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पर्ितकर के िलए िनयोजक का दाियत्व—(1) यिद 12[कमर्चारी] को अपने िनयोजन से और उनके अनुकर्म मᱶ उद्भूत दुघर्टना ᳇ारा वैयिक् तक क्षित कािरत होती है तो उसका िनयोजक इस अध्याय के उपबन्धᲂ के अनुसार पर्ितकर का देनदार होगाः परन्तु िनयोजक— (क) िकसी ऐसी क्षित के बारे मᱶ िजसके पिरणामस्वरूप कमर्कार को 13[तीन] िदन से अिधक की कालाविध के िलए पूणर् या आंिशक िनःशक् तता नहᱭ रहती; 1 िविध अनुकूलन आदेश, 1950 ᳇ारा “केन्दर्ीय िवधान-मंडल के या भारत के िकसी पर्ान्त मᱶ िकसी िवधान-मंडल के अिधिनयम” शब्दᲂ के स् थान पर पर्ितस्थािपत । 2 िविध अनुकूलन (सं० 3) आदेश, 1956 ᳇ारा “भाग क या भाग ख राज्य” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 3 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 2 ᳇ारा (1-6-1959 से) िचिकत्सा अिधिनयम, 1858 के अधीन या इसे संशोधन करने वाला कोई अिधिनयम, या” शब्दᲂ का लोप िकया गया । 4 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 2 ᳇ारा खंड (ञ) का लोप िकया गया । 5 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 2 ᳇ारा “रिजस्टर्ीकृत” शब्द का लोप िकया गया । 6 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 2 ᳇ारा “िकसी ऐसे पोत” शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 7 1962 के अिधिनयम सं० 64 की धारा 2 ᳇ारा (1-2-1963 से) परन्तुक के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 8 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 6 ᳇ारा लोप िकया गया । 9 भारत शासन (भारतीय िविध अनुकूलन) आदेश, 1937 ᳇ारा “सरकार” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 10 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 2 ᳇ारा (15-9-1995 से) उपधारा (3) के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 11 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 3 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 12 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 13 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 3 ᳇ारा (1-6-1959 से) “सात” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 4 (ख) दुघर्टना 1[᳇ारा हुई िकसी क्षित के बारे मᱶ, िजसके पिरणामस्वरूप मृत्यु 2[या स्थायी पूणर् िनःशक् तता] नहᱭ हुई है], और जो पर्त्यक्षतः इस कारण से हुई मानी जा सकती है िक— (i) उसके होने के समय 3[कमर्चारी] पर मिदरा या औषिधयᲂ का असर था, अथवा (ii) 3[कमर्चारी] का क्षेम सुिनिश् चत करने के पर्योजन के िलए अिभ᳞क् त रूप से िदए गए िकसी आदेश या अिभ᳞क् त रूप से बनाए गए िकसी िनयम की अवज्ञा 3[कमर्चारी] ᳇ारा जान-बूझकर की गई थी, अथवा (iii) कोई ऐसा रक्षोपाय या अन्य युिक् त, िजसके बारे मᱶ वह जानता था िक वह 3[कमर्चारी] का क्षेम सुिनिश् चत करने के पर्योजन के िलए उपबिन्धत की गई है, 3[कमर्चारी] ᳇ारा जानबूझकर हटाई गई थी या उसकी अवहेलना की गई थी, 4*** 5* * * * इस पर्कार देनदार नहᱭ होगा । 