Bare ActsThe MP Land Revenue Code 1959

Section 156

प्रहतभू से धनों की वसूली

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प्रहतभू से धनों की वसूली. - प्रत्येक ऐसा व्यहि जो इस संहहता के ककसी भी उपबन्ध के अधीन या ककसी अन्य अहधहनयहमहत के या ककसी अनुदान, पट्टे या संहवदा के हजसके कक अधीन वह राहश, जो कक प्रहतभूहत की गई है, मूल ऋणी से भू-राजस्व के बकाया के तौर पर वसूली योग्य है, अधीन प्रहतभूत बन गया हो, उस रकम का या उसके ककसी भाग का हजसका कक भुगतान करने के हलये वह अपने प्रहतभूहत पत्र के हनबन्धनों के अधीन दायी हो गया हो, भुगतान न करने की दशा में इस बात के दाहयत्वाधीन होगा कक उसके हवरूद्ध इस संहहता के उपबन्धों के अधीन उस रीहत मे कायडवाही की जाय हजसमें कक भू–राजस्व के बकाया के हलये कायडवाही की जाती है । अध्याय-12 70 भू-धारणाहधकारी

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