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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 927 (ALL)

AYUSH PRATAP SINGH YADAV v. STATE OF U.P. AND ANOTHER

NA528/13565/2026 · 2026-04-19

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 13565 of 2026 Court No. - 82 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र, पिरवाद सं० 3469, वषर् 2024, अन्तगर्त धारा 323, 504, 506, 406 भा०दं०िव०, थाना कोतवाली खलीलाबाद, िजला संत कबीर नगर, में िसिवल जज (जू०िड०)-प्रथम, संतकबीर नगर द्वारा पािरत सम्मन आदेश िदनांक 13.10.2025 एवं इस वाद की संपूणर् कायर्वाही को खिण्डत करने हेतु योिजत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता का कथन है िक उभय पक्ष के मध्य लेन-देन का िववाद है तथा स्वीकार भी िकया गया है। इसिलए, इस प्रकरण में पक्षकारों के मध्य सुलह-समझौता हो जाने की संभावना है। अतः इस प्रकरण को संबंिधत अवर न्यायालय के मध्यस्थता के न्द्र को स्थानान्तिरत कर िदया जाय। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता का तकर् है िक उनका यह अनुरोध स्वीकार िकए जाने में कोई आपित्त नहीं है। 5. पत्रावली के पिरशीलन एवं उपयुर्क्त तथ्यों के दृिष्टगत इस प्रकरण में यह िनदेर्िशत िकया जाता है िक दोनों पक्षकार संबंिधत अवर/िवचारण न्यायालय के समक्ष उपिस्थत होकर मामलें को सुलह-समझौता के द्वारा िनस्तािरत करने के िलए आवेदन पत्र प्रस्तुत करें। यिद, प्रकरण को सुलह-समझौता के आधार पर िनस्तािरत करने के संबंध में आवेदन पत्र, अवर/िवचारण न्यायालय के समक्ष प्रस्तुत िकया जाता है तो संबंिधत न्यायालय द्वारा आवेदन पत्र प्रस्तुत िकए जाने की ितिथ से एक सप्ताह के अंदर उस पर उिचत आदेश पािरत िकया जाय तथा संबंिधत मध्यस्थता कें द्र (Mediation center) द्वारा उसे 03 माह के अन्दर िनस्तािरत कर िदया Versus Counsel for Applicant(s) : Abhilasha Singh, Rahul Yadav Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Ayush Pratap Singh Yadav .....Applicant(s) State of U.P. and Another .....Opposite Party(s) जाय। 6. उपरोक्त वाद का मध्यस्थता कें द्र में िनस्तािरत होने तक आवेदक के िवरूद्ध कोई प्रपीड़क कायर्वाही नहीं की जाएगी। 7. यहाँ पर यह स्पष्ट िकया जाता है िक यिद पक्षकारों के मध्य उक्त मध्यस्थता की प्रिक्रया िवफल होती है तो संबंिधत अवर/िवचारण न्यायालय उपरोक्त वाद में आवेदक के िवरूद्ध िनयमानुसार िविधक कायर्वाही करने को स्वतंत्र है और यिद पक्षकारों के मध्य उक्त मध्यस्थता की प्रिक्रया सफल होती है तो आवेदक मध्यस्थता कें द्र की उस आख्या के साथ इस न्यायालय में आने को स्वतंत्र हैं। 8. उपरोक्त अभ्युिक्त के साथ धारा 528 भारतीय नागिरक सुरक्षा संिहता के अन्तगर्त प्रस्तुत िकया गया यह आवेदन पत्र अंितम रूप से िनस्तािरत िकया जाता है। April 20, 2026 CP.sahani NA528 No. 13565 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad