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(1) जहाँ कोई व्यधक्त ककसी धचककत्सालय में अथिा बांदीगृह में मृत हो जाता है तो ऐसे धचककत्सालय अथिा बांदीगृह का पदासीन अधधकारी परन्तु इस तथ्य की सूचना रोगी अथिा बन्दी के ररकाडग में उधललधखत उसके धनकटतम सांबांधी को देगा। यकद उक्त सांबांधी 72 घन्टे के अन्दर शरीर के धलए दािा नहीं करता तो मृत शरीर को धारा 5 में दी गई रीधत में धनपटा कदया जायेगा। (2) उपधनयम (1) के पालन में, ककसी दािे की प्राधप्त तक, यकद कोई हो, मृत शरीर को सड़ने से सुरधित करने हेतु धचककत्सालय में अथिा आयुर्विज्ञान में प्रधशिण सांस्था में जैसी भी धस्थधत हो, पह ुचा कदया जायेगा। (3) यकद उपधनयम (1) में धिधहत अिधध में ऐसे शरीर के धलए दािा नहीं ककया जाता तो प्राधधकारी अधधकारी अधधधनयम की धारा 5 में दी गई रीधत में शरीर का धनपटारा करने हेतु अग्रसर होगा। (4) यकद स्िीकृत सांस्थाओं में से ककसी को चीड़-फाड़ परीिण और धिश्लेनषण हेतु मृत शरीर की आिश्यकता न हो तो सभबधन्धत प्राधधकृत अधधकारी उसे िैधाधनक दािेदार को सौंप देगा अथिा यकद कोई ऐसा दािा प्रस्तुत नहीं ककया जाता तो िह मृत शरीर का अधि सांस्कार अथिा दफनाने द्वारा धनपटारा कर देगा, जैसी भी धस्थधत हो।