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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 8003 (ALL)

RIJVANA BANO AND ANOTHER v. STATE OF UP AND 3 OTHERS

WRIC/37497/2026 · 2026-09-17

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 37497 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1. यािचकाकतार्ओं के िवद्वान अिधवक्ता, िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 2. इस यािचका के माध्यम से यािचकाकतार्ओं ने एक परमादेश िरट जारी करने की मांग की है िजसमें प्रितवािदयों को िनदेर्श िदया जाए िक वे यािचकाकतार्ओं के शांितपूणर् वैवािहक जीवन में पित-पत्नी के रूप में हस्तक्षेप न करें और साथ ही संबंिधत अिधकािरयों को यािचकाकतार्ओं को सुरक्षा प्रदान करने का िनदेर्श देने की भी मांग की गई है। 3. यािचकाकतार्ओं के िवद्वान अिधवक्ता ने बताया है िक यद्यिप दोनों यािचकाकतार् बािलग हैं, लेिकन वे अलग-अलग धमोर्ं के हैं। वे अिववािहत हैं और िलव-इन िरलेशनिशप में रह रहे हैं। इसके अलावा, यह भी बताया गया है िक िनजी प्रितवादी और पिरवार के अन्य सदस्य नाराज हैं और उन्हें धमकी और उत्पीड़न का सामना करना पड़ रहा है, िजससे उनके जीवन को गंभीर खतरा है। इसिलए, यािचकाकतार्ओं ने िनजी प्रितवािदयों से अपने जीवन की रक्षा के िलए पुिलस अिधकािरयों को िनदेर्श जारी करने हेतु भारत के संिवधान के अनुच्छेद 226 के तहत यह िरट यािचका दायर की है। 4. िवद्वान अितिरक्त मुख्य स्थायी अिधवक्ता ने िरट यािचका में की गई प्राथर्ना का िवरोध िकया है। 5. वतर्मान यािचका में शािमल मामला पहले ही िरट यािचका संख्या 41127/2025 (नूरी और अन्य बनाम उत्तर प्रदेश राज्य और अन्य), 2026 एससीसी ऑनलाइन ऑल 456 में िनपटाया जा चुका है, िजसमें इस न्यायालय की एक समन्वय पीठ ने समान प्रकृ ित की कई िरट यािचकाओं को स्वीकार करते हुए, अलग-अलग धमोर्ं के उन यािचकाकतार्ओं को संरक्षण िदया Versus Counsel for Petitioner(s) : Kushal Raj Chaudhary, Mukesh Kumar Bharti, Rajnish Kumar Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Rijvana Bano And Another .....Petitioner(s) State Of Up And 3 Others .....Respondent(s) था जो अपनी स्वतंत्र इच्छा और पसंद से िलव-इन िरलेशनिशप में रह रहे थे। इसके अलावा, वतर्मान मामले के तथ्य नूरी और अन्य (उपरोक्त) के तथ्यों के समान हैं, इसिलए वतर्मान िरट यािचका का िनपटारा िनम्निलिखत शतोर्ं के अनुसार िकया जा रहा है। 6. एक बार जब कोई वयस्क व्यिक्त अपना जीवनसाथी चुन लेता है, तो िकसी अन्य व्यिक्त, चाहे वह पिरवार का सदस्य ही क्यों न हो, को आपित्त करने या उनके शांितपूणर् जीवन में बाधा डालने का अिधकार नहीं है। संिवधान द्वारा प्रदत्त दाियत्वों के अनुसार, राज्य का यह परम कतर्व्य है िक वह प्रत्येक नागिरक के जीवन और स्वतंत्रता की रक्षा करे। मानव जीवन के अिधकार को सवोर्च्च प्राथिमकता दी जानी चािहए, चाहे नागिरक नाबािलग हो या वयस्क, िववािहत हो या अिववािहत। के वल इस तथ्य से िक यािचकाकतार्ओं ने िववाह संपन्न नहीं िकया है, उन्हें भारत के नागिरक होने के नाते भारत के संिवधान में पिरकिल्पत उनके मौिलक अिधकार से वंिचत नहीं िकया जा सकता। न्यायालय द्वारा यह भी कथन िकया गया िक भारत के संिवधान के अनुच्छेद 21 के अंतगर्त संवैधािनक मौिलक अिधकार सवोर्च्च प्राथिमकता रखता है। पिवत्र होने के नाते, संवैधािनक व्यवस्था के अंतगर्त इसकी रक्षा की जानी चािहए, चाहे पक्षों के बीच िववाह संपन्न हुआ हो या न हुआ हो। 7. यािचकाकतार्, जो की बािलग हैं, ने िववाह के िबना एक साथ रहने का िनणर्य िलया है और उनके इस िनणर्य पर न्यायालयों का कोई अिधकार क्षेत्र नहीं है। यिद यािचकाकतार्ओं ने कोई अपराध नहीं िकया है, तो न्यायालय को उनकी सुरक्षा प्रदान करने की प्राथर्ना को स्वीकार न करने का कोई कारण नहीं िदखता। 8. मामले के तथ्यों और पिरिस्थितयों को ध्यान में रखते हुए, न्यायालय का यह मत है िक यािचकाकतार्ओं को शांितपूवर्क एक साथ रहने की स्वतंत्रता है और िकसी को भी उनके शांितपूणर् जीवन में हस्तक्षेप करने की अनुमित नहीं दी जाएगी। जीवन का अिधकार संिवधान के अनुच्छेद 21 के तहत सुिनिश्चत एक मौिलक अिधकार है, िजसमें यह प्रावधान है िक िकसी भी व्यिक्त को उसके जीवन और व्यिक्तगत स्वतंत्रता के अिधकार से कानून द्वारा स्थािपत प्रिक्रया के अलावा िकसी अन्य तरीके से वंिचत नहीं िकया जाएगा। 9. यिद यािचकाकतार् के शांितपूणर् जीवन में िकसी प्रकार की बाधा उत्पन्न होती है, तो यािचकाकतार् इस आदेश की प्रमािणत प्रित के साथ संबंिधत पुिलस आयुक्त/एसएसपी/एसपी से संपकर् करेंगे। पुिलस अिधकारी यह सुिनिश्चत करने के बाद िक यािचकाकतार् वयस्क हैं और स्वेच्छा से एक साथ रह रहे हैं, उन्हें तत्काल सुरक्षा प्रदान करेगा। यिद यािचकाकतार् िशिक्षत हैं और वे अपने शैक्षिणक प्रमाण पत्र और कानून के तहत मान्य अन्य प्रमाण पत्र प्रस्तुत करते हैं, िजनसे यह स्पष्ट होता है िक वे वयस्क हैं और अपनी मजीर् से रह रहे हैं, तो कोई भी पुिलस अिधकारी उनके िखलाफ कोई दंडात्मक कारर्वाई नहीं करेगा, जब तक िक उनके िखलाफ WRIC No. 37497 of 2026 2 िकसी भी अपराध के संबंध में एफ.आई.आर. दजर् न हो जाए। यिद उनके पास आयु संबंधी कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं है और वे ग्रामीण पृष्ठभूिम से आते हैं और/या िनरक्षर/अधर्-साक्षर हैं, तो पुिलस अिधकारी उनकी सही आयु सत्यािपत करने के िलए अिस्थ-परीक्षण करा सकता है और कानून के तहत अनुमत अन्य प्रिक्रयाओं का भी पालन कर सकता है। 10. उपरोक्त िटप्पिणयों/िनदेर्शों के साथ, यह यािचका िनस्तािरत की जाती है। September 18, 2026 S.Mishra WRIC No. 37497 of 2026 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad