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जिपािि के प्रत्याखयाि से जभध ि आिार पर रजिस्ट्रीकरण करिे से इंकार करिे वािे उपरजिस्ट्रार के आिेशों की रजिस्ट्रार को अपीि—(1) िहां दक जिपािि के प्रत्याखयाि के आिार पर इधकार दकया गया है वहां के जसवाय िस्ट्तावेि को रजिस्ट्रीकरण के जिए (चाहे ऐसी िस्ट्तावेि का रजिस्ट्रीकरण अजिवायण हो या वैकजल्पक हो), ग्रहण करिे से इधकार करिे वािे उपरजिस्ट्रार के आिेश के जवरुद्ध अपीि उस रजिस्ट्रार को होगी जिसके ऐसा उपरजिस्ट्रार के अिीिस्ट्थ है, यदि ऐसे रजिस्ट्रार को वह उस आिेश की तारीि से तीस दिि के अधिर की गई हो; और रजिस्ट्रार ऐसे आिेश को उिि सकेगा या पररवर्तणत कर सकेगा । (2) यदि रजिस्ट्रार का आिेश िस्ट्तावेि का रजिस्ट्रीकरण दकया िािा जिदि ि करे और ऐसे आिेश के दकए िािे के प चात तीस दिि के अधिर वह िस्ट्तावेि रजिस्ट्रीकरण के जिए स्यक रूप से उपस्ट्थाजपत की िाए तो उपरजिस्ट्रार उस आिेश का पािि करेगा और तिुपरर िाराओं 58, 59 और 60 में जवजहत प्रदक्रया का यावत्साध्य अिुसरण करेगा; और ऐसा रजिस्ट्रीकरण ऐसे प्रभावी होगा मािो वह िस्ट्तावेि उस समय रजिस्ट्रीकृत कर िी गई थी िब दक वह रजिस्ट्रीकरण के जिए प्रथम बार स्यक रूप से उपस्ट्थाजपत की गई थी । 1 1948 के अजिजियम सं० 39 की िारा 4 द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 2 केवि मु्बई को िागू भाग 11क (जिसमें िारा 70क से 70घ तक समाजवष्ट है): “िोिो के माध्यम से िस्ट्तावेिों की प्रजतयों के जवषय में” के जिए िेजिए इंजियि रजिस्ट्रेशि (बा्बे अमेंिमेंि) ऐि, 1930 (1930 का मु्बई अजिजियम सं० 17) की िारा 3 । िारा 70ि के प्रजतस्ट्थापि के जिए िेजिए इंजियि रजिस्ट्रेशि (बा्बे अमेंिमेंि) ऐि, 1938 (1938 का मु्बई अजिजियम सं० 24) की िारा 5 और िारा 70ङ के जिए िेजिए इंजियि रजिस्ट्रेशि (बा्बे अमेंिमेंि) ऐि, 1938 (1938 का मु्बई अजिजियम सं० 24) की िारा 7 । 17