Bare ActsThe Registration ACT 1908

Section 33

Amendment status not verified — confirm the current text below against the official source.

िारा 32 के प्रयोििों के जिए माधय दकए िािे यो‍य मुखतारिामा—(1) िारा 32 के प्रयोििों के जिए जि् िजिजित मुखतारिामे ही माधय दकए िाएंगे, अथाणत :— (क) यदि मुखतारिामे के जि‍पािि के समय माजिक 4[भारत] के दकसी ऐसे भाग में जिवास करता है, जिसमें इस अजिजियम का तत्समय प्रवतणि है तो उस जििे या उपजििे के, जिसमें माजिक जिवास करता है, रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार के समि जि‍पादित और ति द्वारा अजिप्रमाणीकृत मुखतारिामा; (ि) यदि माजिक पूवो‍ त समय पर 5[भारत के दकसी ऐसे अधय भाग में जिवास करता है, जिसमें इस अजिजियम का प्रवतणि िहीं है] तो दकसी भी मजिस्ट्रेि के समि जि‍पादित और ति द्वारा अजिप्रमाणीकृत मुखतारिामा; (ग) यदि माजिक पूवो‍ त समय पर 4[भारत] में जिवास िहीं करता है तो दकसी िोिेरी पजब्िक या दकसी धयायािय, धयायािीश, मजिस्ट्रेि, 6[भारतीय] कौधसि या उपकौधसि 7*** या केधद्रीय सरकार के प्रजतजिजि के समि जि‍पादित और ति द्वारा अजिप्रमाणीकृत मुखतारिामाः परधतु इस िारा के िण्ि (क) और (ि) में वर्णणत िैसे दकसी मुखतारिामे के जि‍पािि के प्रयोिि के जिए दकसी रजिस्ट्रीकरण कायाणिय या धयायािय में हाजिर होिे की अपेिा जि् िजिजित व्यज‍ तयों से ि की िाएगी, अथाणत :— (i) वे व्यज‍ त िो अंग-शैजथल्य के कारण िोजिम या घोर असुजविा के जबिा ऐसे हाजिर होिे में असमथण हैं; (ii) वे व्यज‍ त िो जसजवि या िाजण्िक आिेजशका के अिीि िेि में हैं; तथा (iii) वे व्यज‍ त िो धयायािय में स्ट्वीय उपसंिाजत से जवजि द्वारा छूि प्राप् त हैं । 1 2001 के अजिजियम सं० 48 की िारा 4 द्वारा (24-9-2001 से) िोप दकया गया । 2 1948 के अजिजियम सं० 39 की िारा 3 द्वारा “िारा 31 और िारा 89” के स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 3 2001 के अजिजियम सं० 48 की िारा 5 द्वारा (24-9-2001 से) अंतःस्ट्थाजपत । 4 1951 के अजिजियम सं० 3 की िारा 3 तथा अिुसूची द्वारा “राज्यों” के स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 5 1951 के अजिजियम सं० 3 की िारा 3 तथा अिुसूची द्वारा “राज्यों के दकसी अधय भाग में जिवास करता है” के स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 6 जवजि अिुकूिि आिेश, 1950 द्वारा “जिरिश” के स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 7 जवजि अिुकूिि आिेश, 1950 द्वारा “या जहि मिस्ट्िी के” शब्िों का िोप दकया गया । 9 1[स्ट्प‍ िीकरण—इस उपिारा में “भारत” से सािारण िण्ि अजिजियम, 1897 (1897 का 10) की िारा 3 के िण्ि (28) में यथापररभाजषत भारत, अजभप्रेत है ।] (2) हर ऐसे व्यज‍ त की िशा में, यथाजस्ट्थजत, रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार या मजिस्ट्रेि का यदि यह समािाि हो िाता है दक मुखतारिामा उस व्यज‍ त द्वारा स्ट्वेच्छया जि‍पादित है जिसका दक माजिक होिा तात्पर्यणत है तो वह पूवो‍ त कायाणिय या धयायािय में उसकी स्ट्वीय हाजिरी अपेजित दकए जबिा उसे अिुप्रमाजणत कर सकेगा । (3) रजिस्ट्रार या उपरजिस्ट्रार या मजिस्ट्रेि इस बाबत दक जि‍पािि स्ट्वेच्छया दकया गया है साक्ष्य अजभप्राप् त करिे के जिए या तो स्ट्वयं उस व्यज‍ त के गृह को िा सकेगा, जिसका माजिक होिा तात्पर्यणत है, या उस िेि में िा सकेगा, जिसमें वह व्यज‍ त परररुद्ध है, और उसकी परीिा कर सकेगा या उसकी परीिा करिे के जिए कमीशि जिकाि सकेगा । (4) इस िारा में वर्णणत दकसी भी मुखतारिामे को उस सूरत में अजतरर‍ त सबूत के जबिा उसके पेश दकए िािे से ही साजबत दकया िा सकेगा जिसमें सकृत िशणिे यह तात्पर्यणत है दक वह इस जिजमत्त एतजस्ट्मि वर्णणत व्यज‍ त या धयायािय के समि जि‍पादित और उसके द्वारा अजिप्रमाणीकृत दकया गया है ।

Section 33 – The Registration ACT 1908 | DailyLaw.ai