Bare ActsThe MP Dakaiti &amp The Vyapharan Prbhavit Kshetra Act, 1981

Section 8

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विशेष न्यायाियों की प्रक्रक्रया और शम्ततयाां-- (1) बबशेष न्यायािय क्रकसी विनिर्दष्ट अपराि का सांज्ञाि,-- (क) क्रकसी ऐसे पररिाद के, म्जससे ऐसा अपराि बिता हो, प्राप्त होिे पर; या (ि) ऐसे तथ्यों की बाबत पुलिस ररपोटि पर; या (ग) पुलिस अधिकारी से लभन्ि क्रकसी व्यम्तत से प्राप्त ऐसे इवििा पर या अपिी स्ियां की ऐसी जािकारी पर की ऐसा अपराि क्रकया गया है; कर सकेगा । (2) विशेष न्यायािय, क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि का विचारण करिे में, उसी प्रक्रक्रया का अिुसरण करेगा जो सेशि मामिों के विचारण के लिये सांर्हता व्दारा उपबम्न्ित की गई है: परन्तु विशेष न्यायािय, जहााँ कहीां भी आिश्यक हो, सांर्हता की िारा 207 के अिीि मम्जस्रेट के कृत्यों का पािि करेगा, और मामिे का विचारण करिे के लिये इम प्रकार अग्रसर होगा मािो क्रक िह मामिा सांर्हता के उपबन्िों के अिीि सेशि न्यायािय को विचारण के लिये सुपुदि क्रकया गया हो । (3) इस अधिनियम में अलभव्यतत रूप से जैसा उपबम्न्ित है, उसके लसिाय, साक्ष्य अधिनियम 1872 (1872 का सां.1) और सांर्हता के उपबन्ि, जहााँ तक क्रक िे इस अधिनियम के उपबन्िों से असांगत ि हों, विशेष न्यायािय के समक्ष कई कायििार्हयों को िागू होंगे, और सांर्हता के उतत उपबन्िों के प्रयोजिों के लिये विशेष न्यायािय को सेशि न्यायािय समझा जायगा और विशेष न्यायिय के समक्ष अलभयोजि का सांचािि करेिे िािे व्यम्तत को िोक अलभयोजक समझा जायेगा । (4) विशेष न्यायािय, क्रकसी ऐसे व्यम्तत का, म्जसके सभबन्ि में यह सांदेह हो क्रक िह क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि से प्रत्यक्षत: या अप्रत्यक्षत: सभबम्न्ित रहा है या उसमें सांसधगित रहा है, साक्ष्य आलभप्राप्त करिे की दृम्ष्ट से, ऐसे व्यम्तत को इस शति पर क्षमा प्रदाि कर सकेगा क्रक िह उस अपराि के तथा प्रत्येक ऐसे अन्य व्यम्तत के, जो उस अपराि के क्रकये जािे में चाहे कताि के रूप में या दुष्प्रेरक के रूप मे सभपृतत हो, सभबन्ि में उि समस्त पररम्स्थनतयों का, जो उसकी जािकार में हों, पूणि और सत्य प्रकट ि कर दे, और इस. प्रकार प्रदाि की गई क्रकसी क्षमा के सभबन्ि में, सर्हता की िारा 308 के प्रयोजिों के लिये, यह समझा जायगा क्रक बह उसकी िारा 307 के अिीि प्रदाि की गई है । (5) विशेष न्यायािय, उसके व्दारा लसद्िदोष ठहराये गये क्रकसी अलभयुतत व्यम्तत पर कोई ऐसा दण्डादेश पाररत कर सकेगा जो उस अपराि के, म्जसके लिये ऐसे व्यम्तत को लसद्िदोष ठहराया गया है, दण्ड के लिये विधि व्दारा प्राधिकृत है । अध्याय 3 — अपराि और शाम्स्तयाां

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