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ग्रामों तथा सवेिण संखयांकों या भू-खंड संखयांकों के सीमा-हचन्हों का सहिमाडण – (1) समस्त ग्रामों की सीमाएं हनयत की जाएंगी तथा स्वामी सीमा-हचन्ह द्वारा उनका सीमांकन ककया जायगा। (2) राज्य सरकार, ककसी भी ग्राम के सभबन्ध में, अहधसूचना द्वारा यह आदेश दे सकेगी कक समस्त सवेिण-संखयांकों या भू-खंड संखयांकों की भी सीमाएँ हनयत की जायँ तथा सीमा-हचन्हों द्वारा उनका सीमांकन ककया जाय। (3) ऐसे सीमा हचन्ह, इसमें इसके पिात् अन्तर्तवष्ट उपबन्धों के अध्यधीन रहते हुए, ऐसे हवहनदेश के होंगे तथा ऐसी में सहिर्तमत तथा अनुरहित ककये जायेंगे जैसा कक हवहहत ककया जाये। (4) जहां हनयमों द्वारा ऐसे हवहनदेश के सीमा-हचन्ह हवहहत ककये जायँ जो ककसी ग्राम में प्रचहलत हवहनदेश से हभि हों, वहां ऐसे ग्राम में नवीन हवहनदेश उस ग्राम के भू-धारकों में से कम-से कम आधे भू- धारकों द्वारा तहसीलदार को आवेदन ककया जाने पर ही प्रवर्ततत ककया जायगा अन्यथा नहीं। जब ऐसा आवेदन कर कदया गया हो तो तहसीलदार सभपूणड ग्राम में नवीन सीमा-हचन्हों का सहिमाडण करायेगा और उस पर हुए खचड को इस संहहता के अधीन बनाये गये हनयमों के अनुसार ग्राम के भू-धारकों के बीच अनुपातता हवभाहजत करेगा। प्रत्येक धारक का अंश-राजस्व की बकाया के तौर पर वसूली योग्य होगा। (5) प्रत्येक भू-धारक, भूहम पर बनाये गये स्थायी सीमा हचन्हों तथा सवेिण-हचन्हों के अनुरिण तथा उनकी मरभमत के हलये हजभमेदार होगा।