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रजिस्ट्रार द्वारा इंकारी के आिेश की िशा में वाि—(1) िहां दक रजिस्ट्रार िे िस्ट्तावेि के रजिस्ट्रीकरण का आिेश िेिे से िारा 72 या िारा 76 के अिीि इंकार दकया है वहां उस जसजवि धयायािय में, जिसकी आरज्भक अजिकाररता की स्ट्थािीय सीमाओं के अधिर वह कायाणिय जस्ट्थत है, जिसमें उस िस्ट्तावेि के रजिस्ट्रीकरण करिे की ईप्सा की गई है, कोई भी व्यज त, िो ऐसी िस्ट्तावेि के अिीि िावा करता है, या उसका प्रजतजिजि, समिुिेजशती या अजभकताण, इंकार का आिेश दकए िािे के प चात तीस दिि के अधिर, ऐसी जिक्री के जिए वाि संजस्ट्थत कर सकेगा िो यह जििेश िे दक यदि जिक्री के पाररत दकए िािे के प चात तीस दिि के अधिर िस्ट्तावेि रजिस्ट्रीकरण के जिए स्यक रूप से उपस्ट्थाजपत की िाए तो वह ऐसे कायाणिय में रजिस्ट्रीकृत की िाए । (2) िारा 75 की उपिाराओं (2) और (3) में अधतर्वण ि उपबधि उि सब िस्ट्तावेिों को यथावयक पररवतणिों सजहत िागू होंगे िो ऐसी दकसी जिक्री के अिुसरण में रजिस्ट्रीकरण के जिए उपस्ट्थाजपत की िाए और इस अजिजियम में अधतर्वण ि दकसी बात के होते हुए भी वह िस्ट्तावेि ऐसे वाि में साक्ष्य में जिए िािे योय होगी । 18 भाग 13 रजिस्ट्रीकरण, तिाशी और प्रजतयों के जिए िीसों के जवषय में