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िस्ट्तावेिें जििका रजिस्ट्रीकरण वैकजल्पक है—जि् िजिजित िस्ट्तावेिों में से दकसी की भी इस अजिजियम के अिीि रजिस्ट्री की िा सकेगी, अथाणत :— (क) (िाि की जिितों और जविों से जभध ि) वे जिित जििसे यह तात्पर्यणत हो या जििका प्रवतणि ऐसा हो दक वे स्ट्थावर स्पजत्त पर या स्ट्थावर स्पजत्त में एक सौ रुपए से कम मूल्य का कोई अजिकार, हक या जहत, चाहे वह जिजहत चाहे समाजित हो, चाहे वतणमाि में चाहे भजवय में, सृ ि, घोजषत, समिुिेजशत, पररसीजमत या जिवाणजपत करती हैं; (ि) ऐसी जिित, िो ऐसे दकसी भी अजिकार, हक या जहत के सृिि, घोषणा, समिुिेशि, पररसीमि, या जिवाणपि िेिे दकसी प्रजतिि की प्राजप् त या उसका संिाय अजभस्ट्वीकार करती हैं; (ग) एक वषण से अिजिक की दकसी भी अवजि के जिए स्ट्थावर स्पजत्त के पट्टे और िारा 17 के अिीि छूि-प्राप् त पट्टे; 4[(गग) धयायािय की दकसी भी जिक्री या आिेश का या दकसी भी पंचाि का अंतरण या समिुिेशि करिे वािी जिित िबदक ऐसी जिक्री या आिेश या पंचाि से यह तात्पर्यणत हो या उसका प्रवतणि ऐसा हो दक वह स्ट्थावर स्पजत्त के जिए या स्ट्थावर स्पजत्त में एक सौ रुपए से कम मूल्य का कोई अजिकार, हक या जहत, चाहे वह जिजहत चाहे समाजित हो, चाहे वतणमाि में चाहे भजवय में, सृ ि, घोजषत, समिुिेजशत, पररसीजमत या जिवाणजपत करती या करता है;] (घ) (जविों से जभध ि) वे जिितें जििसे यह तात्पर्यणत हो या जििका पररवतणि ऐसा हो दक वे िंगम स्पजत्त पर या िंगम स्पजत्त में कोई अजिकार, हक या जहत सृ ि, घोजषत, समिुिेजशत पररसीजमत या जिवाणजपत करती है; (ङ) जविें; तथा (च) सब अधय िस्ट्तावेिें जििका रजिस्ट्रीकरण िारा 17 द्वारा अपेजित िहीं है । 1 1929 के अजिजियम सं० 21 की िारा 10 द्वारा “और दकसी पंचाि को” के स्ट्थाि पर प्रजतस्ट्थाजपत । 2 1948 के अजिजियम सं० 39 की िारा 2 द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 3 1927 के अजिजियम सं० 2 की िारा 2 द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 4 1940 के अजिजियम सं० 33 की िारा 2 द्वारा अंतःस्ट्थाजपत । 6