6[(2) यिद अनुसूची 3 के भाग क मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ िनयोिजत 3[कमर्चारी] को कोई ऐसा रोग लग जाता है जो उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ उस भाग मᱶ िविनिदष् ट है, या िजस िनयोजक की सेवा मᱶ 3[कमर्चारी] अनुसूची 3 के भाग ख मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ छह मास से अन्यून की िनरन्तर कालाविध के िलए (िजस कालाविध मᱶ िकसी अन्य िनयोजक के अधीन उसी ढंग के िनयोजन मᱶ सेवा की कालाविध सिम्मिलत नहᱭ होगी) िनयोिजत रहा है उस िनयोजक की सेवा मᱶ रहने के समय यिद उसे कोई ऐसा रोग लग जाता है जो उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ उस भाग मᱶ िविनिदष् ट है, या अनुसूची 3 के भाग ग मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ 3[कमर्चारी] को एक या अिधक िनयोजनᲂ की सेवा मᱶ ऐसी िनरन्तर कालाविध के िलए जैसी ऐसे हर एक िनयोजन के बारे मᱶ केन्दर्ीय सरकार िविनिदष् ट करे, रहने के समय यिद कोई ऐसा रोग लग जाता है जो उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ उस भाग मᱶ िविनिदष् ट है तो उस रोग के लगने के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक वह इस धारा के अथर् के अन्दर दुघर्टना ᳇ारा हुई क्षित है और ज़ब तक िक तत्पर्ितकूल सािबत नहᱭ कर िदया जाता तब तक दुघर्टना के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक वह उस िनयोजन से और उसके अनुकर्म मᱶ उद्भूत हुई हैः 7[परन्तु यिद यह सािबत हो जाता है िक— (क) िकसी 3[कमर्चारी] को अनुसूची 3 के भाग ग मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ एक या अिधक िनयोजकᲂ की सेवा मᱶ रहने के समय कोई ऐसा रोग, जो उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ उस भाग मᱶ िविनिदष् ट है, ऐसी िनरन्तर कालाविध के दौरान लग गया है जो उस िनयोजन के िलए इस उपधारा के अधीन िविनिदष् ट कालाविध से कम है, तथा (ख) वह रोग उस िनयोजन से और उसके अनुकर्म मᱶ उद्भूत हुआ है, तो ऐसे रोग के लगने के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक वह इस धारा के अथर् के अन्दर दुघर्टना ᳇ारा हुई क्षित हैः परन्तु यह भी िक यिद यह सािबत हो जाता है िक कोई 3[कमर्चारी], िजसने अनुसूची 3 के भाग ख मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ िकसी िनयोजक के अधीन या उस अनुसूची के भाग ग मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ एक या अिधक िनयोजकᲂ के अधीन, उस िनयोजन के िलए इस उपधारा के अधीन िविनिदष् ट िनरन्तर कालाविध के िलए सेवा की है और उसे ऐसी सेवा की समािप् त के पश् चात् कोई ऐसा रोग लग गया है जो उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग के रूप मᱶ, यथािस्थित, उक् त भाग ख या उक् त भाग ग मᱶ िविनिदष् ट है और यह िक ऐसा रोग उस िनयोजन से उद्भूत हुआ था तो उस रोग के लगने के बारे मᱶ यह समझा जाएगा िक वह इस धारा के अथर् के अन्दर दुघर्टना ᳇ारा हुई क्षित है ।] 