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1 / 10 {Cr. A. No.-2039 of 2024}
2026:CGHC:3441 अप्रतिवेद्य छत्ती सगढ़ उच्च न्यायालया
, तिलसपुर
दाण्डिक अपु ल क्रमां"क
-2039
/2024
हर्ष,दा गप्ता तिपु-भाग रथी गप्ता, उम्र-लगभाग 24 वेर्ष,, पुशा-नौ3कर , तिनौवेस -ग्रामां गहर, थीनौ-गहर, जि6ल-मांहसमां"दा, छत्ती सगढ़ -----अपु लथी7/अतिभायाक्त तिवेरूद्घ छत्ती सगढ़ रज्या, द्वार थीनौ प्रभार , पुजिलस थीनौ-गहर, जि6ल-मांहसमां"दा, छत्ती सगढ़ -----उत्तीरवेदा /रज्या अपु लथी7/अतिभायाक्त द्वार : सश्री हमां दा जिसद्दी क@, अजिAवेक्त सतिह सश्री मांतिहमां चन्द्रा, अजिAवेक्त । उत्तीरवेदा /रज्या द्वार : श्री करण हरनौ , पुEनौल अजिAवेक्त । मांनौनौ या न्यायामांFति, श्री स"6या क मांर 6यासवेल
, न्यायाA शा
!! तिनौण,या पु ठ पुर पुरिर !! 20/01/2026
1. भार या नौगरिरक सरक्षा स"तिह, 2023 क@ Aर-415 (3) क ह प्रस् इस दाण्डिक अपु ल मांR तिवेचरण न्यायालया-अपुर सत्र न्यायाA शा, क नौक र , जि6ल-6शापुर, POMAN DEWANGAN Digitally signed by POMAN DEWANGAN Date: 2026.01.22 11:08:32 +0530
2 / 10 {Cr. A. No.-2039 of 2024} छत्ती सगढ़ द्वार सत्र प्रकरण क्रमां"क-72/2013 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ हर्ष,दा गप्ता” मांR पुरिर दाWर्षजिसतिX तिदानौ"क-30/04/2015 एवे" अपुर सत्र न्यायाA शा, पुत्थीलग"वे, जि6ल- 6शापुर, छत्ती सगढ़ द्वार सत्र प्रकरण क्रमां"क-01/2019 “छत्ती सगढ़ रज्या तिवेरूद्घ हर्ष,दा गप्ता” मांR पुरिर दादाशा तिदानौ"क-04/11/2024 कW चनौ3 दा गई हE । जि6सक ह अपु लथी7 कW तिनौम्नौनौसर दाWर्षजिसX कर दाण्डि तिकया गया हE । जि6स आग स"क्षापु मांR
“प्रश्नौA नौ तिनौण,या” स स"WजिA तिकया 6 रह हE_- दाWर्षजिसतिX दादाशा Aर-376 भार या दा स"तिह, 1860 07 वेर्ष, क सश्रीमां करवेस एवे" 10,000/-रूपुया क अथी,दा थी अथी,दा रतिशा अदा नौ करनौ क@ दाशा मांR 01 मांह क अतिरिरक्त सAरण करवेस क@ स6 । Aर-506 भार या दा स"तिह, 1860 01 वेर्ष, क सश्रीमां करवेस एवे" 1,000/- रूपुया क अथी,दा थी अथी,दा रतिशा अदा नौ करनौ क@ दाशा मांR 03 मांह क अतिरिरक्त सAरण करवेस क@ स6 । दाWनौa मांFल स6ए" सथी-सथी चलRग ।
2. अतिभायाW6नौ मांमांल स"क्षापु मांR इस प्रकर हE तिक अतिभायाWक्त्र (अ.स.-3), 6W ग्रामां गहर, जि6ल-मांहसमां"दा क@ तिनौवेस हE, नौ वेर्ष, 2013 मांR अनौतिवेभाग या अजिAकर (पुजिलस), पुत्थीलग"वे, जि6ल-6शापुर (छत्ती सगढ़) क समांक्षा प्रदाशा, पु -3 क मांध्यामां स एक जिलजिe तिशाकया प्रस् क@ । उक्त तिशाकया मांR याह आरWपु लगया गया तिक उसक ग्रामां क तिनौवेस अतिभायाक्त हर्ष,दा गप्ता तिवेग लगभाग पुfच वेर्षg" स उस तिवेवेह क झां"स दाकर उसक
