Bare ActsThe Workmen Compensation Act, 1923

Section 8

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पर्ितकर का िवतरण—4[(1) िकसी ऐसे 4[कमर्चारी] के बारे मᱶ, िजसकी मृत्यु क्षित के पिरणामस्वरूप हो गई है, पर्ितकर का कोई भी संदाय और िकसी स् तर्ी को या िविधक िनयᲃग्य े पास िनक्षेप करने से अन्यथा नहᱭ िकया जाएगा, और सीधे िनयोजक ᳇ारा कर िदए गए िकसी ऐसे संदाय के बारे मᱶ यह न समझा जाएगा िक वह पर्ितकर का संदाय हैः 5[परन्तु मृत 4[कमर्चारी] की दशा मᱶ िनयोजक िकसी भी आिशर्त को 6[ऐसे 4[कमर्चारी] की तीन मास की मजदूरी के बराबर रकम का अिभदाय पर्ितकर म᳍े कर सकेगा औ ारा काट ली जाएगी और िनयोजक को पर्ितसंदᱫ कर दी जाएगी ।] (2) दस रुपए से अन्यून कोई अन्य ऐसी रािश, जो पर्ितकर के रूप मᱶ संदेय है, उस ᳞िक् त के िनिमᱫ, जो उसका हकदार है, आयुक् त के पास िनिक्षप् त की जा सकेगी । (3) आयुक् त के पास िनिक्षप् त िकसी पर्ितकर के सम्बन्ध मᱶ आयुक् त की रसीद पयार्प् त उन्मोचन होगी । (4) आयुक् त 7[िकसी मृत 4[कमर्चा यक समझे तो आिशर्तᲂ को ऐसी तारीख को, िजसे वह पर्ितकर का िवतरण अवधािरत करने के िलए ि होने के िलए अपेिक्षत करने वाली सूचना का पर्काशन या हर एक आिशर्त पर उसकी तामील ऐसी रीित से कराएगा जैसी वह उिचत समझे । यिद आयुक् त का समाधान िकसी ऐसी जांच के पश् चात्, िजसे वह आवश्यक समझे हो जाता है िक कोई भी आिशर्त िव᳒मान नहᱭ है तो वह उस धन का अितशेष उस िनयोजक को, िजसके ᳇ारा वह संदᱫ िकया गया था, पर्ितसंदᱫ कर देगा । आयुक् त िकए गए सभी संिवतरणᲂ को िवस्तारपू्वर्क दिशत करते हुए एक िववरण िनयोजक के आवेदन पर देगा । 9[(5) िकसी मृत 4[कमर्चारी] के बारे मᱶ िनिक्षप् त पर्ितकर, उपधारा (4) के अधीन की गई िकसी कटौती के अध्यधीन रहते हुए, मृत 4[कमर्चारी] के आिशर्तᲂ मᱶ या उनमᱶ से िकन्हᱭ मᱶ ऐसे अनुपात मᱶ, िजसे आयुक् त ठीक समझे, पर्भािजत ेकानुसार िकसी एक आिशर्त को आबंिटत िकया जा सकेगा । (6) जहां िक आयुक् त के पास िनिक्षप् त िकया गया कोई पर्ितकर िकसी ᳞िक् त संदेय है वहां आयुक् त वह धन उसके हकदार ᳞िक् त को उस दशा मᱶ िजसमᱶ िक वह ᳞िक् त िजससे पर्ितकर संदेय ह Ა मᱶ दे सकेगा । (7) जहां िक आयुक् त के पास िनिक्षप् त कोई एकमुश्त रािश िकसी स् तर्ी या िविधक िनयᲃग्यता के अधीन ᳞िक् त को संदेय है वहां, ऐसी रािश उस स् तर्ी क ी जाए, िविनिहत की जा सकेगी, उपयोिजत की जा सकेगी या अन्यथा बरती जा सकेगी, और जहां िक िविधक िनयᲃग्यता के अधीन ᳞िक् त को कोई अधर्मािसक संदाय संदेय है वहां, आयुक् त स्वपर्ेरणा से या इस िनिमᱫ अपने को िकए गए िकसी आवेदन पर, यह 1 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 4 ᳇ारा “उपधारा” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 2 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 3 ᳇ारा जोड़ी गई उपधारा (2) का 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा लोप िकया गया । 