8[(2क) यिद अनुसूची 3 के भाग ग मᱶ िविनिदष् ट िकसी िनयोजन मᱶ िनयोिजत िकसी 3[कमर्चारी] को उस िनयोजन मᱶ िविशष् टतः होने वाला कोई ऐसा उपजीिवकाजन्य रोग लग जाता है, िजसके लगने के बारे मᱶ यह समझा जाता है िक वह इस धारा के अथर् के अन्दर दुघर्टना ᳇ारा हुई क्षित है और ऐसा िनयोजन एक से अिधक िनयोजकᲂ के अधीन था तो, ऐसे सब िनयोजक पर्ितकर का ऐसे अनुपात मᱶ संदाय करने के दायी हᲂगे जैसा आयुक् त उन पिरिस्थितयᲂ मᱶ न्यायसंगत समझे ।] (3) 9[केन्दर्ीय सरकार या राज्य सरकार] िकसी भी वणर्न के िनयोजन को, ऐसा करने के अपने आशय की कम से कम तीन मास की सूचना, शासकीय राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, देने के पश् चात् अनुसूची 3 मᱶ िविनिदष् ट िनयोजनᲂ मᱶ वैसी ही अिधसूचना ᳇ारा, 1 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 3 ᳇ारा “से होने वाली िकसी कमर्कार को क्षित” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 2 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 3 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत । 3 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 4 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 2 ᳇ारा “अथवा” शब्द का लोप िकया गया । 5 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 2 ᳇ारा खंड (ग) का लोप िकया गया । 6 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 3 ᳇ारा (1-6-1959 से) उपधारा (2) और (3) के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 7 1962 के अिधिनयम सं० 64 की धारा 3 ᳇ारा (1-2-1963 से) अन्तःस्थािपत । 8 1962 के अिधिनयम सं० 64 की धारा 3 ᳇ारा (1-2-1963 से) उपधारा (2क) के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 9 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 3 ᳇ारा (15-9-1995 से) कितपय शब्दᲂ के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 5 जोड़ सकेगी और इस पर्कार जोड़े गए िनयोजनᲂ के बारे मᱶ उन रोगᲂ को िविनिदष् ट करेगी, िजनके बारे मᱶ इस धारा के पर्योजनᲂ के िलए समझा जाएगा िक वे कर्मशः उन िनयोजनᲂ मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग हᱹ और तदुपिर उपधारा (2) के उपबन्ध, 1[केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा अिधसूचना की दशा मᱶ, उन राज्यक्षेतर्ᲂ के भीतर िजन पर इस अिधिनयम का िवस्तार है, या राज्य सरकार ᳇ारा अिधसूचना की दशा मᱶ, राज्य के भीतर] 2*** ऐसे लागू हᲂगे मानो इस अिधिनयम ᳇ारा यह घोिषत िकया गया था िक वे रोग उन िनयोजनᲂ मᱶ िविशष् टतः होने वाले उपजीिवकाजन्य रोग हᱹ ।] (4) उपधाराᲐ 3[(2), (2क)] और (3) ᳇ारा यथा उपबिन्धत के िसवाय िकसी रोग के िलए कोई भी पर्ितकर 4[कमर्चारी] को तब तक संदेय न होगा जब तक िक रोग उसके िनयोजन से और उसके अनुकर्म मᱶ उद्भूत दुघर्टना ᳇ारा हुई िकसी िविनिदष् ट क्षित के कारण से 5*** पर्त्यक्षतः हुआ नहᱭ माना जा सकता । (5) यिद 4[कमर्चारी] ने िनयोजक या िकसी अन्य ᳞िक् त के िवरु िकसी िसिवल न्यायालय मᱶ िकसी क्षित के िलए नुकसानी का कोई वाद संिस्थत कर िदया है तो इसमᱶ की िकसी भी बात के बारे मᱶ यह न समझा जाएगा िक वह 4[कमर्चारी] को उस क्षित के िलए पर्ितकर पाने का कोई अिधकार पर्दान करती है, और िकसी क्षित के िलए 4[कमर्चारी] ᳇ारा िकसी िविध-न्यायालय मᱶ नुकसानी के िलए कोई भी वाद न चल सकेगा,— (क) यिद उसने उस क्षित के बारे मᱶ पर्ितकर का कोई दावा आयुक् त के समक्ष संिस्थत कर िदया है, अथवा (ख) यिद उस क्षित के िलए पर्ितकर के संदाय का उपबन्ध करने वाला कोई करार 4[कमर्चारी] और उसके िनयोजन के बीच इस अिधिनयम के उपबन्ध के अनुसार हो चुका है । 