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A. No.-2039 of 2024} सथी दाEतिहक शाWर्षण कर रह । 6 अतिभायाWक्त्र नौ अतिभायाक्त स तिवेवेह करनौ क जिलए कह, W अतिभायाक्त नौ तिवेवेह करनौ स इ"कर कर तिदाया । इसक पुश्च, 6 अतिभायाWक्त्र नौ तिवेवेह ह दावे नौया, W अतिभायाक्त एवे" उसक पुरिर6नौa द्वार उस तिवेतिभान्न प्रकर स प्रतिj तिकया 6नौ लग थी थीनौ मांR रिरपुWर्ट, करनौ क@ Aमांक@ दा 6नौ लग । अतिभायाक्त क तिपु नौ अतिभायाWक्त्र कW 6रनौ उठकर ल 6नौ थी 6नौ स मांरनौ क@ Aमांक@ दा , सथी ह आपुस
समांझां3 करनौ क उद्दीश्या स 06-07 लe रुपुया नौगदा थी सWनौ-चfदा दानौ क प्रलWभानौ तिदाया । अतिभायाक्त द्वार फोWनौ पुर याह Aमांक@ भा दा गई तिक वेह अतिभायाWक्त्र क@ आपुजित्ती6नौक फोWर्टW एवे" वे तियाW प्रसरिर कर दाग थी उस एवे" उसक@ हनौa कW दानौमां कर दाग, जि6सस अतिभायाWक्त्र कW मांनौजिसक रूपु स अत्याजिAक प्रjनौ सहनौ पुj । अतिभायाक्त एवे" अतिभायाWक्त्र क प्रमां स""A क@ 6नौकर अन्या चर व्यातिक्तयाa कW भा थी । उक्त जिलजिe तिशाकया क आAर पुर थीनौ पुत्थीलग"वे मांR तिदानौ"क 28/05/2013 कW प्रदाशा, पु -5 क ह प्रथीमां सFचनौ पुत्र पु"6 X तिकया गया । तिवेवेचनौ क दा3रनौ अतिभायाWक्त्र (अ.स.-3) क तिचतिकत्स या पुर क्षाण करया गया थी Eयार स्लइ कW रसयातिनौक पुर क्षाण ह भा6 गया । घर्टनौस्थील क नौक्शा Eयार तिकया गया । अतिभायाWक्त्र क कथीनौ Aर 164 दा प्रतिक्रया स"तिह क अ"ग, दा6, करया गया । अतिभायाWक्त्र क@ 6न्मां-तिजिथी क प्रमांणनौ ह स""जिA दास्वे6 6ब् तिकए गए, सतिक्षायाa क कथीनौ जिलए गए थी स"पुFण, तिवेवेचनौ उपुर" अतिभायाWग-पुत्र प्रस् तिकया गया ।
3. तिवेचरण क दा3रनौ आरWपु क प्रमांणनौ ह अतिभायाW6नौ क@ ओर स अपुनौ समांथी,नौ मांR क ल 12 सतिक्षायाa क पुर क्षाण करया गया थी 15 दास्वे6 प्रदातिशा, तिचन्ह"तिक करए गए । Aर 313 दा प्रतिक्रया स"तिह क ह कथीनौ मांR अतिभायाक्त नौ अपुनौ तिवेपुर सक्ष्या स इ"कर कर हsए कह हE तिक वेह ग"वे क एक नौ3कर पुशा नौवेयावेक हE थी अ"र6 या तिवेवेह
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A. No.-2039 of 2024} करनौ ह उस पुर 6रनौ दावे नौनौ क उद्दीश्या स, उस इस प्रकरण मांR झांFठ फोf सया गया हE 6तिक वेह तिनौदाgर्ष हE । उसक@ ओर स चवे मांR कWई सक्ष्या प्रस् नौहt तिकया गया । त्पुश्च उभायापुक्षा कW सनौ 6कर तिवेचरण न्यायालया द्वार अपु लथी7 कW इस तिनौण,या क@ कण्डिक-1 क अनौसर दाWर्षजिसX कर दाण्डि तिकया गया हE । जि6स इस अपु ल मांR चनौ3
दा गई हE ।
4. अपु लथी7/अतिभायाक्त क तिवेद्वानौ अजिAवेक्त क क, हE तिक अतिभायाWक्त्र (अ.स.-3) द्वार तिदानौ"क 28/08/2008 क@ 6W घर्टनौ ई गई हE, उसक स्पुष्ट तिवेवेरण उसक@ जिलजिe तिशाकया प्रदाशा, पु -3 मांR नौहt हE । उसक न्यायालया नौ यानौ, Aर 161 दा प्रतिक्रया स"तिह क अ"ग, दा6, यानौ थी जिलजिe तिशाकया क मांध्या ग"भा र तिवेरWAभास क@ ण्डिस्थीति हE । घर्टनौ तिदानौ"क 28/08/2008 क@ ई गई हE, 6तिक पुजिलस मांR तिशाकया वेर्ष, 2013 मांR क@ गई हE । इस प्रकर, लगभाग 05 वेर्ष, क तिवेल" क कWई करण स्पुष्ट नौहt तिकया गया हE । अतिभायाWक्त्र एक सहमां पुक्षा रह हE थी जि6स प्रकर