3 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 4 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 4 ᳇ारा मूल उपधारा (1) से (3) तक के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 5 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 6 ᳇ारा परन्तुक के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 6 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 6 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 7 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 4 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 8 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 6 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ का लोप िकया गया । 9 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 4 ᳇ारा मूल उपधारा (5) के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 9 आदेश दे सकेगा िक संदाय उस िनयᲃग्यता के दौरान 1[कमर्चारी] के िकसी आिशर्त को या िकसी अन्य ऐसे ᳞िक् त को, िजसे आयुक् त 1[कमर्चारी] के कल्याणाथर् उपबन्ध करने के िलए सबसे अिधक उपयुक् त समझे, िकया जाए ।] 2[(8)] जहां िक इस िनिमᱫ अपने को िकए गए िकसी आवेदन पर या अन्यथा आयुक् त का समाधान हो जाता है िक पर्ितकर के प मᱶ दी गई िकसी रािश के िवतरण के सम्बन्ध मᱶ, या उस रीित के सम्बन्ध मᱶ, िजसमᱶ रू ऐसे िकसी आिशर्त को संदेय कोई रािश िविनिहत का हेतुक दिशत करने के िलए अवसर न दे िदया गया हो िक ऐसा आदेश क्यᲂ न िकया जाए, और न वह िकसी ऐसी दशा मᱶ िकया जा या अन्य अनुिचत साधनᲂ ᳇ारा अिभपर्ाप् त िकया गया है, वहां ऐसे ᳞िक् त को या उसके िनिमᱫ इस पर्कार दी गई कोई र ी पर्कार समनुिदष् ट या भािरत िकए जाने के योग्य या कुक᳹ के दाियत्व के पश् चात् यथासाध्य शीघर् उस रीित से, जो इसमᱶ पश् चात् उपबिन्धत की गई है, न दे दी गई हो और जब जाएगा िक वह उन िदनᲂ मᱶ से पहले िदन को हुई थी, िजनके दौरान 1[कमर्चारी] उस रोग ᳇ारा कािरत िनःशक् तत णना उस िदन से की जाएगी िजसको 1[कमर्चारी] िनःशक् तता की सूचना ए िनयोिजत िकए जा चुकने पर, इस पर्कार िनयोिजत नहᱭ रह जाता और उस िनयोजन मᱶ िविशष् टत वा [कमर्चारी] की ऐसी दुघर्टना के पिरणामस्वरूप हुई मृत्यु के बारे मᱶ 8[िकया] गया है जो िनयोजन के प े स्थान मᱶ हुई थी, जहां 1[कमर्चारी] दुघर्टना के समय िनयोजक या उसके ᳇ारा िनयोिजत िकसी ᳞िक् त के िनयंतर्ण की जानी, उपयोिजत की जानी या अन्यथा बरती जानी है, आयुक् त के आदेश मᱶ फेरफार, िकसी ऐसे ᳞िक् त ᳇ारा, जो माता या िपता है संतान की उपेक्षा के कारण, या िकसी आिशर्त की पिरिस्थितयᲂ मᱶ फेरफार के कारण, या िकसी अन्य पयार्प् त हेतुक से िकया जाना चािहए वहां, आयुक् त पूवर्वतᱮ आदेश मᱶ फेरफार के िलए ऐसे आदेश कर सकेगा, जैसे वह मामले की पिरिस्थितयᲂ मᱶ न्यायसंगत समझे : परन्तु िकसी ᳞िक् त पर पर्ितकूल पर्भाव डालने वाला ऐसा कोई भी आदेश तब तक न िकया जाएगा जब तक िक उस ᳞िक् त को इस बात एगा, िजसमᱶ िक उस आदेश मᱶ आिशर्त ᳇ारा िकसी ऐसी रािश का पर्ितसंदाय अन्तवर्िलत होता हो जो उस आिशर्त को पहले ही संदᱫ की जा चुकी हᱹ । 3[(9) जहां िक आयुक् त िकसी आदेश मᱶ उपधारा (8) के अधीन इस तथ्य के कारण फेरफार करता है िक ᳞िक् त को पर्ितकर का संदाय कपट, पर्ितरूपण कम आगे धारा 31 मᱶ उपबिन्धत रीित से वसूल की जा सकेगी ।]

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