6[4. पर्ितकर की रकम—(1) इस अिधिनयम के उपबंधᲂ के अध्यधीन यह है िक पर्ितकर की रकम िनम् निलिखत होगी, अथार्त्:— (क) जहां िक क्षित के पिरणामस्वरूप मृत्यु हो जाती है मृत 4[कमर्चारी] की मािसक मजदूरी को सुसंगत गुणक से गुणा करके पर्ाप् त रकम से 7[पचास पर्ितशत] के बराबर रकम; या 8[एक लाख बीस हजार] की रकम, इनमᱶ से जो भी अिधक हो; (ख) जहां िक क्षित के पिरणामस्वरूप स्थायी मतृ 4[कमर्चारी] की मािसक मजदूरी को सुसंगत गुणक से गुणा भी 10[परंतु केन्दर्ीय सरकार, राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ य पर, खंड (क) और खंड (ख) मᱶ उिल्लिखत पर्ितकर क खंड (ख) के पर्योजनᲂ के िलए, िकसी 4[कमर्चारी] के संबंध मᱶ, “सुसंगत गुणक” से अनुसूची * * * * जहां िक क्षित के पिरणामस्वरूप स्थायी (i) ऐसी क्ष की दशा मᱶ, जो अनुसूच ाग 2 िविनिद है, पूणर् िनःशक् तता हो जाती है । करके पर्ाप् त रकम के 9[साठ पर्ितशत] के बराबर रकम; या 8[एक लाख चालीस हजार रुपए] की रकम, इनमᱶ से जो अिधक हो : ारा, समय-सम ी रकम मᱶ वृि कर सकेगी ।] स्पष् टीकरण 1—खंड (क) और 4 के पहले स्तंभ मᱶ की पर्िवष् ट के सामने उस अनुसूची के दूसरे स्तंभ मᱶ िविनिदष् ट गुणक अिभपर्ेत है, जो वषᲄ की उस संख्या को िविनिदष् ट करता है, जो 4[कमर्चारी] के, पर्ितकर देय होने की तारीख के ठीक पूवर्वतᱮ, अंितम जन्म िदवस को पूणर् हुए वषᲄ की संख्या के बराबर है । 11* (ग) ित ी 1 के भ मᱶ ष् ट आंिशक िनःशक् तता हो जाती है है, उस पर्ितकर का, जो स्थायी पूणर् िनःशक् तता की दशा मᱶ संदेय होता, ऐसा पर्ितशत, जो उस क्षित ᳇ारा कािरत उपाजर्न-सामथ्यर् की हािन के पर्ितशत के रूप मᱶ उस भाग मᱶ िविनिदष् ट है, तथा (ii) ऐसी क्षित की दशा मᱶ, जो अनुसूची 1 मᱶ िविनिदष् ट नहᱭ 1 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 3 ᳇ारा (15-9-1995 से) अंतःस्थािपत । 2 1970 के अिधिनयम सं० 51 की धारा 2 और अनुसूची ᳇ारा (1-9-1971 से) कितपय शब्दᲂ का लोप िकया गया । 3 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 3 ᳇ारा (1-6-1959 से) “उपधारा (2)” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 4 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 5 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 3 ᳇ारा “पूणर्तः और” शब्दᲂ का लोप िकया गया । 6 1984 के अिधिनयम सं० 22 की धारा 3 ᳇ारा (1-7-1984 से) धारा 4 के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 7 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 4 ᳇ारा (15-9-1995 से) “चालीस पर्ितशत” के स् थान पर पर्ितस् थािपत 8 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 9 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 4 ᳇ारा (15-9-1995 से) “पचास पर्ितशत” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 10 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 11 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा लोप िकया गया । 