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HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD APPLICATION U/S 528 BNSS No. - 39570 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J.
1. आवेदक की ओर से धारा 528 बी.एन.एस.एस. के अन्तगर्त यह आवेदन पत्र, मु०अ०सं० 13 सन 2024, अन्तगर्त धारा 60 आबकारी अिधिनयम व धारा 272, 273, 420, 467, 468, 471 भा०दं०िव० व धारा 54/63 कापीराइट एक्ट, थाना कछवा, िजला िमजार्पुर में प्रेिषत आरोप पत्र, िदनांिकत 25.09.2024 से उद्भूत दािण्डक वाद सं० 226/2025 (State Vs. Guddu alias Nitesh Jaiswal alias Monu and others), जो िसिवल न्यायाधीश (जू०िड०), एफ.टी.सी., िमजार्पुर के न्यायालय में लंिबत है, में पािरत प्रंसज्ञान/तलबी आदेश िद० 10.04.2025 तथा इस वाद की इस वाद की संपूणर् कायर्वाही को अपास्त करने हेतु योिजत िकया गया है।
2. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान अपर शासकीय अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया।
3. आवेदक के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक आवेदक िनदोर्ष हैं, आवेदक ने तथाकिथत अपराध कािरत नहीं िकया है तथा संबंिधत अवर/िवचारण न्यायालय द्वारा पािरत प्रश्नगत आदेश सकारण एवं िविध सम्मत नहीं हैं, आवेदक के िवरूद्ध उपरोक्त धाराओं का कोई अपराध नहीं बनता है। उनका यह भी कथन है िक वह प्राथर्ना खण्ड में की गई अन्य प्राथर्नाओं पर बल नहीं डालना चाहते हैं, बिल्क अवर/िवचारण न्यायालय में उन्मोचन प्राथर्ना पत्र दािखल करने की अनुमित चाहते हैं तथा उनके द्वारा दािखल िकए गए उन्मोचन प्राथर्ना पत्र का िनस्तारण करने को संबंिधत अवर न्यायालय को िनदेर्श िदया जाय।
4. िवद्वान अिधवक्ता अपर शासकीय अिधवक्ता द्वारा आवेदक के तकोर्ं का प्रबल िवरोध िकया गया ।
5. उभय पक्ष के िवद्वान अिधवक्तागण के तकोर्ं को सुनने एवं पत्रावली पर उपलब्ध अिभलेखों Versus Counsel for Applicant(s) : Arpan Kumar Pandey, Shishir Tandon Counsel for Opposite Party(s) : G.A. Arvind Kumar Gupta .....Applicant(s) State Of U.P. And 2 Others .....Opposite Party(s)
के अवलोकन से इस स्तर पर यह नहीं कहा जा सकता है िक आवेदक के िखलाफ उपरोक्त धाराओं के अन्तगर्त कोई अपराध गिठत नहीं होता है। आवेदक की ओर से जो तकर् प्रस्तुत िकए गए हैं वे िववािदत तािथ्यक प्रश्न से संबंिधत हैं, िजनके िवषय में इस न्यायालय द्वारा धारा 528 बी.एऩ.एस.एस. के आवेदन पत्र पर कोई फै सला देना संभव नहीं है, चूंिक उक्त तािथ्यक प्रश्नों का िविनश्चय िवचारण न्यायालय द्वारा ही साक्ष्य आने के बाद िकया जा सकता है। इस संबंध में माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा R.P. Kapur Vs. State of Punjab, AIR 1960 SC 866, State of Haryana Vs.
Bhajan Lal, 1992 SCC (Cri.) 426, State of Bihar Vs. P.P. Sharma, 1992 SCC (Cri.) 192 and lastly Zandu Pharmaceutical Works Ltd. Vs. Mohd. Saraful Haq and another, (Para-10) 2005 SCC (Cri.) 283 में िदए गए िनणर्यों में यह अवधािरत िकया गया है िक इस स्तर पर के वल प्रथम दृष्टया ही के स देखा जाना है। आवेदक/अिभयुक्त का जो िववािदत बचाव कथन है उस पर इस स्तर पर िवचार नहीं िकया जा सकता है।
6. हालाँिक, यिद आवेदक चाहें तो संबंिधत िवचारण न्यायालय के समक्ष एक माह के अंदर उन्मोचन प्राथर्ना पत्र दािखल कर सकते हैं। यिद, आवेदक द्वारा एक माह के अंदर िवचारण न्यायालय में उन्मोचन प्राथर्ना पत्र दािखल िकया जाता है तो संबंिधत िवचारण न्यायालय द्वारा उभय पक्षों को सुनकर, न्यायोिचत आदेश के माध्यम से उसका िनस्तारण उपलब्ध साक्ष्य के आधार पर यथासंभव 02 माह के अंदर िकया जाएगा।
7. उक्त िनदेर्शों के साथ यह प्राथर्ना पत्र अिन्तम रूप से िनस्तािरत िकया जाता है। September 17, 2026 CP.sahani NA528 No. 39570 of 2026 2 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- CHANDRA PRAKASH SAHANI High Court of Judicature at Allahabad