स उसनौ तिवेल" क करण, Aमांक@ एवे" भाया या हE, उसक न्यायालया नौ यानौ क अनौसर कजिथी हजिथीयार अथीवे फोWर्टW/वे तियाW आतिदा क@ 6ब् अतिभायाW6नौ द्वार नौहt क@ गई हE । इस प्रकर अतिभायाWक्त्र क कथीनौ पुFण,_ स"दाहस्पुदा हE । उस तिवेश्वेसनौ या मांनौ हsए तिवेचरण न्यायालया द्वार क@ गई दाWर्षजिसतिX तिवेजिA क प्रकशा मांR ण्डिस्थीर रe 6नौ याWग्या नौहt हE । अ_ अपु ल स्वे कर क@ 6ए थी प्रश्नौA नौ दाWर्षजिसतिX एवे" दादाशा क तिनौण,या कW अपुस् कर हsए अपु लथी7/अतिभायाक्त कW दाWर्षमांक्त तिकया 6ए ।
5. उत्तीरवेदा /रज्या पुक्षा क@ ओर स उपुण्डिस्थी तिवेद्वानौ अजिAवेक्त नौ इस अपु ल क तिवेरWA कर हsए क, तिकया हE तिक अतिभायाW6नौ सतिक्षायाa नौ पुFण, रूपु स अतिभायाW6नौ मांमांल क समांथी,नौ
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A. No.-2039 of 2024} तिकया हE जि6सपुर अतिवेश्वेस तिकया 6नौ क कWई करण नौहt हE । तिवेचरण न्यायालया क
“प्रश्नौA नौ तिनौण,या” सक्ष्या क@ उतिच समां क्षा पुर आAरिर हE । अतिभायाW6नौ नौ अपु लथी7 क तिवेरूद्घ अपुनौ मांमांल स"दाह स पुर प्रमांतिण तिकया हE । अपु लथी7 पुक्षा द्वार अपु ल मांR उठया गया क, स्वे कर याWग्या नौहt हE । अ_ अपु ल eरिर6 तिकया 6या ।
6. उभायापुक्षा क क, सनौ गया और अतिभालe क सFक्ष्मांपुFवे,क पुरिरशा लनौ तिकया गया ।
7. याह ण्डिस्थीति स्पुष्ट हE तिक अतिभायाक्त क कWई तिचतिकत्स या पुर क्षाण नौहt करया गया हE थी उसक@ ओर स अपुनौ कथीनौ क समांथी,नौ मांR कWई भा सक्ष्या प्रस् नौहt तिकया गया हE । इनौ पुरिरण्डिस्थीतियाa क आAर पुर तिवेचरण न्यायालया द्वार याह तिनौष्कर्ष, तिनौकल गया हE तिक अतिभायाक्त क याह कथीनौ स्वे कर याWग्या नौहt हE तिक वेह शार रिरक स""A स्थीतिपु करनौ मांR सक्षामां नौहt थी ।
8. 6हf क, अतिभायाWक्त्र (अ.स.-3) क तिचतिकत्स या सक्ष्या क प्रश्नौ हE? इस स""A मांR तिचतिकत्सक अतिनौ तिमां"6 (अ.स.-4) द्वार याह या गया हE तिक अतिभायाWक्त्र क तिचतिकत्स या पुर क्षाण तिदानौ"क 28/05/2013 कW तिकया गया, जि6समांR त्कजिलक स"भाWग क कWई लक्षाण नौहt पुए गए । चFfतिक कजिथी घर्टनौ लगभाग 05 वेर्ष, पुFवे, क@ ई गई हE, ऐस
ण्डिस्थीति मांR उक्त तिचतिकत्स या सक्ष्या स भा अतिभायाक्त क तिवेरुX अतिभायाW6नौ क मांमांल कW कWई समांथी,नौ प्रप्ता नौहt हW हE ।
9. स"पुFण, मांमांल कW दृतिष्टग रe हsए याह ण्डिस्थीति स्पुष्ट हW हE तिक कजिथी घर्टनौ क समांया अतिभायाक्त अथीवे अतिभायाWक्त्र (अ.स.-3) क नौजिलग हWनौ क स""A मांR नौ W कWई सक्ष्या अतिभालe पुर उपुलब्A हE और नौ ह इस स""A मांR कWई आरWपु या तिकया गया हE । इस प्रकर याह स्पुष्ट हE तिक अतिभायाWक्त्र एक वेयास्क मांतिहल थी । सथी ह , 6 कजिथी घर्टनौ
6 / 10 {Cr. A. No.-2039 of 2024} क@ तिशाकया लगभाग 05 वेर्ष, पुश्च प्रस् क@ गई हE, स"पुFण, सक्ष्या क प्रकशा मांR अतिभायाWक्त्र क@ तिवेश्वेसनौ या ह तिनौरकरण क@ प्रमांe तिवेर्षया-वेस् हE ।
10.