6 उस पर्ितकर का, जो स् थायी पूणर् िनःशक् तता की दशा मᱶ संदेय होता, ऐसा पर्ितशत, जो उस क्षित ᳇ारा स्थायी रूप से कािरत उपाजर्न-सामथ्यर् की (जैसे अिहत िचिकत्सा ᳞वसायी ᳇ारा िनधार्िरत िकया जाए) हािन का आनुपाितक हो । से अिधक क्षितयां होती हᱹ, वहां इस शीषर्क के अधीन स्पष् टीकरण 1—जहां िक एक ही दुघर्टना से हक संदेय पर्ितकर की रकम र्न-सामथ्यर् का िनधार्रण करने मᱶ, अिहत िचिकत्सा ᳞वसायी (घ) जहां िक क्षित के पिरणामस्वरूप, चाहे र् चाहे 1[कमर्चारी] की मािसक मजदूरी के पच्चीस पर्ितशत के समतुल्य 2[(1क) उपधारा (1) मᱶ िकसी बात के होते हुए भी, आयुक् त हुई िकसी दुघर्टना के संबंध मᱶ िकसी 1[कमर्चारी] को संदेय धारा (1) के पर्योजनᲂ के िलए िकसी कमर्चारी के संबंध मᱶ ऐसी मािसक म य, जो उस दशा मᱶ,— तता की तारीख से; अथवा ी पर्तीक्षा (क) िकसी ऐसी एकमुश्त रकम या अधर्-मािसक संदायᲂ मᱶ से, िजनका 1[कमर्चारी] हकदार है, िकसी संदाय या भᱫे की वह र क नहᱭ होगा, िजतनी से घर्टना क भᱫा, जो [कमर्चारी] ने िचिकत्सा लेखे िनयोजक से पर्ाप् त िकया है, परन्तुक के खंड (क) के अथर् के अ के ᳇ारा उपगत वास्तिवक िचिकत्सा ᳞य की पर्ितपूित क ख से पहले, िजसको कोई अधर्-मािसक संदाय शोध्य होता है, िनःशक् तता के दूर हो जाने पर, उस अधर्-मास के िलए ऐसी क, उपधारा (1) के अधीन पर्ितकर के अितिर ᱶ वृि कर सकेगी ।] संकिलत कर ली जाएगी िकन्तु िकसी भी दशा मᱶ ऐसी नहᱭ होगी िक वह उस रकम से बढ़ जाए, जो उन क्षितयᲂ के पिरणामस्वरूप स्थायी पूणर् िनःशक् तता होने की दशा मᱶ संदेय होती । स्पष् टीकरण 2—उपखंड (ii) के पर्योजनᲂ के िलए उपाज , अनुसूची 1 िविनिदष् ट िविभन् न क्षितयᲂ के संबंध मᱶ उपाजर्न-सामथ्यर् की हािन के पर्ितशत का सम्यक् ध्यान रखेगा; पूण आंिशक, अस्थायी िनःशक् तता हो जाती है । रकम का अधर्-मािसक संदाय उपधारा (2) के उपबन्धᲂ के अनुसार िकया जाएगा । , भारत के बाहर पर्ितकर की रकम िनयत करते समय उस देश की िविध के अनुसार, िजसमᱶ दुघर्टना हुई थी, ऐसे 1[कमर्चारी] को अिधिनणᱮत की गई पर्ितकर की रकम को, यिद कोई हो, ध्यान मᱶ रखेगा और अपने ᳇ारा िनयत की गई रकम मᱶ से उस देश की िविध के अनुसार 1[कमर्चारी] को अिधिनणᱮत की गई पर्ितकर की रकम को घटा देगा;] 3[(1ख) केन्दर्ीय सरकार, राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, उप जदूरी िविनिदष् ट कर सकेगी, जो वह आवश्यक समझे ।] (2) उपधारा (1) के खंड (घ) मᱶ िनिदष् ट अधर्-मािसक संदा (i) िजसमᱶ िक ऐसी िनःशक् तता अᲶाईस िदन या उससे अिधक रहती है, िनःशक् (ii) िजसमᱶ िक ऐसी िनःशक् तता अᲶाईस िदन से कम रहती है, िनःशक् तता की तारीख से तीन िदन क कालाविध के अवसान के पश् चात् सौलहवᱶ िदन को और तत्पश् चात् िनःशक् तता के दौरान या पांच वषर् की कालाविध के दौरान इनसे से जो भी कालाविध लघुतर हो, आधे-आधे मास पर संदेय होगाः परन्तु— कम काट ली जाएगी, जो 1[कमर्चारी] ने, यथािस्थित, ऐसी एकमुश्त रकम की या पर्थम अधर्-मािसक संदाय की पर्ािप् त से पूवर्, िनःशक् तता की कालाविध के दौरान पर्ितकर के रूप मᱶ िनयोजक से पर्ाप् त की है; तथा (ख) कोई भी अधर्-मािसक संदाय िकसी भी दशा मᱶ इतनी रकम से, यिद कोई हो, अिध दु े पहले 1[कमर्चारी] की मािसक मजदूरी की आधी रकम उस मजदूरी की आधी रकम से अिधक है, िजसे वह दुघर्टना के पश् चात् उपािजत कर रहा है । स्पष् टीकरण—ऐसा कोई संदाय या 1 न्दर पर्ितकर के रूप मᱶ उसके ᳇ारा पर्ाप् त संदाय या भᱫा नहᱭ समझा जाएगा । 3[(2क) कमर्चारी को िनयोजन के दौरान कािरत क्षितयᲂ के उपचार के िलए उस ी जाएगी ।] (3) उस तारी रािश संदेय होगी जो उस अधर्-मास मᱶ िनःशक् तता की अिस्तत्वाविध की आनुपाितक हो । 