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Allahabad High Court · body

2026 DAILYLAW 7137 (ALL)

SMT. RIYA AND ANOTHER v. STATE OF UTTAR PRADESH AND 2 OTHERS

WRIC/37475/2026 · 2026-09-17

Gautam Chowdhary

body2026

Judgment text

Extracted from the PDF above. The PDF is authoritative.

HIGH COURT OF JUDICATURE AT ALLAHABAD WRIT - C No. - 37475 of 2026 Court No. - 75 HON'BLE DR. GAUTAM CHOWDHARY, J. 1- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता एवं िवद्वान स्थायी अिधवक्ता को सुना तथा पत्रावली का पिरशीलन िकया। 2- याचीगण की ओर से इस यािचका के माध्यम से, याचीगण एक परमादेश िरट जारी करने की माँग कर रहे है, िजसमें प्रत्युत्तरदातागण को, याचीगण के पित और पत्नी के रूप में शािन्तपूणर् वैवािहक जीवन में हस्तक्षेप न करने का िनदेर्श िदया जाय तथा संबंिधत अिधकािरयों को यह िनदेर्श देने की मांग की गयी है िक वे याचीगण को सुरक्षा प्रदान करें। 3- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता ने तकर् प्रस्तुत िकया िक याचीगण वयस्क है और उन्होंने अपनी मजीर् और सहमित से िबना िकसी दबाव के एक दूसरे के साथ िववाह कर िलया है और दोनों पित-पत्नी के रूप में दाम्पत्य जीवन व्यतीत कर रह रहे हैं, याचीगण ने अपने उम्र के समथर्न में याची सं. 01 हाईस्कू ल की माकर् शीट की प्रितिलिप एवं याची सं. 02 ने हाईस्कू ल की माकर् शीट की प्रितिलिप, यािचका के साथ संलग्न िकया है. िजनके अवलोकन से यह स्पष्ट है िक दोनों याचीगण बािलग हैं यािचका में िदए गए कथन याचीगण के संयुक्त हलफनामों द्वारा समिथत हैं। इसके अलावा यह भी अनुरोध िकया गया है िक िनजी प्रत्युत्तरदाता और पिरवार के अन्य सदस्य याचीगण द्वारा िकए गए इस िववाह से नाराज हो गए है और उनके द्वारा याचीगण को धमकी दी जा रही है और उन्हें परेशान िकया जा रहा है िजसके कारण याचीगण के जीवन को गंभीर खतरा है। 4- याचीगण के िवद्वान अिधवक्ता का यह भी कथन है िक याचीगण द्वारा अपने िववाह का पंजीकरण कराने का वचन िदया गया है वह शीघ्र अित शीघ्र िववाह का पंजीकरण करवा लेंगे। 5- याचीगण ने यािचका में कहा है िक वे पित-पत्नी के रूप में रह रहे है तथा उन्हें आशंका है िक िनजी प्रत्युत्तरदाता अपने पिरवार के सम्मान के िलए घोर उपहित कािरत अथवा उन्हें खत्म कर Versus Counsel for Petitioner(s) : Sudhir Kumar Counsel for Respondent(s) : C.S.C. Smt. Riya And Another .....Petitioner(s) State Of Uttar Pradesh And 2 Others .....Respondent(s) सकते है, यिद यह न्यायालय उन्हें सुरक्षा प्रदान नहीं करता है तो उनका जीवन खतरे में पड़ सकता है। 6- प्रस्तािवत आदेश पािरत िकए जाने के दृिष्टगत िनजी प्रत्युत्तरदाता को नोिटस जारी करने की कोई आवश्यकता नहीं है, पक्षकारों की ओर से उपिस्थत िवद्वान अिधवक्ताओं की सहमित से इस िरट यािचका को न्यायालय के िनयमों के अनुसार इस स्तर पर अिन्तम रूप से िनस्तारण िकया जा रहा है। 