न्यायादृष्ट" Santosh Prasad @ Santosh Kumar v. State of Bihar, (2020) 3 SCC 443 मांR उच्चमां न्यायालया द्वार अवेAरिर तिकया गया हE तिक लत्कर क अपुरA मांR एकमांत्र पु तिj क कथीनौ पुर भा दाWर्षजिसतिX क@ 6 सक हE तिकन् याह हWनौ चतिहए 6 पु तिj क यानौ तिवेश्वेस पुEदा करR थी पुFर रह स तिवेश्वेसनौ या, दाग और उत्क| ष्ट गणवेत्ती क प्र हW, 6W तिक तिनौम्नौनौसर अवेAरिर तिकया गया हE:-
“5.4.3. In Krishan Kumar Malik v. State of Haryana (2011) 7 SCC 130 it is observed and held by this Court that no doubt, it is true that to hold an accused guilty for commission of an offence of rape, the solitary evidence of the prosecutrix is sufficient provided the same inspires confidence and appears to be absolutely trustworthy, unblemished and should be of sterling quality. 5.5 With the aforesaid decisions in mind, it is required to be considered, whether is it safe to convict the accused solely on the solitary evidence of the prosecutrix? Whether the evidence of the prosecutrix inspires confidence and appears to be absolutely trustworthy, unblemished and is of sterling quality?”
6. Having gone through and considered the deposition of the prosecutrix, we find that there are material contradictions. Not only there are material contradictions, but even the manner in which the alleged incident has taken place as per the version of the prosecutrix is not believable. In the examination- in-chief, the prosecutrix has stated that after jumping the fallen compound wall accused came inside and thereafter the accused committed rape. She has stated that she identified the accused from the light of the mobile. However, no mobile is recovered. Even nothing is on record that there was a broken compound wall. She has further stated that in the morning at 10 O’clock she went to the police station
7 / 10 {Cr. A. No.-2039 of 2024} and gave oral complaint. However, according to the investigating officer a written complaint was given. It is also required to be noted that even the FIR is registered at 4:00 p.m. In her deposition, the prosecutrix has referred to the name of Shanti Devi, PW1 and others.
However, Shanti Devi has not supported the case of the prosecution. Therefore, when we tested the version of PW5-prosecutrix, it is unfortunate that the said witness has failed to pass any of the tests of “sterling witness”. There is a variation in her version about giving the complaint. There is a delay in the FIR. The medical report does not support the case of the prosecution. FSL report also does not support the case of the prosecution. As admitted, there was an enmity/dispute between both the parties with respect to land. The manner in which the occurrence is stated to have occurred is not believable. Therefore, in the facts and circumstances of the case, we find that the solitary version of the prosecutrix-PW5 cannot be taken as a gospel truth at face value and in the absence of any other supporting evidence, there is no scope to sustain the conviction and sentence imposed on the appellant and accused is to be given the benefit of doubt.”
11.
