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विशेष न्यायाियों की अधिकाररता - (1) सांर्हता या तत्समय प्रिृि अन्य विधि में अन्तवििष्ट क्रकसी बात के होते हुए भी कोई विनिर्दिष्ट अपराि का विचारण केिि विशेष न्याया- िय व्दारा विचारणीय होगा । (2) क्रकसी विनिर्दिष्ट अपराि का विचारण करिे में, कोई विशेष न्यायािय विनिर्दिष्ट अपराि से लभन्ि क्रकसी ऐसे अपराि का भी विचारण कर सकेगा म्जस अपराि से उस डाकू को उसी विचारण में, सर्हता के अिीि अरोवपत क्रकया जाये, बशते िह अपराि विनिर्दिष्ट अपराि से सभबम्न्ित हो ।