2[(4) यिद 1[कमर्चारी] को हुई क्षित के पिरणामस्वरूप उसकी मृत्यु हो जाती है, तो िनयोज क् त, आयुक् त के पास ऐसे 1[कमर्चारी] की अंत्येिष् ट के ᳞य के िलए 1[कमर्चारी] के सबसे बड़े उᱫरजीवी आिशर्त को, अथवा जहां 1[कमर्चारी] का कोई आिशर्त नहᱭ है या वह अपनी मृत्यु के समय अपने आिशर्तᲂ के साथ नहᱭ रह रहा था वहां उस ᳞िक् त को, िजसने वास्तव मᱶ ऐसा ᳞य उपगत िकया है, संदाय के िलए 4[पांच हजार रुपए से अन्यून] की रािश जमा करेगा ।] 5[परन्तु केन्दर्ीय सरकार, राजपतर् मᱶ अिधसूचना ᳇ारा, समय-समय पर इस उपधारा मᱶ िविनिदष् ट रकम म 1 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । ) अंतःस्थािपत । 2 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 4 ᳇ारा (15-9-1995 से 3 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 4 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 5 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 7 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 7 1[4क. शोध्य हो जाने पर पर्ितकर का िदया जाना और ᳞ितकर्म के िलए शािस् त—(1) धारा 4 के अधीन पर्ितकर शोध्य होते ही दे िदया जाएगा । ितगृहीत करता है उस पर आधृत अनिन्तम संदाय करने के िलए वह आब होगा और ऐसा संदाय, कोई अितिरक् त दावा कर ी अिधकतम दरᲂ से अनिधक ऐसी उच् चतर दर से, जो केन्दर्ीय सरकार ᳇ारा, राजपतर् मᱶ अिधसूचन श का शािस्त के रूप मᱶ संदाय करेगाः िदए िबना पािरत नहᱭ िकया जाएगा िक उसे क्यᲂ न पािरत िकया जाए । मजदूरी” पद से इस अिधिनयम मᱶ और इसके पर्योजनᲂ के िलए एक मास ध के िहसाब वां भाग होगी, जो मजदूरी वह औसत मािसक र रना सम्भव नहᱭ है)] मािसक मजदूरी उस िनयोजक से, जो पर्ितकर का देनदार है, दुघर्टन ुपिस्थित-कालाविध के िलए िवच्छेद नहᱭ हुआ है, 12[इस (2) िजन दशाᲐ मᱶ िनयोजक पर्ितकर के िलए दाियत्व दावाकृत िवस्तार तक पर्ितगृहीत नहᱭ करता उनमᱶ िजस पर्कार िवस्तार तक का दाियत्व वह पर् ने के सम्बन्ध मᱶ 2[कमर्चारी] के अिधकार पर पर्ितकूल पर्भाव डाले िबना, यथािस्थित, आयुक् त के पास िनिक्षप् त कर िदया जाएगा या 3[कमर्चारी] को दे िदया जाएगा ।] 3[(3) जहां कोई िनयोजक इस अिधिनयम के अधीन शोध्य पर्ितकर को उसके शोध्य हो जाने की तारीख से एक मास के भीतर देने मᱶ ᳞ितकर्म करता है, वहां आयुक् त— (क) यह िनदेश देगा िक िनयोजक, बकाया रकम के अितिरक् त, उस पर बारह पर्ितशत पर्ितवषर् की दर से या िकसी अनुसूिचत बᱹक की उधार देने क ा ᳇ारा, ऐसी शोध्य रकम पर िविनिदष् ट की जाए, साधारण ब्याज का संदाय करेगा; (ख) यिद उसकी यह राय है िक िवलम्ब के िलए कोई न्यायोिचत्य नहᱭ है तो, यह िनदेश देगा िक िनयोजक, बकाया रकम और उस पर ब्याज के अितिरक् त ऐसी रकम के पचास पर्ितशत से अनिधक अितिरक् त राि परन्तु शािस्त के संदाय के िलए कोई आदेश, खंड (ख) के अधीन िनयोजक को यह हेतुक दिशत करने का युिक् तयुक् त अवसर स्पष् टीकरण—इस उपधारा के पर्योजनᲂ के िलए, “अनुसूिचत बᱹक” से ऐसा बᱹक अिभपर्ेत है जो तत्समय भारतीय िरजवर् बᱹक अिधिनयम, 1934 (1934 का 2) की ि᳇तीय अनुसूची मᱶ सिम्मिलत हᱹ । 