7- माननीय उच्चतम न्यायालय ने कई िनणर्यों में यह कानून तय िकया है िक जहाँ एक लड़का और लड़की बािलग हैं और वे अपनी स्वतंत्र इच्छा से एक साथ रह रहे हैं तो उनके माता-िपता सिहत िकसी को भी उनके साथ रहने में हस्तक्षेप करने का अिधकार नहीं है। माननीय उच्चतम न्यायालय द्वारा इस संबंध में Gian Devi v. The Superintendent, Nari Niketan, Delhi and others, (1976) 3 SCC 234; Lata Singh v. State of U.P. and another, (2006) 5 SCC 475; and Bhagwan Dass v. State (NCT of Delhi), (2011) 6 SCC 396, which have consistently been followed by the Supreme Court and this court, as well as of this Court in Deepika and another v. State of U.P. And others, 2013 (9) ADJ 534. The Supreme Court in Gian Devi (supra) has held as under: "Whatever may be the date of birth of the petitioner, the fact remains that she is at present more than 18 years of age. As the petitioner is sui juris no fetters can be placed upon her choice of the person with whom she is to stay, nor can any restriction be imposed regarding the place where she should stay. The court or the relatives of the petitioner can also not substitute their opinion or preference for that of the petitioner in such a matter." 8- मामले के तथ्यों एवं पिरिस्थितयों के दृिष्टगत इस न्यायालय का मत है िक याचीगण एक साथ रहने की िलए स्वतंत्र है तथा िकसी भी व्यिक्त को उनके शािन्तपूणर् जीवन िनवार्ह करने में हस्तक्षेप करने की अनुमित नहीं दी जाएगी। यिद याचीगण के शािन्तपूणर् जीवन िनवार्ह में कोई व्यवधान उत्पन्न होता है तो याचीगण संबंिधत विरष्ठ पुिलस अधीक्षक/पुिलस अधीक्षक (प्रत्युत्तरदाता सं० 2) से इस आदेश की प्रमािणत प्रितिलिप के साथ संपकर् करेंगे, और उक्त प्रत्युत्तरदाता सं० 2 को िनदेर्िशत िकया जाता है िक वे याचीगण को तत्काल सुरक्षा प्रदान करेंगे। 9- िनजी प्रत्युत्तरदाता को यह स्वतंत्रता प्रदान की जाती है िक यिद याचीगण द्वारा अिभलेख पर WRIC No. 37475 of 2026 2 लाए गए दस्तावेज मनगढ़न्त या फजीर् हैं तो वे इस आदेश को वापस लेने के िलए िरकॉल आवेदन दायर करने के िलए स्वतंत्र होंगे। 10- चूंिक (2006) 2 SCC 578 and (2008) 1 SCC 180 Seema (Smt.) Vs Ashwani Kumar, मामले में माननीय उच्चतम न्यायालय के िनणर्य के अनुसार िववाह का पंजीकरण अिनवायर् है, इसिलए याचीगण आज से 02 माह के अन्दर अपने िववाह का पंजीकरण कराने का वचन देते हैं। 11- यिद याचीगण उपरोक्त िनधार्िरत अविध के भीतर अपने िववाह का पंजीकरण नहीं करा पाते हैं तो इस आदेश के तहत दी गयी सुरक्षा स्वतः ही समाप्त हो जाएगी। 12- यह स्पष्ट िकया जाता है िक इस न्यायालय ने याचीगण के किथत िववाह पर कोई िनणर्य नहीं िदया है और यह आदेश िकसी भी तरह से याचीगण के िववाह की वैधता के बारे में कोई राय नहीं व्यक्त करता है। 13- उपरोक्त िटप्पिणयों के साथ यह िरट यािचका िनस्तािरत की जाती है। मूल्य के बारे में कोई आदेश नहीं पािरत िकया जा रहा है। September 18, 2026 S.Mishra WRIC No. 37475 of 2026 3 (Dr. Gautam Chowdhary,J.) Digitally signed by :- SHASHI MISHRA High Court of Judicature at Allahabad