उपुरWक्त न्यायादृष्ट" क प्रकशा मांR अतिभायाWक्त्र (अ.स.-3) क यानौ क पुरिरशा लनौ करनौ स याह ण्डिस्थीति स्पुष्ट हW हE तिक उसनौ अपुनौ मांख्या पुर क्षाण मांR याह कह हE तिक कजिथी घर्टनौ तिदानौ"क 28/08/2008 कW वेह अपुनौ मां-तिपु क सथी घर पुर थी । उस तिदानौ सया" लगभाग 07.00 6 अतिभायाक्त क फोWनौ आया, जि6समांR अतिभायाक्त नौ याह कह तिक उसक मां3सर भाइयाa द्वार कW स उसक जिलए समांनौ भा6 गया हE थी स्वेया" अतिभायाक्त क वेहनौ "Aeर मांR eर हW 6नौ क करण वेह उक्त समांनौ लनौ आ 6ए । अतिभायाWक्त्र क अनौसर, वेह समांनौ लनौ अतिभायाक्त क पुस मांWर्टरसइतिकल मांR गई, 6हf अतिभायाक्त नौ उसक मांfह "दा कर, 6नौ स मांरनौ क@ Aमांक@ दा हsए थी हजिथीयार तिदाeकर भायाभा कर हsए उसक सथी लत्कर तिकया । उसनौ याह भा कह तिक 6 वेह रW रह थी , अतिभायाक्त नौ उसस तिवेवेह कर लनौ क@ कह थी याह Aमांक@ दा तिक यातिदा उसनौ घर्टनौ क@ 6नौकर
8 / 10 {Cr. A. No.-2039 of 2024} तिकस कW दा , W वेह उस 6नौ स मांर दाग । अतिभायाWक्त्र नौ याह भा कह हE तिक 6-6 अतिभायाक्त उसस तिमांल थी, वेह उस Aमांक थी और कह थी तिक उसनौ, उसक@ वे तियाW नौ ल हE, जि6स वेह प्रसरिर कर दाग, थी इन्हt Aमांतिकयाa क आAर पुर अतिभायाक्त नौ उसक सथी कई र लत्कर तिकया । अतिभायाWक्त्र नौ याह भा कह हE तिक 6 उसनौ अतिभायाक्त स तिवेवेह करनौ क@ कह , W अतिभायाक्त नौ याह कहकर इ"कर कर तिदाया तिक वेह उसस तिवेवेह नौहt कर सक ।
12.
अतिभायाWक्त्र (अ.स.-3) नौ याह भा कह हE तिक अतिभायाक्त गप्ता समां6 स स""जिA हE, 6तिक वेह हर समां6 क@ हE । प्रतिपुर क्षाण मांR अतिभायाWक्त्र नौ याह स्वे कर तिकया हE तिक तिदानौ"क 28/08/2008 क@ कजिथी घर्टनौ क समांया उसक शार र पुर कWई भा चWर्ट नौहt आई थी । उसनौ अपुनौ पुरिर6नौa कW उक्त घर्टनौ क स""A मांR कWई 6नौकर नौहt दा थी । कजिथी घर्टनौस्थील पुर अ"Aर थी । वेह जि6नौ कपुja मांR घर्टनौस्थील पुर गई थी , उन्हR दालकर वेह सW गई थी । उसनौ याह भा स्वे कर तिकया हE तिक 6 वेह घर्टनौस्थील स वेपुस आ रह थी , उस कई व्यातिक्तयाa नौ दाe थी, तिक" उसनौ घर्टनौ क स""A मांR तिकस कW भा क छ नौहt या । उसनौ याह भा कह हE तिक तिदानौ"क 28/08/2008 क पुश्च अतिभायाक्त द्वार उसक सथी क-क शार रिरक स""A स्थीतिपु तिकए गए, उसक@ तिजिथीयाf उस स्मांरण नौहt ह~ । उसनौ याह भा कह हE तिक एक अवेसर पुर, मांह तिदासम्र 2012 मांR, 6 वेह घर पुर अक ल थी , अतिभायाक्त उसक घर आया और उसक सथी शार रिरक स""A स्थीतिपु तिकया । अतिभायाWक्त्र नौ याह भा स्वे कर तिकया हE तिक पुहल र क@ कजिथी घर्टनौ क समांया तिवेवेह क कWई झां"स नौहt तिदाया गया थी । उस याह भा ज्ञा थी तिक अतिभायाक्त और वेह दाWनौa तिभान्न-तिभान्न 6ति समांदाया स स""जिA ह~ थी उनौक मांध्या समांजि6क रूपु स तिवेवेह स"भावे नौहt हE । उसनौ याह भा स्वे कर तिकया हE तिक 6 अतिभायाक्त कW नौ3कर प्रप्ता हW गई और
9 / 10 {Cr. A. No.-2039 of 2024} अतिभायाक्त द्वार तिकस अन्या लjक@ स तिवेवेह करनौ क@ कह गई, उसनौ अतिभायाक्त स तिवेवेह करनौ क@ इच्छ व्याक्त क@ थी । अतिभायाक्त क@ नौ3कर लगनौ स पुFवे, उसनौ कभा भा
अपुनौ पुरिर6नौa क समांक्षा अतिभायाक्त स तिवेवेह करनौ क@ इच्छ व्याक्त नौहt क@ थी । उसनौ याह भा स्वे कर तिकया हE तिक वेर्ष, 2013 क मांह अप्रEल मांR दाWनौa पुक्षाa क पुरिर6नौa क मांध्या एक Eठक हsई थी , जि6समांR दाWनौa क तिवेवेह क@ सहमांति क स""A मांR च क@ गई थी ।
13.