4[(3क) उपधारा (3) के अधीन संदेय ब्याज और शािस्त, यथािस्थित, 3[कमर्चारी] या उसके आिशर्त को संदᱫ की जाएगी ।] [5. मजदूरी का िहसाब करने की पित—5*** 6[“मािसक की सेवा के िलए संदेय समझी जाने वाली मजदूरी की रकम (चाहे वह मजदूरी मास के िहसाब से या िकसी भी अन्य कालावि से या मातर्ानुपाती दरᲂ से संदेय हो) अिभपर्ेत है, और िजसका िहसाब िनम् निलिखत रूप मᱶ िकया जाएगा], अथार्त्— (क) जहां िक 3[कमर्चारी] उस िनयोजक की, जो पर्ितकर का देनदार है, सेवा मᱶ दुघर्टना से ठीक पहले के बाहर मास से अन्यून की िनरन्तर कालाविध के दौरान रहा है, वहां 3[कमर्चारी] की मािसक मजदूरी उस कुल मजदूरी का बारह उस कालाविध के अिन्तम बारह मासᲂ मᱶ िनयोजक ᳇ारा उसे संदाय के िलए शोध्य हो गई है; 7[(ख) जहां िक दुघर्टना से ठीक पहले की उस सेवा की सम्पूणर् िनरन्तर कालाविध, िजसके दौरान 3[कमर्चारी] उस िनयोजक की सेवा मᱶ था, जो पर्ितकर का देनदार है, एक मास से कम थी वहां, 3[कमर्चारी] की मािसक कम 8*** होगी िजसे उसी िनयोजक ᳇ारा उसी काम मᱶ िनयोिजत कोई 3[कमर्चारी], या यिद कोई 3[कमर्चारी] इस पर्कार िनयोिजत नहᱭ था, तो उसी पिरक्षेतर् मᱶ िकसी वैसे ही काम मᱶ िनयोिजत कोई 3[कमर्चारी] दुघर्टना से ठीक पहले के बारह मास के दौरान उपािजत कर रहा था;] 9[(ग)] 10[अन्य दशाᲐ मᱶ (िजनके अन्तगर्त वे दशाएं आती हᱹ, िजनमᱶ िक आवश्यक जानकारी के अभाव मᱶ खण्ड (ख) के अधीन मािसक मजदूरी का िहसाब क ा से ठीक पहले की सेवा की अिन्तम िनरन्तर कालाविध के िलए उपािजत कुल मजदूरी को ऐसी कालाविध मᱶ समािवष् ट िदनᲂ की संख्या से िवभािजत करने पर पर्ाप् त भजनफल की तीस गुनी होगी । 11* * * * स्पष् टीकरण—सेवा की ऐसी कालाविध, िजसमᱶ काम पर से चौदह िदन से अिधक की अन 1[धारा]] के पर्योजनᲂ के िलए िनरन्तर कालाविध समझी जाएगी । ंतःस्थािपत । ) “उपधारा (3)” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । ारा (1) के रूप मᱶ पुनःसंख्यांिकत िकया गया और 1938 के अिधिनयम सं० 9 की धारा 4 ᳇ारा ा (30-6-1934 से) “इस अिधिनयम के पर्योजन के िलए कमर्कार की मािसक मजदूरी की गणना की जाएगी” के स्थान पर “समझी जाएगी” शब्दᲂ का लोप िकया गया । ािपत । 1 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 5 ᳇ारा (1-6-1959 से) अ 2 2009 के अिधिनयम सं० 45 की धारा 4 ᳇ारा पर्ितस्थािपत । 3 1995 के अिधिनयम सं० 30 की धारा 5 ᳇ारा (15-9-1995 से 4 2000 के अिधिनयम सं० 46 की धारा 4 ᳇ारा (8-12-2000 से) पर्ितस्थािपत । 5 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 3 ᳇ारा मूल धारा 5 को उसकी उपध “(1)” कोष् ठकᲂ और अंक का लोप िकया गया । 6 1939 के अिधिनयम सं० 13 की धारा 2 ᳇ार पर्ितस्थािपत । मोटे अक्षरᲂ मᱶ शब्द 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा “धारा 4” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 7 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा अंतःस्थािपत । 8 1939 के अिधिनयम सं० 13 की धारा 2 ᳇ारा (30-6-1934 से) 9 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा मूल खण्ड (ख) को (ग) के रूप मᱶ पुनः अक्षरांिकत िकया गया । 10 1959 के अिधिनयम सं० 8 की धारा 6 ᳇ारा (1-6-1959 से) “अन्य दशाᲐ मᱶ” के स्थान पर पर्ितस्थािपत । 11 1933 के अिधिनयम सं० 15 की धारा 5 ᳇ारा परन्तुक का लोप िकया गया । 12 1929 के अिधिनयम सं० 5 की धारा 3 ᳇ारा “इस धारा” के स्थान पर पर्ितस्थ 8 2* * * *