्ध में जो कक गैर हकदार कृषक के रूप में उसके द्वारा हवन्ध्यप्रदेश िेत्र में धारा 57 की धाररत हो और हजसके कक सभबन्ध में वह रीवा स्टेट लैंड रेवेन्यू एण्ड टेनेन्सी कोड, 1935 की उपधारा (4) के उपबन्धों के अनुसार पट्टा पाने का हकदार हो; (तीन) प्रत्येक व्यकक्त उस भूहम के सभबन्ध में जो कक कृषक के रूप में उसके द्वारा हवन्ध्यप्रदेश िेत्र में धाररत हो और हजसके सभबंध में वह हवन्ध्यप्रदेश लैडं रेवेन्यू एण्ड टेनेन्सी ऐक्ट, 1953 (ि. 3 सन् 1955) की धारा 151 की उपधारा 2 तथा 71 3 से उपबन्धो के अनुसार पट्टा पाने का हकदार हो ककतु हजसने ऐसा पट्टा इस सहहता के प्रवृत्ता होने के पूवड अहभप्रात्त न ककया हो (ड.) प्रत्येक व्यकक्त उस भूहम के सभबन्ध में जो कक राजस्थान टेनेन्सी ऐक्ट, 1955 (ि. 3 सन् 1955) में यथा पररभाहषत खातेदार कृषक के रूप में या हनकुंजधारी के रूप मे उसके द्वारा हसरोंज िेत्र में धाररत हो (2) ककसी ऐसे देशी राज्य का, जो कक मध्यप्रदेश राज्य का भाग है, शासक, जो संहवधान प्रारभभ होने के पूवड उसके द्वारा की गई प्रसंहवदा या करार के आधार पर ऐसे शासक के रूप में इस कोड के प्रवृत्त होने के समय भूहम धारण ककये हुए था या भूहम धारण के हकदार था, इस कोड के प्रवृत्त होने की तारीख से इस कोड के अधीन ऐसी भूहम का भूहमस्वामी होगा और उन समस्त अहधकारों तथा दाहयत्वों के अध्यधीन होगा जो कक इस कोड के द्वारा या अधीन ककसी भूहमस्वामी को प्रदत्त तथा उस पर अहधरोहपत ककये गये हों । स्पष्टीकरण.- धारा में अहभव्यहि ’’शासन” तथा “देशी राज्य” के वही अथड होंगे जो कक भारत के संहवधान के अनुच्छेद 366 के िमश: खंड (22) तथा (15) में इन अहभव्यहियों के हलये कदये गये है। (3) प्रत्येक व्यहि--- (एक) जो राज्य सरकार या कलेक्टर या आवंटन अहधकारी द्वारा उसे मध्यप्रदेश भू- राज्स्व संहहता (संशोधन) अहधहनयम, 1992 के प्रारंभ पर या उसके पूवड मंजूर ककये गये ककसी पट्टे के आधार पर भूहमस्वामी अहधकार में भूहम धारण ककये हुये है, ऐसे प्रारंभ की तारीख से, और (दो) हजसे राज्य सरकार या कलेक्टर या आवंटन अहधकारी द्वारा भूहम का आवंटन भूहमस्वामी अहधकार में, मध्यप्रदेश भू-राजस्व संहहता (संशोधन) अहधहनयम, 1992 के प्रारंभ के पिात् ककया गया है, ऐसे आवंटन की तारीख से, ऐसी भूहम के सभबन्ध में भूहम स्वामी समझा जायेगा और उन समस्त अहधकारों दाहयत्वों के अध्यधीन होगा जो इस संहहता द्वारा या उसके अधीन ककसी भूहम स्वामी को प्रदत्त और उस पर अहधरोहपत ककये गये हैं: परन्तु ऐसा कोई भी व्यहि पट्टे या आवंटन की तारीख से 10 वषड की कालावहध के भीतर ऐसी भूहम को अन्तररत नहीं करेगा ।

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