इस प्रकर, अतिभायाWक्त्र (अ.स.-3) क कथीनौ स याह ण्डिस्थीति स्पुष्ट हW हE तिक वेह लगभाग 05 वेर्षg" क अतिभायाक्त क सथी प्रमां स""A मांR रह थी इस दा3रनौ उनौक मांध्या शार रिरक स""A स्थीतिपु हW रह । उक्त अवेजिA मांR नौ W अतिभायाWक्त्र द्वार कहt कWई तिशाकया क@ गई और नौ ह उसनौ इस स""A मांR अपुनौ पुरिर6नौa कW कWई सFचनौ दा । मांमांल मांR जि6स प्रकर अतिभायाक्त द्वार Aमांक@ दानौ एवे" भाया उत्पुन्न करनौ क आरWपु लगया गया हE, उस स""A मांR नौ W तिकस कजिथी हजिथीयार क@ 6ब् क@ गई हE और नौ ह तिकस कजिथी वे तियाW क@ 6ब् क@ गई हE । सथी ह , याह भा पुरिरलतिक्षा हW हE तिक लगभाग 05 वेर्ष, पुश्च, 6 दाWनौa पुक्षाa क मांध्या तिवेवेह क तिवेर्षया पुर Eठक हsई थी अतिभायाक्त द्वार तिवेवेह स इ"कर तिकया गया, अतिभायाWक्त्र द्वार जिलजिe तिशाकया प्रस् क@ गई ।
14. इनौ समांस् पुरिरण्डिस्थीतियाa मांR याह पुया 6 हE तिक अतिभायाWक्त्र , 6W एक वेयास्क मांतिहल हE, वेह सहमां पुक्षा रह हE । स"पुFण, सक्ष्या तिवेवेचनौ क आAर पुर याह न्यायालया पु हE तिक अतिभायाWक्त्र (अ.स.-1) क कथीनौ स"दाह स पुर तिवेश्वेसनौ या नौहt हE । पुरिरणमांस्वेरूपु, अतिभायाक्त क@ दाWर्षजिसतिX एवे" दादाशा क तिनौण,या तिवेजिA क प्रकशा मांR ण्डिस्थीर रe 6नौ याWग्या नौहt हE ।
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15. अ_ अपु ल स्वे कर क@ 6 हE । “प्रश्नौA नौ दाWर्षजिसतिX वे दादाशा” क तिनौण,या अपुस् तिकया 6 हE थी अपु लथी7 कW स"दाह क लभा दा हsए आरWतिपु अपुरA स दाWर्षमांक्त तिकया 6 हE ।
16. अपु लथी7 हर्ष,दा गप्ता कW 6मांनौ पुर या गया हE । दा प्रतिक्रया स"तिह, 1973 क@ Aर-437 (क) क ह उसक 6मांनौ-मांचलक और 06 मांह क जिलए प्रभावेशा ल रहग त्पुश्च€ अन्या न्यायालया मांR उपुण्डिस्थी हWनौ क@ आवेश्याक नौ रहनौ पुर मांक्त समांझां 6याग ।
17. तिनौण,या क@ प्रति क सथी तिवेचरण न्यायालया कW मांFल अतिभालe आवेश्याक कया,वेह ह सFचनौथी, एवे" पुलनौथी, शा घ्रपुFवे,क वेपुस प्रतिर्ष हW । सह /- (स"6या क मांर 6यासवेल) न्यायाA शा पुWमांनौ