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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 8033 (ALL)

WAJID v. STATE OF U.P. AND 3 OTHERS

NA528/39460/2026 · 2026-09-16

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 39460 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. आवेदक की ओर से धारा 528 भारतीय सुरक्षा संिहता के अंतगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 285/2025, अंतगर्त धारा 64(1) बी.एन.एस. व धारा 3/4(2) पाक्सो एक्ट तथा धारा 9, 10, 11 बाल िववाह प्रितषेध अिधिनयम, थाना िमलक, िजला रामपुर में प्रेिषत आरोप पत्र, िदनांिकत 18.11.2025 से उद्भूत िवषेष वाद/एफ०आर०सं० 19/2026 में िवशेष न्यायाधीश (पाक्सो एक्ट), रामपुर द्वारा पािरत तलबी आदेश िद० 20.02.2026 तथा इस वाद की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने हेतु योिजत िकया गया है। 2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता का तकर् है िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध प्रकट नहीं होता है और वतर्मान अिभयोजन दुभार्वनापूणर् इरादे से उत्पीड़न करने के उद्देश्य से संिस्थत िकया गया है। यहां प्रासंिगक है िक प्रथम सूचना िरपोटर् अितिवलंब से पंजीकृ त कराया गया है तथा किथत घटना के समय किथत पीिड़ता वास्तव में बािलग थी। वतर्मान प्रथम सूचना िरपोटर् कानून की प्रिक्रया का घोर दुरुपयोग है, जो पूरी तरह से मनगढ़ंत और आवेदक को परेशान करने के दुभार्वनापूणर् इरादे से बनाई गई है। पक्षों के बीच िववाह 20.10.2024 को आपसी सहमित से शांितपूवर्क संपन्न हुआ था और वे िबना िकसी िववाद के आपस में सौहादर्पूणर् ढंग से रहे। एफआईआर में लगाए गए आरोप पूरी तरह से अस्पष्ट हैं, जो स्पष्ट रूप से यह दशार्ते हैं िक यह एक जवाबी कारर्वाई (काउंटर ब्लास्ट) का मामला है। आवेदक के िवरुद्ध प्रथम दृष्टय कोई भी मामला नहीं बनता है। पुनः उनके द्वारा अपने तकर् के समथर्न में कु छ दस्तावेजों और बयानों की ओर ध्यान आकिषत िकया। 4. िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता ने कथन िकया िक प्रश्नगत मामलें में समुिचत िववेचना के उपरांत अिभयुक्त के िवरूद्ध आरोप पत्र दािखल िकया जा चुका है तथा उस पर संबंिधत िवचारण न्यायालय द्वारा पयार्प्त आधार पर प्रश्नगत आदेश पािरत िकया है तथा अिभयुक्त के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा प्रश्नगत आदेश को अपास्त करने हेतु जो तकर् प्रस्तुत िकए गए वे बलहीन है। 5. इस चरण पर, आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता द्वारा उठाए गए तकर् में तथ्यात्मक िववाद का न्याियक िनणर्य (adjudication) और साक्ष्य का मूल्यांकन (appraisal) शािमल है। 6. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्ता के तकोर्ं एवं अिभलेख पर मौजूद सामग्री के अवलोकन से और इस चरण पर मामले के तथ्यों को देखते हुए यह नहीं कहा जा सकता िक आवेदक के िवरुद्ध कोई अपराध नहीं बनता है। बार Versus Counsel for Applicant(s) : Ram Ashish Yadav Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Wajid .....Applicant(s) State Of U.P. And 3 Others .....Opposite Party(s) (न्यायालय) के समक्ष िकए गए सभी अिभवचन (submissions) तथ्य के िववािदत प्रश्नों से संबंिधत हैं, िजनका इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एन.एन.एस. के अंतगर्त न्याियक िनणर्य नहीं िकया जा सकता है। इस चरण पर के वल प्रथम दृष्टया (prima facie) मामला देखा जाना है, जैसा िक माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा आर.पी. कपूर बनाम पंजाब राज्य, ए.आई.आर. 1960 एस.सी. 866, हिरयाणा राज्य बनाम भजन लाल, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 426, िबहार राज्य बनाम पी.पी. शमार्, 1992 एससीसी (िक्रिमनल) 192 और अंत में झंडू फामार्स्युिटकल वक्सर् िलिमटेड बनाम मोहम्मद शराफु ल हक एवं अन्य (पैरा-10) 2005 एससीसी (िक्रिमनल) 283 के मामलों में प्रितपािदत कानून के आलोक में स्पष्ट िकया गया है। इसिलए, इस मामले की संपूणर् कायर्वाही को िनरस्त करने की प्राथर्ना को अस्वीकार िकया जाता है। 7. तद्नुसार, यह आवेदन पत्र िनरस्त िकया जाता है। 8. कायार्लय को िनदेर्श िदया जाता है िक इस आदेश की एक प्रितिलिप संबंिधत अवर न्यायालय को अिवलम्ब भेजना सुिनिश्चत िकया जाय। 9. यिद इस वाद में कोई अंतिरम आदेश हो तो, उसे समाप्त समझा जाय। September 17, 2026 CP.sahani NA528 No. 39460 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad