Amendment status not verified — confirm the current text below against the official source.
इस अिधिनयम के अधीन सभी अपराधɉ पर, मुÉय Ûयाियक दंडािधकारȣ या उÍच Ûयायालय Ʈारा ǒवशेषतया Ĥािधकृत Ĥथम Įेणी के Ǒकसी अÛय दंडािधकारȣ Ʈारा सं¢ेपतः ǒवचारण Ǒकया जाएगा और ऐसे ǒवचारण पर जहाँ तक हो सके, दÖड ĤǑĐया संǑहता, 1973 कȧ धारा 262 से 265 (दोनɉ को सǔàमिलत करके) के उपबÛध लागू हɉगे। परÛतु इस धारा के अधीन, ǒवचारण Ĥारàभ होने पर या उसके सं¢ेपतः ǒवचारण के दौरान, जब दंडािधकारȣ को यह Ĥतीत होता है Ǒक मामले कȧ Ĥकृित ऐसी है Ǒक Ǒकसी कारण से उसका सं¢ेपतः ǒवचारण अवांछनीय है, तो दंडािधकारȣ, प¢कारɉ कȧ सुनवाई के पƱात् उस आशय का आदेश अिभिलǔखत करेगा और त×पƱात Ǒकसी सा¢ी को, ǔजसका परȣ¢ा Ǒकया गया है, पुनः बुलाएगा और उपयु[Ơ संǑहता मɅ उपबǔÛधत रȣित से मामले कȧ सुनवाई या पुनः सुनवाई करने के िलए अĒसर होगा। 1974 का 2 मामलɉ का सं¢ेपतः ǒवचारण करने कȧ Ûयायालयɉ कȧ शǒƠ।